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Ghaziabad News: दो साल बाद भी मीटर का नंबर रिकॉर्ड में नहीं किया दर्ज, अब बिल ज्यादा आने का डर
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गाजियाबाद। दो-दो साल का समय बीतने के बाद भी बिजली के मीटर का नंबर ऊर्जा निगम के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, छह माह से लगातार एक्सईएन, एसई के पास चक्कर लगाने के बाद भी मीटर का नंबर दर्ज करने की जरूरत नहीं समझी जा रही है। अब परेशान होकर पूर्व जिला पंचायत सदस्य दीपा त्यागी ने प्रबंध निदेशक से शिकायत करने की बात कही है।
दीपा त्यागी ने बताया कि उनका सीकरी खुर्द रोड पर मकान है। उसमें अधिकतर किरायेदार रहते हैं। दो साल पहले मकान खाली था, तभी उनके यहां मीटर बदलने के लिए ऊर्जा निगम के कर्मचारी आए। उन्होंने मीटर बदलकर सीलिंग की रसीद अंदर डाल दी। उनको यह रसीद एक महीने बाद मिली। इसके बाद मकान में किरायेदार आ गए। तब से 700-800 रुपये प्रतिमाह बिल आता रहा, जिसको किरायेदार ने समय पर जमा किया। जब किरायेदार चले गए तो उन्होंने खुद इसको जमा किया। एक दिन बिजली आपूर्ति बंद हुई तो उन्होंने शिकायत ऊर्जा निगम के कार्यालय में की। तब उनको पता चला कि रिकॉर्ड में मीटर का नंबर दर्ज ही नहीं किया गया है और उनको एवरेज बिल भेजा जा रहा था। अब उनको पूरी आशंका है कि ज्यादा बिल आएगा। अब देखने पर पता चला है कि रसीद पर कोई तारीख मीटर बदलने वालों ने नहीं डाली। इसी तरह लोनी के पाइपलाइन रोड फर्रूखनगर निवासी सलमान भी परेशान हैं। उन्होंने भी इसकी शिकायत दर्ज कराई है। मीटर उनके यहां एक साल पहले लगा था, लेकिन उनको इसका पता तब चला जब प्रीपेड सेवा होने पर उनकी बिजली काट दी गई।
-अधिकतम एक माह का नियम
ऊर्जा निगम के नियम के हिसाब से मीटर नंबर को रिकॉर्ड में 15-30 दिन में दर्ज कराना होता है, लेकिन जिस कार्यदायी संस्था को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने ऐसा नहीं किया। इस बारे में अधीक्षण अभियंता महेश उपाध्याय ने बताया कि मामला जानकारी में आया है। इसको दुरूस्त कराया जाएगा। जिम्मेदार से भी इस विषय में जवाब तलब किया जाएगा।
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बंद करा दिया कनेक्शन, लगातार आ रहा बिल :
कविनगर के स्काडा सेेंटर में रोजाना इस तरह की शिकायतें भी आ रही हैं कि लोगों ने छह माह पहले अपना कनेक्शन बंद करा दिया लेकिन मीटर आज तक नहीं उतारा गया है। लगातार उनको बिल भेजा जा रहा है। इस हिसाब से उनपर बकाया भी बढ़ता जा रहा है। लगातार चक्कर लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। विजयनगर की सुनीता माहुर ने बताया कि बार-बार अफसरों से मिलने का भी कोई समाधान नहीं हो रहा है।
दीपा त्यागी ने बताया कि उनका सीकरी खुर्द रोड पर मकान है। उसमें अधिकतर किरायेदार रहते हैं। दो साल पहले मकान खाली था, तभी उनके यहां मीटर बदलने के लिए ऊर्जा निगम के कर्मचारी आए। उन्होंने मीटर बदलकर सीलिंग की रसीद अंदर डाल दी। उनको यह रसीद एक महीने बाद मिली। इसके बाद मकान में किरायेदार आ गए। तब से 700-800 रुपये प्रतिमाह बिल आता रहा, जिसको किरायेदार ने समय पर जमा किया। जब किरायेदार चले गए तो उन्होंने खुद इसको जमा किया। एक दिन बिजली आपूर्ति बंद हुई तो उन्होंने शिकायत ऊर्जा निगम के कार्यालय में की। तब उनको पता चला कि रिकॉर्ड में मीटर का नंबर दर्ज ही नहीं किया गया है और उनको एवरेज बिल भेजा जा रहा था। अब उनको पूरी आशंका है कि ज्यादा बिल आएगा। अब देखने पर पता चला है कि रसीद पर कोई तारीख मीटर बदलने वालों ने नहीं डाली। इसी तरह लोनी के पाइपलाइन रोड फर्रूखनगर निवासी सलमान भी परेशान हैं। उन्होंने भी इसकी शिकायत दर्ज कराई है। मीटर उनके यहां एक साल पहले लगा था, लेकिन उनको इसका पता तब चला जब प्रीपेड सेवा होने पर उनकी बिजली काट दी गई।
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-अधिकतम एक माह का नियम
ऊर्जा निगम के नियम के हिसाब से मीटर नंबर को रिकॉर्ड में 15-30 दिन में दर्ज कराना होता है, लेकिन जिस कार्यदायी संस्था को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने ऐसा नहीं किया। इस बारे में अधीक्षण अभियंता महेश उपाध्याय ने बताया कि मामला जानकारी में आया है। इसको दुरूस्त कराया जाएगा। जिम्मेदार से भी इस विषय में जवाब तलब किया जाएगा।
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बंद करा दिया कनेक्शन, लगातार आ रहा बिल :
कविनगर के स्काडा सेेंटर में रोजाना इस तरह की शिकायतें भी आ रही हैं कि लोगों ने छह माह पहले अपना कनेक्शन बंद करा दिया लेकिन मीटर आज तक नहीं उतारा गया है। लगातार उनको बिल भेजा जा रहा है। इस हिसाब से उनपर बकाया भी बढ़ता जा रहा है। लगातार चक्कर लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। विजयनगर की सुनीता माहुर ने बताया कि बार-बार अफसरों से मिलने का भी कोई समाधान नहीं हो रहा है।