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अब हर फ्लोर के हिसाब से छोड़नी होगी सौ मीटर जमीन
ब्यूरो,अमर उजाला गाजियाबाद
Updated Fri, 08 Jul 2016 12:24 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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इस महीने होने जा रही जीडीए बोर्ड बैठक में मुख्य मुद्दा होगा-नया बिल्डिंग बायलॉज। बिल्डरों के विरोध के बावजूद इसका लागू होना तय है। इसके लागू होते ही गाजियाबाद को भविष्य में सघन व संकीर्ण कालोनियों से मुक्ति मिल जाएगी साथ ही बिल्डरों की मनमानी पर भी लगाम लगेगी।
अब तक बिल्डर 112 वर्गमीटर जमीन पर कई-कई मंजिल खड़ी करते आए हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नए बायलॉज के अनुसार हर एक मंजिल बनाने के लिए सौ वर्गमीटर जमीन की दरकार होगी।
जैसे कि तीन सौ वर्गमीटर जमीन पर चार मंजिल बना सकते हैं लेकिन पांचवीं मंजिल बनानी है तो 400 वर्गमीटर जमीन होनी चाहिए। छठी मंजिल बनानी है तो 500 वर्गमीटर। इसी तरह हर मंजिल पर सौ वर्गमीटर जमीन बढ़ती चली जाएगी। इससे इलाका खुला-खुला होगा और पार्किंग की परेशानी नहीं होगी।
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नए बिल्डिंग बायलॉज में दो हजार वर्गमीटर भूखंड तक बहुमंजिला भवन बनाने का प्रावधान है लेकिन माना जा रहा है कि बिल्डरों के लिए हर मंजिल के लिए सौ वर्गमीटर जमीन उपलब्ध कराना मुमकिन नहीं होगा।
ऐसे में तीन-चार मंजिल तक के भवन ही ज्यादा बन पाएंगे। बिल्डिंग की ऊंचाई कम होगी और यह पर्यावरण के लिहाज से यह बेहतर होगा। 2014 में सिर्फ गाजियाबाद के लिए बने बायलॉज में 112 वर्गमीटर से दो हजार वर्गमीटर तक जमीन पर बहुमंजिला भवन बनाने की इजाजत दी गई थी।
हालांकि इस बायलॉज में चार मंजिल भवन तक के लिए खुले में 23 वर्गमीटर और कवर्ड में 28 वर्गमीटर जमीन पार्किंग के लिए छोड़ने की व्यवस्था है। होता यह रहा है कि बिल्डर कंपाउंडिंग फीस देकर चार मंजिल से अधिक मंजिल बना लेते थे और नीचे पार्किंग के लिए जमीन नहीं छोड़ी जाती थी।
उस पर से स्टिल्ट फ्लोर और बेसमेंट में दुकानें खोल दी जाती थीं। इन्हीं वजहों से इंदिरापुरम, वैशाली, कौशांबी आदि इलाकों में सघन व संकीर्ण कालोनियां दिखतीं हैं। इन इलाकों में 12 फीट चौड़ी सड़क का इस्तेमाल लोग पार्किंग के लिए भी करते हैं, जहां से गुजरना भी मुश्किल होता है।
दो साल में बने दो हजार भवन
जीडीए सूत्रों ने बताया कि 2014 के बायलॉज के बाद बिल्डरों ने शहर के नौ इलाकों में करीब दो हजार भवनों का निर्माण किया। इन दिनों करीब दो सौ भवनों का निर्माण चल रहा है। सूत्रों के अनुसार शहर में करीब सौ से अधिक ऐसे बिल्डर हैं, जो इस तरह की बिल्डिंग बनाते हैं। नए बायलॉज से इन्हीं बिल्डरों को परेशानी है।
नया बायलॉज अंगीकार करेगा जीडीए: जीडीए वीसी विजय यादव ने बताया कि इस महीने होने वाली बोर्ड बैठक में नए बायलॉज को जीडीए अंगीकार कर लेगा। उन्होंने कहा कि आए दिन बिल्डरों का संगठन उनसे नए बायलॉज को लागू नहीं करने का अनुरोध कर रहा है लेकिन उनकी यह मांग नहीं मानी जाएगी। नए बायलॉज के लागू होने के बाद भविष्य में बनने वाली कालोनियों में पानी, सीवर, जाम आदि की समस्याएं नहीं होंगी।
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अब तक बिल्डर 112 वर्गमीटर जमीन पर कई-कई मंजिल खड़ी करते आए हैं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नए बायलॉज के अनुसार हर एक मंजिल बनाने के लिए सौ वर्गमीटर जमीन की दरकार होगी।
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जैसे कि तीन सौ वर्गमीटर जमीन पर चार मंजिल बना सकते हैं लेकिन पांचवीं मंजिल बनानी है तो 400 वर्गमीटर जमीन होनी चाहिए। छठी मंजिल बनानी है तो 500 वर्गमीटर। इसी तरह हर मंजिल पर सौ वर्गमीटर जमीन बढ़ती चली जाएगी। इससे इलाका खुला-खुला होगा और पार्किंग की परेशानी नहीं होगी।
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नए बिल्डिंग बायलॉज में दो हजार वर्गमीटर भूखंड तक बहुमंजिला भवन बनाने का प्रावधान है लेकिन माना जा रहा है कि बिल्डरों के लिए हर मंजिल के लिए सौ वर्गमीटर जमीन उपलब्ध कराना मुमकिन नहीं होगा।
ऐसे में तीन-चार मंजिल तक के भवन ही ज्यादा बन पाएंगे। बिल्डिंग की ऊंचाई कम होगी और यह पर्यावरण के लिहाज से यह बेहतर होगा। 2014 में सिर्फ गाजियाबाद के लिए बने बायलॉज में 112 वर्गमीटर से दो हजार वर्गमीटर तक जमीन पर बहुमंजिला भवन बनाने की इजाजत दी गई थी।
हालांकि इस बायलॉज में चार मंजिल भवन तक के लिए खुले में 23 वर्गमीटर और कवर्ड में 28 वर्गमीटर जमीन पार्किंग के लिए छोड़ने की व्यवस्था है। होता यह रहा है कि बिल्डर कंपाउंडिंग फीस देकर चार मंजिल से अधिक मंजिल बना लेते थे और नीचे पार्किंग के लिए जमीन नहीं छोड़ी जाती थी।
उस पर से स्टिल्ट फ्लोर और बेसमेंट में दुकानें खोल दी जाती थीं। इन्हीं वजहों से इंदिरापुरम, वैशाली, कौशांबी आदि इलाकों में सघन व संकीर्ण कालोनियां दिखतीं हैं। इन इलाकों में 12 फीट चौड़ी सड़क का इस्तेमाल लोग पार्किंग के लिए भी करते हैं, जहां से गुजरना भी मुश्किल होता है।
दो साल में बने दो हजार भवन
जीडीए सूत्रों ने बताया कि 2014 के बायलॉज के बाद बिल्डरों ने शहर के नौ इलाकों में करीब दो हजार भवनों का निर्माण किया। इन दिनों करीब दो सौ भवनों का निर्माण चल रहा है। सूत्रों के अनुसार शहर में करीब सौ से अधिक ऐसे बिल्डर हैं, जो इस तरह की बिल्डिंग बनाते हैं। नए बायलॉज से इन्हीं बिल्डरों को परेशानी है।
नया बायलॉज अंगीकार करेगा जीडीए: जीडीए वीसी विजय यादव ने बताया कि इस महीने होने वाली बोर्ड बैठक में नए बायलॉज को जीडीए अंगीकार कर लेगा। उन्होंने कहा कि आए दिन बिल्डरों का संगठन उनसे नए बायलॉज को लागू नहीं करने का अनुरोध कर रहा है लेकिन उनकी यह मांग नहीं मानी जाएगी। नए बायलॉज के लागू होने के बाद भविष्य में बनने वाली कालोनियों में पानी, सीवर, जाम आदि की समस्याएं नहीं होंगी।