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होली आज: संभल कर लगाए रंग-गुलाल
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
Updated Mon, 13 Mar 2017 12:20 AM IST
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होली
- फोटो : अमर उजाला
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रंगों का त्योहार होली सोमवार को है। सुबह होते ही होली की मस्ती शुरू हो जाएगी। रंगों की बौछार व अबीर-गुलाल के बादलों के बीच खूब धमाल होगा। रंग खेलते समय जरा-सी असावधानी जान सांसत में डाल सकती है।
चिकित्सकों की माने तो त्योहार पर रंग में भंग न पड़े, इसलिए केमिकल के रंगों से परहेज करें। इस तरह के रंग त्वचा व आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सेहत को ध्यान में रखते हुए मिलावटी मावा से बनी मिठाइयों से दूरी बनाए रखें।
‘अमर उजाला’ टीम ने विशेषज्ञ डॉक्टरों व ब्यूटीशियन से इस बाबत जानने की कोशिश की तो उन्होंने कुछ तरह के टिप्स दिए हैं। अंडों, गुब्बारों, मिट्टी और कीचड़ से नहीं खेलें। सिर्फ हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करें।
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डॉक्टरों और अस्पताल के फोन नंबर पास रखें। नशे से दूरी बनाए रखें। हार्ट और डायबिटिक रोगी संभलकर खाए पकवान। सीएमओ अजेय अग्रवाल कहते हैं कि केमिकल वाले रंगों से परहेज करें और सुरक्षित होली मनाएं ।
रंग खेलने से पहले ये करें तैयारी
- रंग खेलने से पहले नारियल का तेल या वैसलीन लगाएं
- बालों के बचाने के लिए टोपी पहले या सिर पर कपड़ा बांधें।
- शरीर के खुले भागों पर नारियल तेल और मॉश्चराइजर लगाएं।
- कपड़े ऐसे पहने, जिससे शरीर पूरी तरह ढक जाए।
ऐसे छुड़ाए रंगों को
- कच्चे दूध और ब्रेड को भिगोकर रंग साफ करें
- रंग लगते ही फौरन पानी से धोएं।
- सॉफ्ट साबुन का ही इस्तेमाल करे।
- त्वचा को रगड़े नहीं।
- रंग नहीं जाए दो से तीन बार नहाए।
सांस रोगी सूखे रंगों से बचे
नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. संजय तेवतिया का कहना है कि आंखों में रंग या गुलाल चला जाए तो फौरन साफ पानी से धोए, रगड़े नहीं। अस्थमा रोगी और सांस के रोगी सूखे रंगों से बचे। सांस द्वारा सूखा रंग जाने से बचे। बालों में रंग डाले जाने पर झाड़े नहीं। डॉक्टर को फौरन दिखाएं। एलर्जी पीड़ित रंगों से दूर रहें।
घर के बने पकवान ही खाएं
फिजीशियन डॉ. अंशुल वार्ष्णेय का कहना है कि बाजार की खाने की वस्तुओं से परहेज करें। मिलावटी खाद्य पदार्थों से म्युकस मेमबरेंस (मुंह, पेट, आंत आदि की झिल्ली) पर असर पड़ता है। छाले पड़ने के साथ ही घाव का रूप ले सकते हैं। बच्चों को कालरा और टाइफायड जैसी बीमारी मिलावटी खाने से हो सकती है। ऐसे में घर के बने पकवान ही खाएं।
केमिकल नहीं, आर्गेनिक रंगों से खेलें
ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. बीपी त्यागी बताते हैं कि लाल रंग में मरकरी सल्फेट, बैंगनी में क्रोमियम, हरे में ब्रोमाइड व कापर सल्फेट अैर काले में लेड ऑक्साइड होता है। इन केमिकल से एलर्जी हो सकती है। नेचुरल और आर्गेनिक रंगों से खेलें। कान और नाक में रंगों को जाने से बचाएं।
त्वचा पर तेल या पेट्रोलियम जेली का प्रयोग करें
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. भावुक मित्तल के मुताबिक रंगों में मिले भारी तत्व त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंगों से बचाने के लिए होली खेलने से पहले त्वचा पर तेल या पेट्रोलियम जेली का प्रयोग करें। परेशानी होने पर फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
अस्पतालों में रहेगी विशेष व्यवस्था
होली पर दोनों जिला अस्पतालों में खास सतर्कता रहेगी। अस्पताल में अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था की गई है। इमरजेंसी में ऑन कॉल डॉक्टर बुलाए जाएंगे, जिसमें सर्जन आदि शामिल रहेंगे।
अस्पताल में दस अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है। संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि दवाओं का संपूर्ण स्टॉक रखने के साथ ही नर्स और इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के साथ ही डॉक्टरों की तैनाती रहेगी।
ट्रामा सेंटर में सर्जन हर वक्त तैनात रहेंगे। एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेके त्यागी ने बताया इमरजेंसी सेवाएं चुस्त रहेगी।
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चिकित्सकों की माने तो त्योहार पर रंग में भंग न पड़े, इसलिए केमिकल के रंगों से परहेज करें। इस तरह के रंग त्वचा व आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सेहत को ध्यान में रखते हुए मिलावटी मावा से बनी मिठाइयों से दूरी बनाए रखें।
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‘अमर उजाला’ टीम ने विशेषज्ञ डॉक्टरों व ब्यूटीशियन से इस बाबत जानने की कोशिश की तो उन्होंने कुछ तरह के टिप्स दिए हैं। अंडों, गुब्बारों, मिट्टी और कीचड़ से नहीं खेलें। सिर्फ हर्बल रंगों का ही इस्तेमाल करें।
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डॉक्टरों और अस्पताल के फोन नंबर पास रखें। नशे से दूरी बनाए रखें। हार्ट और डायबिटिक रोगी संभलकर खाए पकवान। सीएमओ अजेय अग्रवाल कहते हैं कि केमिकल वाले रंगों से परहेज करें और सुरक्षित होली मनाएं ।
रंग खेलने से पहले ये करें तैयारी
- रंग खेलने से पहले नारियल का तेल या वैसलीन लगाएं
- बालों के बचाने के लिए टोपी पहले या सिर पर कपड़ा बांधें।
- शरीर के खुले भागों पर नारियल तेल और मॉश्चराइजर लगाएं।
- कपड़े ऐसे पहने, जिससे शरीर पूरी तरह ढक जाए।
ऐसे छुड़ाए रंगों को
- कच्चे दूध और ब्रेड को भिगोकर रंग साफ करें
- रंग लगते ही फौरन पानी से धोएं।
- सॉफ्ट साबुन का ही इस्तेमाल करे।
- त्वचा को रगड़े नहीं।
- रंग नहीं जाए दो से तीन बार नहाए।
सांस रोगी सूखे रंगों से बचे
नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. संजय तेवतिया का कहना है कि आंखों में रंग या गुलाल चला जाए तो फौरन साफ पानी से धोए, रगड़े नहीं। अस्थमा रोगी और सांस के रोगी सूखे रंगों से बचे। सांस द्वारा सूखा रंग जाने से बचे। बालों में रंग डाले जाने पर झाड़े नहीं। डॉक्टर को फौरन दिखाएं। एलर्जी पीड़ित रंगों से दूर रहें।
घर के बने पकवान ही खाएं
फिजीशियन डॉ. अंशुल वार्ष्णेय का कहना है कि बाजार की खाने की वस्तुओं से परहेज करें। मिलावटी खाद्य पदार्थों से म्युकस मेमबरेंस (मुंह, पेट, आंत आदि की झिल्ली) पर असर पड़ता है। छाले पड़ने के साथ ही घाव का रूप ले सकते हैं। बच्चों को कालरा और टाइफायड जैसी बीमारी मिलावटी खाने से हो सकती है। ऐसे में घर के बने पकवान ही खाएं।
केमिकल नहीं, आर्गेनिक रंगों से खेलें
ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. बीपी त्यागी बताते हैं कि लाल रंग में मरकरी सल्फेट, बैंगनी में क्रोमियम, हरे में ब्रोमाइड व कापर सल्फेट अैर काले में लेड ऑक्साइड होता है। इन केमिकल से एलर्जी हो सकती है। नेचुरल और आर्गेनिक रंगों से खेलें। कान और नाक में रंगों को जाने से बचाएं।
त्वचा पर तेल या पेट्रोलियम जेली का प्रयोग करें
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. भावुक मित्तल के मुताबिक रंगों में मिले भारी तत्व त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंगों से बचाने के लिए होली खेलने से पहले त्वचा पर तेल या पेट्रोलियम जेली का प्रयोग करें। परेशानी होने पर फौरन डॉक्टर को दिखाएं।
अस्पतालों में रहेगी विशेष व्यवस्था
होली पर दोनों जिला अस्पतालों में खास सतर्कता रहेगी। अस्पताल में अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था की गई है। इमरजेंसी में ऑन कॉल डॉक्टर बुलाए जाएंगे, जिसमें सर्जन आदि शामिल रहेंगे।
अस्पताल में दस अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की गई है। संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि दवाओं का संपूर्ण स्टॉक रखने के साथ ही नर्स और इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर के साथ ही डॉक्टरों की तैनाती रहेगी।
ट्रामा सेंटर में सर्जन हर वक्त तैनात रहेंगे। एमएमजी अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेके त्यागी ने बताया इमरजेंसी सेवाएं चुस्त रहेगी।