UP: दुष्कर्म के आरोप से बरी होने में लगे 10 साल, नौ साल तक चली गवाही; किशोरी बोली- पड़ोसियों ने धमकाया था
अदालत में बयान दर्ज कराते हुए किशोरी के पिता ने कहा कि किसी बात पर डांटने से उनकी 16 वर्षीय बेटी नाराज होकर घर से चली गई थी। दो दिन बाद खुद ही घर वापस आ गई थी।
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गाजियाबाद के सिकंदराबाद निवासी दानिश को किशोरी से दुष्कर्म के आरोप से बरी होने में दस साल लग गए। मुकदमे में नौ साल तक गवाही चली थी। अदालत में बयान दर्ज कराते हुए किशोरी के पिता ने कहा कि किसी बात पर डांटने से उनकी 16 वर्षीय बेटी नाराज होकर घर से चली गई थी। दो दिन बाद खुद ही घर वापस आ गई थी। पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश लाल बाबू यादव ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल नहीं हुआ, इसलिए आरोपी को बरी किया जाता है।
किशोरी ने अदालत में बयान दिया कि वह आरोपी को पहचानती ही नहीं है। घर से नाराज होकर बस में बैठकर कहीं चली गई थी। उसके साथ कोई घटना नहीं हुई थी। किशोरी ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान को पलटते हुए कहा कि पड़ोसियों ने धमकाया था कि इस तरह का बयान नहीं दिया तो उसके पापा को पुलिस जेल भेज देगी।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार, पांच अप्रैल 2015 को साहिबाबाद थाने में एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बताया था कि दो अप्रैल को उनकी बेटी ट्यूशन पढ़ने गई थी। इसी दौरान पास में ही किराए के मकान में रहने वाला दानिश उनकी बेटी को बहला फुसलाकर भगा ले गया। सुनवाई के दौरान पिता-पुत्री के बयान दर्ज हुए थे, जबकि पुलिस ने नौ साक्ष्य पेश किए थे।
पहले किशोर न्याय बोर्ड में चला था मुकदमा
किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म करने के आरोप में दानिश पर मुकदमा पहले किशोर न्यायालय बोर्ड में चलाया गया। वहां पर 26 मार्च 2016 को दानिश की उम्र 18 साल मानते हुए केस पॉक्सो एक्ट के तहत कोर्ट में भेज दिया था।