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Ghaziabad News: धमकी और गाली-गलौज के मामले में परिवाद दर्ज करने का आदेश
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गाजियाबाद। पड़ोसी से विवाद के एक मामले में अदालत ने शिकायत को परिवाद के रूप में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट संख्या एक ने सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 जून की तारीख तय की गई है।
शिकायतकर्ता सोमदत्त शर्मा ने कोर्ट में दी अर्जी में आरोप लगाया कि आठ दिसंबर 2025 को उनके पड़ोसी बिजेंद्र और मयंक ने उनके घर में घुसकर उनकी पत्नी और पुत्री के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए गाली गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने घर में लगे सीसीटीवी कैमरे को तोड़ने का प्रयास किया।
सोमदत्त शर्मा का कहना है कि उन्होंने इस घटना की शिकायत थाना कोतवाली और उच्च अधिकारियों से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अदालत ने मामले में थाना कोतवाली से रिपोर्ट तलब की। इसमें बताया गया कि इस संबंध में कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हर मामले में सीधे पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देना आवश्यक नहीं होता और शिकायत को परिवाद के रूप में भी सुना जा सकता है। इसी आधार पर अदालत ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया, जिससे मामले की आगे विधिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई होगी।
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शिकायतकर्ता सोमदत्त शर्मा ने कोर्ट में दी अर्जी में आरोप लगाया कि आठ दिसंबर 2025 को उनके पड़ोसी बिजेंद्र और मयंक ने उनके घर में घुसकर उनकी पत्नी और पुत्री के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए गाली गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने घर में लगे सीसीटीवी कैमरे को तोड़ने का प्रयास किया।
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सोमदत्त शर्मा का कहना है कि उन्होंने इस घटना की शिकायत थाना कोतवाली और उच्च अधिकारियों से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अदालत ने मामले में थाना कोतवाली से रिपोर्ट तलब की। इसमें बताया गया कि इस संबंध में कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हर मामले में सीधे पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देना आवश्यक नहीं होता और शिकायत को परिवाद के रूप में भी सुना जा सकता है। इसी आधार पर अदालत ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया, जिससे मामले की आगे विधिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई होगी।
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