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अब कोर्ट के आदेश के बाद मां को मिलेगा मासूम
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Fri, 08 Jul 2016 12:36 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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एक साल के मासूम को अपने ही मां-बाप से मिलने के लिए एक दिन और इंतजार करना पड़ेगा। पुराने बस अड्डे के पास एक ढाबे पर लावारिस मिले इस मासूम के परिजन तो मिल गए हैं, मगर बच्चे की देखरेख कर रही संस्था का कहना है कि कोर्ट के द्वारा ही मां बाप को बच्चा दिया जाता है।
बता दें कि बुधवार दोपहर पुराने बस अड्डे पर योगेंद्र त्यागी नाम के एक युवक को एक साल का मासूम मिला था। योगेंद्र ने उसे सिहानी गेट पुलिस के हवाले कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने मासूम को बच्चों की हेल्प करने वाली संस्था चाइल्ड लाइन को सौंप दिया।
चाइल्ड लाइन संस्था ने बुधवार शाम मासूम को खोड़ा कालोनी में चलने वाली संस्था माला स्मृति होम को सौंप दिया। बच्चा फिलहाल खोड़ा की संस्था के पास है। माला स्मृति होम के सदस्य देवव्रत विश्वास ने बताया कि बुधवार रात में कालकागढ़ी से दो व्यक्ति आए थे, जो अपने आप को मासूम के माता-पिता होने का दावा कर रहे थे।
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खुद को बच्चे की मां बताने वाली महिला का कहना था कि वह अपने बच्चे को एक ढाबे की टेबल पर बैठा कर थोड़ा आगे की ओर चली गई। उसने वापस आकर देखा तो बच्चा ढाबे पर नहीं था। देवव्रत के अनुसार उन्हें बता दिया गया है कि वह अपना दावा सीडब्ल्यूसी के समक्ष करें। उन्हीं के आदेश पर संस्था मासूम को उन्हें सौंप सकती है।
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बता दें कि बुधवार दोपहर पुराने बस अड्डे पर योगेंद्र त्यागी नाम के एक युवक को एक साल का मासूम मिला था। योगेंद्र ने उसे सिहानी गेट पुलिस के हवाले कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने मासूम को बच्चों की हेल्प करने वाली संस्था चाइल्ड लाइन को सौंप दिया।
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चाइल्ड लाइन संस्था ने बुधवार शाम मासूम को खोड़ा कालोनी में चलने वाली संस्था माला स्मृति होम को सौंप दिया। बच्चा फिलहाल खोड़ा की संस्था के पास है। माला स्मृति होम के सदस्य देवव्रत विश्वास ने बताया कि बुधवार रात में कालकागढ़ी से दो व्यक्ति आए थे, जो अपने आप को मासूम के माता-पिता होने का दावा कर रहे थे।
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खुद को बच्चे की मां बताने वाली महिला का कहना था कि वह अपने बच्चे को एक ढाबे की टेबल पर बैठा कर थोड़ा आगे की ओर चली गई। उसने वापस आकर देखा तो बच्चा ढाबे पर नहीं था। देवव्रत के अनुसार उन्हें बता दिया गया है कि वह अपना दावा सीडब्ल्यूसी के समक्ष करें। उन्हीं के आदेश पर संस्था मासूम को उन्हें सौंप सकती है।