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Ghaziabad News: लेप्टोस्पायरोसिस जांच शुरू, मरीजों को मिलेगी समय पर रिपोर्ट
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गाजियाबाद। जिले के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। संयुक्त जिला अस्पताल की इंटीग्रेटेड लैब में अब लेप्टोस्पायरोसिस की जांच शुरू कर दी गई है। इससे पहले इस बीमारी की पुष्टि के लिए मरीजों के सैंपल मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजे जाते थे। इस कारण जांच रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते थे। अब जिले में ही जांच सुविधा उपलब्ध होने से रोग की जल्द पहचान और समय पर उपचार संभव हो सकेगा।
माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. सुरुचि सैनी के अनुसार लेप्टोस्पायरोसिस एक गंभीर संक्रामक रोग है, जिसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। यह बीमारी लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया से होती है और जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसे सामान्य तौर पर रैट फीवर भी कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक चूहे इस बीमारी के प्रमुख वाहक होते हैं। चूहों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने पर संक्रमण फैल सकता है।
डॉ. सुरुचि ने बताया कि यह बैक्टीरिया शरीर में कटी-फटी त्वचा, आंखों, नाक या मुंह के माध्यम से प्रवेश करता है। संक्रमित व्यक्ति में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, आंखों का लाल होना, उल्टी-दस्त और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को जलभराव और बाढ़ के दौरान गंदे पानी के संपर्क से बचने की सलाह दी है।
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जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के पिछले वर्ष जिले में लेप्टोस्पायरोसिस के दो मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। पिछले पांच वर्षों में कुल 11 मामले सामने आए हैं। विभाग का मानना है कि स्थानीय स्तर पर जांच सुविधा शुरू होने से रोगियों की पहचान और निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
अन्य जांच सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी
इंटीग्रेटेड लैब के नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि मरीजों को अधिक से अधिक जांच सुविधाएं जिले में ही उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में लेप्टोस्पायरोसिस जांच शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ब्लड ग्रुप सहित अन्य महत्वपूर्ण जांचों की सुविधाएं भी चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएंगी।
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माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. सुरुचि सैनी के अनुसार लेप्टोस्पायरोसिस एक गंभीर संक्रामक रोग है, जिसे समय रहते नियंत्रित न किया जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। यह बीमारी लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया से होती है और जानवरों से इंसानों में फैलती है। इसे सामान्य तौर पर रैट फीवर भी कहा जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक चूहे इस बीमारी के प्रमुख वाहक होते हैं। चूहों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने पर संक्रमण फैल सकता है।
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डॉ. सुरुचि ने बताया कि यह बैक्टीरिया शरीर में कटी-फटी त्वचा, आंखों, नाक या मुंह के माध्यम से प्रवेश करता है। संक्रमित व्यक्ति में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, आंखों का लाल होना, उल्टी-दस्त और त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को जलभराव और बाढ़ के दौरान गंदे पानी के संपर्क से बचने की सलाह दी है।
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जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के पिछले वर्ष जिले में लेप्टोस्पायरोसिस के दो मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। पिछले पांच वर्षों में कुल 11 मामले सामने आए हैं। विभाग का मानना है कि स्थानीय स्तर पर जांच सुविधा शुरू होने से रोगियों की पहचान और निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।
अन्य जांच सुविधाएं बढ़ाने की तैयारी
इंटीग्रेटेड लैब के नोडल अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि मरीजों को अधिक से अधिक जांच सुविधाएं जिले में ही उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में लेप्टोस्पायरोसिस जांच शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ब्लड ग्रुप सहित अन्य महत्वपूर्ण जांचों की सुविधाएं भी चरणबद्ध तरीके से शुरू की जाएंगी।
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