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Ghaziabad News: मोहन नगर से वैशाली का मेट्रो प्रोजेक्ट हो सकता है निरस्त

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 17 May 2023 12:55 AM IST
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Mohan Nagar to Vaishali metro project may be canceled
गाजियाबाद। रैपिड ट्रेन शुरू होने के बाद वैशाली से मोहननगर तक मेट्रो को जोड़ने वाला प्रोजेक्ट निरस्त हो सकता है। जीडीए अधिकारियों का कहना है कि एक तरफ रैपिड सेवा शुरू होने के बाद वैशाली से मोहननगर के बीच मेट्रो प्रोजेक्ट की कोई उपयोगिता नहीं रहेगी, दूसरी तरफ प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाला लगभग 1808.22 करोड़ रुपये के फंड की बचत होगी। हालांकि पांच साल पहले तैयार इस बजट पर अब पांच फीसदी लागत बढ़ चुकी है।
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मंगलवार को जीडीए उपाध्यक्ष राकेश कुमार सिंह ने बताया कि नोएडा सेक्टर-62 से आ रही मेट्रो को इंदिरापुरम, वसुंधरा, कनावनी होते हुए साहिबाबाद के रैपिड एक्स स्टेशन से जोड़ने पर लोगों को अधिक सुविधा मिलेगी। इस रूट पर यात्रियों की संख्या भी अधिक होने का अनुमान है। जो भी यात्री इंदिरापुरम या नोएडा सेक्टर 62 से सराय काले खां जाना चाहेगा, उसके लिए रैपिड एक्स अधिक कारगर होगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए डीएमआरसी से विस्तृत सर्वे कराया जाएगा। ऐसा करने से लागत कम आएगी। अभी वैशाली से मोहन नगर तक मेट्रो प्रोजेक्ट की प्रस्तावित लागत 1808.22 करोड़ और नोएडा सेक्टर-62 से वसुंधरा कट तक प्रस्तावित लागत 1517 करोड़ रुपये हैं। अब यदि जीडीए सिर्फ नोएडा सेक्टर-62 मेट्रो को ही रैपिड एक्स के साहिबाबाद स्टेशन से जोड़ने के प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ता है तो लागत करीब 1800 करोड़ के आसपास रह जाएगी।
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उपाध्यक्ष ने बताया कि सचिव बृजेश कुमार को दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन के अधिकारियों के साथ फिर से मंथन करने और नोएडा सेक्टर-62 से वसुंधरा कट तक प्रस्तावित मेट्रो को थोड़ा आगे बढ़ाकर साहिबाबाद के रैपिड एक्स स्टेशन से जोड़ने के लिए सर्वे कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि रैपिड एक्स के साहिबाबाद स्टेशन से वैशाली मेट्रो स्टेशन के बीच की दूरी करीब डेढ़ किलोमीटर है। ऐसे में वैशाली से मोहन नगर मेट्रो प्रोजेक्ट लोगों के लिए उतना उपयोगी नहीं होगा।
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शासन ने 27 फीसदी अंशदान पर नहीं दे रहा है सहमति
दोनों प्रोजेक्ट पर काम शुरू कराने के लिए जीडीए ने शासन से 50 फीसदी अंशदान की मांग को पत्र भेजा था। इसको लेकर अपर मुख्य सचिव आवास नितिन रमेश गोकर्ण की अध्यक्षता में जीडीए, नगर निगम और डीएमआरसी के साथ वर्चुअल बैठक हुई थी। शासन के अधिकारियों ने कहा था कि उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन जैसे यूपी के अन्य शहरों में फंडिंग पैटर्न पर काम कर रहा है। उसी तरह गाजियाबाद में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग पैटर्न बनाकर पेश किया जाए। अभी तक यूपी शासन ने सबसे ज्यादा आगरा मेट्रो के लिए 27 प्रतिशत अंशदान दिया है। जबकि जीडीए की माली हालत ऐसी नहीं है कि 27 फीसदी अंशदान मिलने पर काम शुरू कर सके।
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