{"_id":"57bdca544f1c1b7c11d4efa2","slug":"officers-do-not-sting-and-daughters-in-the-womb-how-to-avoid","type":"story","status":"publish","title_hn":"अफसर नहीं करते स्टिंग, कोख में कैसे बचें बेटियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अफसर नहीं करते स्टिंग, कोख में कैसे बचें बेटियां
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:33 PM IST
विज्ञापन
नवजात शिशु
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोख में हो रही बेटियों की हत्या और घटते लिंगानुपात के प्रति प्रशासन कितना गंभीर है इसका अंदाजा डेकोय पेशेंट बजट से लगाया जा सकता है। लिंग परीक्षण को रोकने के लिए अल्ट्रासाउंड सेंटर्स पर छापामारी अभियान चलाने के लिए शासन द्वारा डेकोय पेशेंट की व्यवस्था की गई है लेकिन पिछले तीन साल में इसका इस्तेमाल तक नहीं किया गया है।
विज्ञापन
पीएनडीटी एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापेमारी के लिए ‘डेकोय पेशेंट’( डमी पेसेंट) के जरिए स्टिंग कराने का प्रावधान है। इसके लिए हेल्थ डिपार्टमेंट को एनएचएम के तहत सालाना बजट आवंटित होता है। लिंग परीक्षण रोकने के लिए एनएचएम द्वारा किसी को ‘डेकोय पेशेंट’ बनाकर जांच को टीम भेजने के हर जिले को 35 हजार रुपये का बजट मिलता है।
विज्ञापन
इसके तहत किसी गर्भवती महिला को फर्जी मरीज बनाकर लिंग परीक्षण कराने के लिए अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर टीम सहित भेजा जाता है। जब अल्ट्रासाउंड केंद्र लिंग परीक्षण को राजी हो जाता है तो मौके पर ही उसके पकड़ लिया जाता है। दिखावे के लिए अवैध रूप से लिंग परीक्षण करने वाले अल्ट्रासाउंड सेंटर्स पर छापामारी अभियान प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया जाता है।
विज्ञापन
इनमें कई अल्ट्रासाउंड सेंटर्स सील भी किए जाते हैं। मगर कुछ दिनों बाद ये दोबारा शुरू हो जाते हैं। ठोस सबूत के अभाव में अभी तक गाजियाबाद में एक भी अल्ट्रसाउंड सेंटर्स पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। हेल्थ डिपार्टमेंट अपनी तरफ से आज तक एक भी अल्ट्रासाउंड सेंटर का स्टिंग नहीं कर पाया है। पिछले तीन साल में इस बजट का इस्तेमाल ही नहीं किया गया है।
लिंग परीक्षण की सूचना मिलने पर ऐसे पेशेंट का इस्तेमाल किया जाता है। अभी तक ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है। इसलिए इस बजट का इस्तेमाल नहीं हुआ है।
सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल
गाजियाबाद में 271 अल्ट्रासाउंड सेंटर
गाजियाबाद में कुल 271 अल्ट्रासाउंड सेंटर रजिस्टर्ड हैं। इसके अलावा खोड़ा, लोनी, डासना, मसूरी, मोदीनगर और मुरादनगर आदि स्थानों पर अवैध रूप से कई केंद्र चल रहे हैं जो चोरी छुपे लिंग परीक्षण भी करते हैं।
साल में एक बार ही हुई छापामारी
इस साल अभी तक एक बार ही छापामारी हुई है। अभी तक 48 अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापामारी की गई थी, जिसमें से तीन केंद्रों को सील किया गया था।