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Ghaziabad News: सुरक्षा का इंतजाम गायब, खतरे में सफर
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गाजियाबाद। शहर की सड़कों पर रोजाना हजारों यात्रियों को ढोने वाले कई व्यावसायिक वाहनों से सुरक्षा के इंतजाम नदारद हैं। बड़ी संख्या में ऑटो, ई-रिक्शा, बस और कॉमर्शियल कारें खतरे के बीच यात्रियों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। सोमवार को अमर उजाला की पड़ताल में कई वाहनों में न अग्निशामक यंत्र मिला और न प्राथमिक उपचार पेटी। कुछ वाहनों में सुरक्षा से जुड़े दूसरे जरूरी मानक भी पूरे नहीं मिले।
यह स्थिति तब है, जब मोटर वाहन अधिनियम के तहत हर व्यावसायिक वाहन में कार्यशील अग्निशामक यंत्र और प्राथमिक उपचार पेटी होना अनिवार्य है। वाहनों के फिटनेस टेस्ट के दौरान इनका होना आवश्यक है। ऐसे में सवाल सिर्फ नियमों के उल्लंघन नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी है, जो वाहन को फिटनेस प्रमाणपत्र देकर सड़क पर चलने की अनुमति देती है। फिटनेस जांच में अगर सुरक्षा उपकरण जरूरी हैं तो ये उपकरण सड़क पर क्यों नहीं दिखाई देते?
परिवहन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जिले में एक लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं। इनमें ऑटो की संख्या सबसे अधिक 83,472 है। इसके अलावा करीब 20 हजार कैब, बस और ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। गंभीर यह कि इन वाहनों में सवारियों की सुरक्षा के इंतजाम हैं या नहीं, यह पता लगाने के लिए करीब छह माह से कोई अभियान नहीं चला है।
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सीन 1 - बस अड्डा के पास पांच सवारियां, सुरक्षा उपकरण गायब
गाजियाबाद बस स्टैंड के पास एक ऑटो में पांच सवारियां बैठी थीं। ऑटो में आग बुझाने का उपकरण मौजूद नहीं था। सवारियों को लेकर चल रहे इस वाहन में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े हुए।
सीन 2 - लोहियानगर में न रेडियम पट्टी, न प्राथमिक उपचार पेटी
लोहियानगर में एक ऑटो में सुरक्षा के कई जरूरी इंतजाम नहीं मिले। वाहन में न रेडियम की पट्टी थी और न प्राथमिक उपचार पेटी। ऐसे में दुर्घटना या किसी अन्य आपात स्थिति में यात्रियों को तत्काल प्राथमिक उपचार नहीं दिया जा सकता।
सीन 3 - आंबेडकर रोड पर खाली ऑटो भी असुरक्षित
आंबेडकर रोड पर खड़े एक खाली ऑटो में भी अग्निशामक यंत्र और प्राथमिक उपचार पेटी नहीं मिली। यानी यात्री मौजूद हों या वाहन खाली हो, सुरक्षा के जरूरी उपकरणों की स्थिति में कोई अंतर नजर नहीं आया।
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आग लगी तो कैसे बचेगी सवारी
वाहनों में वायरिंग की खराबी, शॉर्ट सर्किट या अन्य तकनीकी कारणों से आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। वाहन में अग्निशामक यंत्र न होने पर चालक के पास आग पर तत्काल काबू पाने का साधन नहीं रहेगा। ऐसे में यात्रियों को वाहन से बाहर निकालना ही एकमात्र विकल्प बच सकता है। भीड़भाड़ वाली सड़क पर यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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यात्रियों की जुबानी : भगवान भरोसे सफर
पुराने बस अड्डा से मेट्रो स्टेशन जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रहे आलोक रंजन ने बताया कि ऑटो और बसों में सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाता। कई बार वाहनों में वायरिंग खुली रहती है और धुआं उठने की घटनाएं भी सामने आती हैं। ऐसे में अगर आग लग जाए और वाहन में आग बुझाने का साधन न हो तो यात्रियों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है।
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अब विभाग कह रहा विशेष चेकिंग की बात
आरटीओ प्रवर्तन डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि व्यावसायिक वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। ऑटो, बस या कैब में अगर अग्निशामक यंत्र और प्राथमिक उपचार किट नहीं मिल रहे हैं तो यह गंभीर लापरवाही है। जल्द विशेष चेकिंग अभियान चलाकर ऐसे वाहनों के चालान किए जाएंगे। बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों की फिटनेस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
यह स्थिति तब है, जब मोटर वाहन अधिनियम के तहत हर व्यावसायिक वाहन में कार्यशील अग्निशामक यंत्र और प्राथमिक उपचार पेटी होना अनिवार्य है। वाहनों के फिटनेस टेस्ट के दौरान इनका होना आवश्यक है। ऐसे में सवाल सिर्फ नियमों के उल्लंघन नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी है, जो वाहन को फिटनेस प्रमाणपत्र देकर सड़क पर चलने की अनुमति देती है। फिटनेस जांच में अगर सुरक्षा उपकरण जरूरी हैं तो ये उपकरण सड़क पर क्यों नहीं दिखाई देते?
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परिवहन विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जिले में एक लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन पंजीकृत हैं। इनमें ऑटो की संख्या सबसे अधिक 83,472 है। इसके अलावा करीब 20 हजार कैब, बस और ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। गंभीर यह कि इन वाहनों में सवारियों की सुरक्षा के इंतजाम हैं या नहीं, यह पता लगाने के लिए करीब छह माह से कोई अभियान नहीं चला है।
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सीन 1 - बस अड्डा के पास पांच सवारियां, सुरक्षा उपकरण गायब
गाजियाबाद बस स्टैंड के पास एक ऑटो में पांच सवारियां बैठी थीं। ऑटो में आग बुझाने का उपकरण मौजूद नहीं था। सवारियों को लेकर चल रहे इस वाहन में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर भी सवाल खड़े हुए।
सीन 2 - लोहियानगर में न रेडियम पट्टी, न प्राथमिक उपचार पेटी
लोहियानगर में एक ऑटो में सुरक्षा के कई जरूरी इंतजाम नहीं मिले। वाहन में न रेडियम की पट्टी थी और न प्राथमिक उपचार पेटी। ऐसे में दुर्घटना या किसी अन्य आपात स्थिति में यात्रियों को तत्काल प्राथमिक उपचार नहीं दिया जा सकता।
सीन 3 - आंबेडकर रोड पर खाली ऑटो भी असुरक्षित
आंबेडकर रोड पर खड़े एक खाली ऑटो में भी अग्निशामक यंत्र और प्राथमिक उपचार पेटी नहीं मिली। यानी यात्री मौजूद हों या वाहन खाली हो, सुरक्षा के जरूरी उपकरणों की स्थिति में कोई अंतर नजर नहीं आया।
आग लगी तो कैसे बचेगी सवारी
वाहनों में वायरिंग की खराबी, शॉर्ट सर्किट या अन्य तकनीकी कारणों से आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। वाहन में अग्निशामक यंत्र न होने पर चालक के पास आग पर तत्काल काबू पाने का साधन नहीं रहेगा। ऐसे में यात्रियों को वाहन से बाहर निकालना ही एकमात्र विकल्प बच सकता है। भीड़भाड़ वाली सड़क पर यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
यात्रियों की जुबानी : भगवान भरोसे सफर
पुराने बस अड्डा से मेट्रो स्टेशन जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रहे आलोक रंजन ने बताया कि ऑटो और बसों में सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया जाता। कई बार वाहनों में वायरिंग खुली रहती है और धुआं उठने की घटनाएं भी सामने आती हैं। ऐसे में अगर आग लग जाए और वाहन में आग बुझाने का साधन न हो तो यात्रियों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है।
अब विभाग कह रहा विशेष चेकिंग की बात
आरटीओ प्रवर्तन डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि व्यावसायिक वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है। ऑटो, बस या कैब में अगर अग्निशामक यंत्र और प्राथमिक उपचार किट नहीं मिल रहे हैं तो यह गंभीर लापरवाही है। जल्द विशेष चेकिंग अभियान चलाकर ऐसे वाहनों के चालान किए जाएंगे। बार-बार नियम तोड़ने वाले वाहनों की फिटनेस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।