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निठारी के सातवें मामले में भी सुरेंद्र कोली को सजा-ए-मौत
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Fri, 16 Dec 2016 11:28 PM IST
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surendra koli
- फोटो : अमर उजाला
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गाजियाबाद। निठारी कांड में 11 साल की एक लड़की की हत्या के मामले में सीबीआई विशेष कोर्ट ने दो दिन पूर्व दोषी ठहराए सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई है। दोपहर करीब 1.15 बजे कोर्ट ने उसे सजा सुनाई।
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निठारी कांड का यह सातवां ऐसा फैसला आया है, जिसमें सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई गई है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने कोली पर 35 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने उसे अपहरण, रेप और हत्या की धाराओं में दोषी मानते हुए सजा सुनाई है।
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डासना जेल में बंद निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे कड़ी सुरक्षा में सीबीआई विशेष कोर्ट में पेश किया गया। फैसला जानने के लिए कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में लोगों का जमावड़ा लगा था।
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डिफेंस की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रविंद्र गाडिया और अभियोजन की ओर से सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने सजा पर बहस पूरी की। दोपहर करीब 1.15 बजे विशेष न्यायाधीश ने कोली को फांसी और 35 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुना दी।
इसके बाद कोली को वापस डासना जेल ले जाया गया। जेल जाते समय कोली ने मीडिया से बात करते हुए खुद को निर्दोष बताया। उसका कहना था कि सच सामने आना चाहिए, मगर निठारी कांड में कई बिंदुओं पर जांच ही नहीं की गई।
सीबीआई विशेष न्यायाधीश की टिप्पणी
अपने 84 पेज के फैसले में विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी ने सुरेंद्र कोली को समाज के लिए नासूर बताया है। उन्होंने कहा है कि ‘किसी भी राज्य का काम ऐसा समाज बनाना है, जिसे सभ्य एवं सुसंस्कृत कहा जा सके।
यह तभी संभव है जब दोष सिद्ध अभियुक्त जैसे दरिंदे जो सभ्य समाज के लिए नासूर व खतरा बन चुके हैं, को सजा-ए-मौत से दंडित किया जाए। दोषी ने जो कार्य किया है वह प्रवृति किसी जानवर में भी नहीं होती। ऐसे में दोषी की गर्दन में फांसी लगाकर उसे तब तक लटकाया जाए, जब तक कि उसकी मृत्यु न हो जाए।’