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Ghaziabad News: तीस वर्ष पहले खरीदी जमीन अब तक नहीं मिला कब्जा और मुआवजा
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साहिबाबाद। तीस वर्ष पूर्व 88 रुपये के गज से खरीदी जमीन जो आज करोड़ों की हो गई, लेकिन खरीदार आज तक भी अपनी जमीन पर मालिकाना हक पाने को भटक रहे हैं। इन वर्षों में समिति की जमीन पर अवैध तौर पर कब्जा भी हो चुका है, जिनकी जमीन थी आवास विकास उन्हें उनका कब्जा नहीं दे पा रहा।
समिति सदस्य बुद्धि सिंह बरवाल ने बताया कि वर्ष 1992 में हिमाचल सहकारी आवास समिति का पंजीकरण आवास विकास परिषद में हुआ था। समिति ने डूंडाहेड़ा से लगी करीब 63 बीघा जमीन 88 रुपये के गज के हिसाब से खरीदी। आवास विकास परिषद को इस जमीन पर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के बाद समितियों को जमीन पर अधिग्रहण देना था लेकिन विभाग यहां कोई सुविधा नहीं दे सका। वहीं इन वर्षों में यह जमीन भू माफिया ने कब्जा ली। आरोप है कि समिति के ही कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी और विभागीय तत्कालीन अधिकारियों ने मिलकर जमीन भू माफिया के हाथों बेच दी, लेकिन लोगों को जमीन पर कब्जा नहीं दिया। भू-माफिया के कब्जे में जमीन आने के बाद लोग डर गए लेकिन प्रदेश में सरकार बदलने के बाद लोगों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की, इसके बाद मामले पर जांच बिठाई गई। बाद में मालूम हुआ कि यह जमीन नोएडा प्राधिकरण ने अधिग्रहित कर ली है लेकिन अब तक समिति सदस्यों को मुआवजा नहीं मिल सका है। वर्तमान में इस जमीन की कीमत 45 करोड़ में आंकी जा रही है। अब हाल ही में लोगों ने एक बार फिर से केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से इस मामले की शिकायत कर इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई है।
इनसेट
समिति में भी 415 लोग बचे 336
बुद्धिसिंह का कहना है कि जब समिति गठित हुई थी तब इसमें 415 सदस्य बनाए गए थे, लेकिन वर्तमान में 336 सदस्य ही हैं। समिति सदस्यों में अधिकतर लोग हिमाचल प्रदेश के ही हैं और स्थानीय महज 56 लोग हैं।
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इनसेट
क्या बोले अधिकारी
समिति की शिकायत पर जांच चल रही है, लेकिन समिति के सचिव व अध्यक्ष इसमें सहयोग नहीं करते जिसकी वजह से परेशानी हो रही है। भू-माफिया के कब्जे में जमीन आ गई थी बाद में इस जमीन को नोएडा प्राधिकरण ने अधिग्रहित किया, लेकिन अब यह जमीन न तो नोएडा प्राधिकरण के पास है और न ही समिति सदस्यों के पास है। समिति के सदस्य जमीन से संबंधित जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा पा रहे, जिसकी वजह से जांच में परेशानी आ रही है। लोग एकजुट होकर आएं और साक्ष्य दिखाएं इस पर अग्रिम कार्रवाई संभव है। अरिवर्धन गौड़, सहकारी समिति प्रभारी, आवास विकास परिषद वसुंधरा
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समिति सदस्य बुद्धि सिंह बरवाल ने बताया कि वर्ष 1992 में हिमाचल सहकारी आवास समिति का पंजीकरण आवास विकास परिषद में हुआ था। समिति ने डूंडाहेड़ा से लगी करीब 63 बीघा जमीन 88 रुपये के गज के हिसाब से खरीदी। आवास विकास परिषद को इस जमीन पर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के बाद समितियों को जमीन पर अधिग्रहण देना था लेकिन विभाग यहां कोई सुविधा नहीं दे सका। वहीं इन वर्षों में यह जमीन भू माफिया ने कब्जा ली। आरोप है कि समिति के ही कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी और विभागीय तत्कालीन अधिकारियों ने मिलकर जमीन भू माफिया के हाथों बेच दी, लेकिन लोगों को जमीन पर कब्जा नहीं दिया। भू-माफिया के कब्जे में जमीन आने के बाद लोग डर गए लेकिन प्रदेश में सरकार बदलने के बाद लोगों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की, इसके बाद मामले पर जांच बिठाई गई। बाद में मालूम हुआ कि यह जमीन नोएडा प्राधिकरण ने अधिग्रहित कर ली है लेकिन अब तक समिति सदस्यों को मुआवजा नहीं मिल सका है। वर्तमान में इस जमीन की कीमत 45 करोड़ में आंकी जा रही है। अब हाल ही में लोगों ने एक बार फिर से केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से इस मामले की शिकायत कर इंसाफ दिलाने की गुहार लगाई है।
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समिति में भी 415 लोग बचे 336
बुद्धिसिंह का कहना है कि जब समिति गठित हुई थी तब इसमें 415 सदस्य बनाए गए थे, लेकिन वर्तमान में 336 सदस्य ही हैं। समिति सदस्यों में अधिकतर लोग हिमाचल प्रदेश के ही हैं और स्थानीय महज 56 लोग हैं।
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क्या बोले अधिकारी
समिति की शिकायत पर जांच चल रही है, लेकिन समिति के सचिव व अध्यक्ष इसमें सहयोग नहीं करते जिसकी वजह से परेशानी हो रही है। भू-माफिया के कब्जे में जमीन आ गई थी बाद में इस जमीन को नोएडा प्राधिकरण ने अधिग्रहित किया, लेकिन अब यह जमीन न तो नोएडा प्राधिकरण के पास है और न ही समिति सदस्यों के पास है। समिति के सदस्य जमीन से संबंधित जरूरी दस्तावेज नहीं दिखा पा रहे, जिसकी वजह से जांच में परेशानी आ रही है। लोग एकजुट होकर आएं और साक्ष्य दिखाएं इस पर अग्रिम कार्रवाई संभव है। अरिवर्धन गौड़, सहकारी समिति प्रभारी, आवास विकास परिषद वसुंधरा