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Ghaziabad News: तेजाब पिलाकर गर्भवती पत्नी की हत्या के प्रयास में पति को 10 वर्ष कारावास

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 21 May 2023 12:45 AM IST
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Husband jailed for 10 years for trying to kill pregnant wife by giving her acid
गाजियाबाद। तेजाब पिलाकर गर्भवती पत्नी की हत्या के प्रयास में दोषी पति मोहम्मद आरिफ को अदालत ने दस वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के न्यायाधीश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार ने दोषी पति पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने अर्थदंड की पूरी धनराशि पीड़िता को देने का आदेश दिया।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुनील कौशिक ने बताया कि तेजाब से झुलसी महिला का दस महीने तक अस्पताल में इलाज चला, इसके बावजूद उसकी आवाज चली गई। मजिस्ट्रेट के सामने लिखकर बयान दर्ज कराया गया था। इलाज के दौरान सात महीने बाद विवाहिता ने बेटी को जन्म दिया, जिसकी 22 दिन बाद मौत हो गई थी।
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जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा ने बताया कि अठसैनी निवासी तालिब ने अपनी बहन नजराना की शादी 5 अप्रैल 2017 को मसूरी थाना क्षेत्र के डासना निवासी मोहम्मद आरिफ के साथ की थी। आरिफ मोबाइल की दुकान पर काम करता था। शादी में मिले दहेज से आरिफ और उसका परिवार खुश नहीं था। वह नजराना से दहेज के रूप में 1.5 लाख रुपये और मोटरसाइकिल की मांग करता था। इस कारण से आए दिन नजराना की पिटाई की जाती थी। आरिफ ने 26 फरवरी 2018 को पत्नी नजराना को जबरदस्ती तेजाब पिला दिया। इसकी सूचना नजराना के मायके वालों को पड़ोसियों ने दी। गंभीर स्थिति में नजराना को मायके वालों ने अस्पताल में भर्ती कराया। घटना के समय वह दो माह की गर्भवती थी। तेजाब से सांस व खाने की नली क्षतिग्रस्त होने से इलाज के दौरान डाक्टरों ने पेट काटकर सांस लेने के लिए बाहर से एक नली लगाई है।
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शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि इलाज के दौरान ही पीड़िता ने एक बच्ची को जन्म दिया, जिसका सर तेजाब से झुलसा हुआ था। महिला के इलाज में लगभग 30 लाख रुपये हुए, इसके बावजूद आवाज चली गई। आरिफ और उसके परिवार वालों ने रिपोर्ट लिखवाने पर नजराना के पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। पीड़िता के भाई तालिब ने मामले की रिपोर्ट मसूरी थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर आरिफ को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। मामले में आठ गवाह पेश किए गए। आरिफ को सजा दिलाने में उसकी पत्नी के लिखित बयान और मेडिकल रिपोर्ट अहम रहे।
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