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Ghaziabad News: वकीलों ने 24 घंटे में वापस लिया हड़ताल स्थगित करने का फैसला

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 18 Nov 2024 01:23 AM IST
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Lawyers withdrew the decision to postpone the strike within 24 hours
गाजियाबाद। कचहरी में शनिवार को चार राज्यों के वकीलों की महापंचायत में आठ दिन के लिए हड़ताल को स्थगित करने का जो फैसला लिया था, उसे 24 घंटे के भीतर ही वापस ले लिया गया। गाजियाबाद बार एसोसिएशन ने रविवार को प्रस्ताव पास किया कि न्यायिक कार्य का बहिष्कार जैसे पहले चल रहा था, वैसे ही जारी रहेगा।
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यह भी निर्णय लिया गया कि जिला जज अनिल कुमार को हटाए जाने और लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए रोज किया जा रहा धरना-प्रदर्शन भी पहले की तरह किया जाएगा। गाजियाबाद बार एसोसिएशन के सचिव अमित नेहरा ने बताया कि आंदोलन जैसे चल रहा था, वैसे ही चलता रहेगा। वकीलों की दो मांगें हैं। जिला जज अनिल कुमार को हटाया जाए और लाठीचार्ज के दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए। इनके पूरा होने तक आंदोलन अपनी गति से चलता रहेगा।
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एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा ने शनिवार को लिया फैसला रविवार को वापस लिए जाने की वजह व्हाट्सएप पर मैसेज जारी करके बताई। इसमें उन्होंने कहा, महापंचायत में हड़ताल को स्थगित रखने का जो फैसला लिया गया, उससे गाजियाबाद कचहरी के वकील सहमत नहीं है।
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उनका कहना है कि कई वकीलों ने इस फैसले का विरोध किया है। उनकी भावनाओं को देखते हुए हड़ताल को जारी रखने का निर्णय लिया गया है। आंदोलन में शामिल पश्चिम यूपी के 22 जिलों की बार से जुड़े वकील भी पहले की तरह ही न्यायिक कार्य का बहिष्कार जारी रखेंगे।


महापंचायत का फैसता
सुनते ही भड़क गए वकील
यूपी, दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ के वकीलों की महापंचायत शनिवार को कचहरी में हुई थी। इसमें प्रस्ताव पास हुआ कि चार नवंबर से चली आ रही हड़ताल को आठ दिन यानी 24 नवंबर तक के लिए स्थगित किया जाता है। सिर्फ जिला जज अनिल कुमार की कोर्ट का बहिष्कार जारी रहेगा। अगर 24 नवंबर तक मांगे पूरी नहीं हुईं तो 29 को पूरे राज्य के वकील हाईकोर्ट में जुटेंगे और मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन देंगे। उप चुनाव के बहिष्कार का भी निर्णय लिया गया। महापंचायत में शामिल रहे वकीलों को जैसे ही मांग पूरी हुई बिना ही हड़ताल स्थगित कर दिए जाने के फैसले का पता चला, वैसे ही उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। इसी विरोध की वजह से बार ने फैसला वापस ले लिया।




कोर्ट पर बढ़ता रहा
मुकदमों का बोझ
वकीलों की हड़ताल से कोर्ट पर मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है। रोज नए केस आ रहे हैं जबकि पुराने निस्तारित नहीं हो पा रहे हैं। गाजियाबाद कचहरी में रोज 10 हजार केस सुनवाई के लिए लगते हैं। चार नवंबर से हड़ताल चल रही है। एक लाख से ज्यादा केस में सिर्फ तारीख लगी है। न गवाह पेश किए जा सके और न ही साक्ष्य। जेल में कैदियों की संख्या बढ़ती जा रही है क्योंकि पुराने बाहर नहीं आ रहे जबकि नए बढ़ते जा रहे हैं। तहसील बार ने बैनामों का काम शुरू कर दिया है। इसके बावजूद बैनामों की संख्या में कमी बनी हुई है। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।
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