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एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर के मालिक की जमानत अर्जी खारिज

Sat, 03 Dec 2016 12:22 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद Updated Sat, 03 Dec 2016 12:22 AM IST
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nkg infrastructure owner rejected a bail petition
court shimla
 नोएडा के चर्चित टेंडर घोटाले के आरोप में डासना जेल में बंद एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड फर्म के मालिक प्रदीप गर्ग की जमानत अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी। आरोप की जमानत अर्जी पर दो दिन चली बहस के बाद बृहस्पतिवार को विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया।
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जमानत अर्जी पर बहस करते हुए डिफेंस की ओर से अधिवक्ता एवं बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रामअवतार गुप्ता ने कोर्ट को बताया था कि उनके मुवक्किल ने अंडरग्राउंड केबल डाले जाने के इस ठेके में किसी प्रकार की हेराफेरी नहीं की है।
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समय से इसका कार्य किया गया। इसके विरोध में सीबीआई की ओर से वरिष्ठ लोक अभियोजक बीके सिंह और अनुराग मोदी ने कोर्ट में जिरह की। उन्होंने कहा कि ठेके दिए जाने में ही धड़ल्ले से नियमों को उल्लंघन किया गया।
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सिर्फ एक ही दिन में ठेके की तमाम प्रक्रिया पूरी कर ली गईं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस वे के चीफ इंजीनियर रहे यादव सिंह की महरबानी से इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया। करीब 8.15 करोड़ के इस ठेके में सरकार को 4.52 करोड़ का नुकसान हुआ।

अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ठेकेदार धनाढ़य है और प्रभावशाली है। जमानत दिए जाने की स्थिति में वह साक्ष्यों को मिटा और प्रभावित कर सकता है।

लोन के नाम पर खेला गया रिश्वत का ‘खेल’
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेस-वे अथॉरिटी के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह ने ठेका दिए जाने की एवज में रिश्वत का ऐसा ‘खेल’ खेला था कि कोई आसानी से उसे पकड़ ही नहीं सकता था। जांच एजेंसी सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में काली कमाई से कुबेर बने यादव सिंह के इस खेल का खुलासा किया है।

सीबीआई ने कोर्ट में दाखिल अपनी चार्जशीट में इस रिश्वत केइस खेल का खुलासा किया गया है। चार्जशीट में बताया गया है कि नोएडा में अंडरग्राउंड केबल डालने के लिए तीन फर्मों एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर, तिरुपति कंस्ट्रक्शन और जेएसपी नामक फर्मों को ठेके दिए गए थे।

एनकेजी फर्म को करीब 8.15 करोड़ का ठेका दिया था। इसकी एवज में यादव सिंह ने एनकेजी से 50 लाख रुपये की रिश्वत अपनी पत्नी कुसुमलता की एक गारमेंट फर्म के एकाउंट में मंगाई थी।

एनकेजी फर्म केमालिक ने अपनी ही एक फाइनेंस कंपनी गणनायक के एकाउंट से रिश्वत की यह रकम कुसुम गारमेंट कंपनी के एकाउंट में ट्रांसफर की थी। यादव सिंह के सीए मोहन राठी ने इस रकम को लोन रूप में दर्शाया है।

सीबीआई ने अपनी जांच में पाया है कि तीन कंपनियों को जो ठेके दिए गए थे, उनका काम पहले ही शुरू हो चुका था। सिर्फ औपचारिकता भर पूरी करने को ठेका छोड़े जाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया था।

एनआरएचएम घोटाला:
लखनऊ के दवा कारोबारी रईस आलम सिद्दीकी की संपत्ति होगी कुर्क

 एनआरएचएम घोटाले के एक मामले में लखनऊ के दवा कारोबारी पर सीबीआई कोर्ट ने शिकंजा कस दिया है। चार्जशीट पेश किए जाने के बावजूद कोर्ट में पेशी पर नहीं पहुंच रहे रईस आलम सिद्दीकी की कोर्ट ने संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

लखनऊ में दवा का बडे़ स्तर पर कारोबार करने वाले रईस आलम सिद्दीकी उर्फ गुड्डू खान एनआरएचएम घोटाले की कई एफआईआर में आरोपी है। इनमें से कई मामलों में सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट भी पेश कर चुकी है।

आरोपी दवा कारोबारी के खिलाफ पूर्व में कोर्ट गैर जमानती वारंट और 82 के तहत भी कार्यवाही कर चुकी है। शुक्रवार को आरोपी दवा कारोबारी को कोर्ट में पेश होना था, मगर वह नहीं आया।


इस पर विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने उसके खिलाफ 83 की कार्यवाही करते हुए कुर्की के आदेश जारी कर दिए। न्यायाधीश ने सीबीआई को आदेश दिया है कि वह 6 जनवरी तक कुर्की की कार्यवाही कर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करे।
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