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Ghaziabad News: कच्चे तेल की किल्लत के कारण आधी क्षमता से चल रहे उद्योग
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गाजियाबाद। जनपद के औद्योगिक क्षेत्र में कच्चे तेल और उससे बनने वाले औद्योगिक ईंधन की किल्लत ने उद्योग जगत की रफ्तार धीमी कर दी है। कई फैक्टरियां अब दो शिफ्ट की बजाय एक में ही काम चला रही हैं, जबकि 50 फीसदी इकाइयां बंदी के कगार पर पहुंच गई हैं। उत्पादन लागत बढ़ने और कच्चा माल समय से नहीं मिलने से उद्योगाें के सामने ऑर्डर पूरे करने का संकट खड़ा हो गया है।
जनपद में करीब छह हजार औद्योगिक इकाइयों में विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल, फर्नेस ऑयल, एलडीओ और अन्य पेट्रोलियम आधारित उत्पादों का इस्तेमाल होता है। प्लास्टिक, पैकेजिंग, केमिकल, पेंट, रबर, इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल से जुड़ी इकाइयां सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उद्यमी परस गोयल का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह से आपूर्ति प्रभावित होने उत्पादन लागत 20 से 30 फीसदी तक बढ़ गई है।
18 घंटे की जगह आठ घंटे ही चल रही इकाइयां
गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष एके शर्मा ने बताया कि पहले फैक्टरियां 16 से 18 घंटे तक चलती थीं, अब केवल 8 घंटे ही चल पा रही हैं। कई छोटे उद्योगों ने अस्थायी रूप से उत्पादन रोक दिया है।
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कई क्षेत्रों में ओवरटाइम बंद
हजारों श्रमिकों पर भी संकट गहराने लगा है। उत्पादन आधा होने से फैक्टरी संचालकों को मजदूरी भुगतान में दिक्कत आ रही है। कई जगह ओवरटाइम बंद कर दिया गया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर उत्पादन ठप हो सकता है। इसका असर स्थानीय बाजार से लेकर निर्यात कारोबार तक दिखाई देगा।
उद्यमी नंदलाल शर्मा का कहना है कि लगातार लागत बढ़ने से बाजार में तैयार उत्पाद महंगे हो सकते हैं। यदि संकट लंबा चला तो छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए बैंक ऋण और बिजली बिल चुकाना भी मुश्किल हो सकता है।
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जनपद में करीब छह हजार औद्योगिक इकाइयों में विभिन्न प्रकार के कच्चे तेल, फर्नेस ऑयल, एलडीओ और अन्य पेट्रोलियम आधारित उत्पादों का इस्तेमाल होता है। प्लास्टिक, पैकेजिंग, केमिकल, पेंट, रबर, इंजीनियरिंग और टेक्सटाइल से जुड़ी इकाइयां सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। उद्यमी परस गोयल का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह से आपूर्ति प्रभावित होने उत्पादन लागत 20 से 30 फीसदी तक बढ़ गई है।
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18 घंटे की जगह आठ घंटे ही चल रही इकाइयां
गाजियाबाद इंडस्ट्रीज फेडरेशन के अध्यक्ष एके शर्मा ने बताया कि पहले फैक्टरियां 16 से 18 घंटे तक चलती थीं, अब केवल 8 घंटे ही चल पा रही हैं। कई छोटे उद्योगों ने अस्थायी रूप से उत्पादन रोक दिया है।
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कई क्षेत्रों में ओवरटाइम बंद
हजारों श्रमिकों पर भी संकट गहराने लगा है। उत्पादन आधा होने से फैक्टरी संचालकों को मजदूरी भुगतान में दिक्कत आ रही है। कई जगह ओवरटाइम बंद कर दिया गया है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर उत्पादन ठप हो सकता है। इसका असर स्थानीय बाजार से लेकर निर्यात कारोबार तक दिखाई देगा।
उद्यमी नंदलाल शर्मा का कहना है कि लगातार लागत बढ़ने से बाजार में तैयार उत्पाद महंगे हो सकते हैं। यदि संकट लंबा चला तो छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए बैंक ऋण और बिजली बिल चुकाना भी मुश्किल हो सकता है।