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नगर निगम परिसर के पानी का सैंपल फिर फेल

Mon, 25 Apr 2016 12:43 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Mon, 25 Apr 2016 12:43 AM IST
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Municipal complex water samples failed again
water - फोटो : अमर उजाला

 शहर को साफ पानी पिलाने की जिम्मेदारी जिस निगम की है, उसका अपना पानी ही पीने लायक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग और नगर-निगम के संयुक्त अभियान में हर बार नगर-निगम के पानी का सैंपल फेल हो है।

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अप्रैल में सात जगहों से लिए गए पानी के सैंपल में से नगर-निगम परिसर का पानी फिर फेल हुआ। वहां के पानी में 851 टीडीएस की मात्रा पाई गई। इसके अलावा नगर-निगम के जोनल कार्यालय संजय गीता पार्क के पानी के टीडीएस की मात्रा भी 722 है। इससे पहले तीन बार नगर-निगम के पानी का सैंपल फेल पाया गया है।
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यहां से लिए सैंपल                                टीडीएस की मात्रा
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शंभू दयाल डिग्री कॉलेज                            -  795
शंभू दयाल इंटर कालेज                             -  777
नगर-निगम संजय गीता पार्क जोनल कार्यालय - 722
जगदीश नगर ऊषा पार्क                              - 735
डॉ. दीपक अग्रवाल यमुनोत्री कांप्लेक्स अंबेडकर रोड -  550
- राका पार्क अंबेडकर रोड नलकूप के पास             - 651
साल भर में 876 पानी के नमूने मिले फेल

स्वास्थ्य विभाग ने साल भर में कुल 3672 सैंपल लिए थे, जिसमें से 876 नमूने फेल हैं। इनमें से अधिकतर नमूनों में क्लोरिनेशन निल और टीडीएस की मात्रा अधिक है। इसमें स्कूल, बड़े होटल्स, रेस्टोरेंट, ढाबा, अस्पताल सहित कई बड़े संस्थान शामिल हैं।

अधिकतर विजयनगर, कैला भट्टा, मालीवाड़ा, सेवानगर, दौलतपुरा, नंदग्राम और साहिबाबाद से अर्थला, संजय कालोनी, पसौंडा, गगन विहार आदि जगहों के पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं। मार्च माह में 14 जगहों के पानी के सैंपल फेल पाए गए थे, जिसमें से चार स्कूल सहित जल निगम परिसर के पानी का सैंपल भी फेल पाया गया था।

इन स्कूलों में मानकों से ज्यादा कहीं  963, 710, 655, तो कहीं 515 तक टीडीएस पाया गया था। जबकि मानक के अनुसार 200-250 तक ही टीडीएस की मात्रा होनी चाहिए।


सीएमओ डॉ.अजेय अग्रवाल ने बताया कि इन सभी संस्थानों को पानी के स्तर में सुधार करने का सुझाव दिया गया और इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
 
आरके यादव जलकल अभियंता ने बताया कि ग्राउंड वाटर के टीडीएस की मात्रा को कंट्रोल करने के लिए आरओ सिस्टम लगाए हुए हैं। इसके अलावा लगातार क्लोरिनेशन कराया जाता है।

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