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बेटे के शव के लिए तड़पता रहा पिता: जब तक नहीं किया 35 हजार का भुगतान, मोर्चरी में पड़ी रही लाश
Thu, 06 May 2021 05:17 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Thu, 06 May 2021 05:17 PM IST
सार
हापुड़ के पिलखुवा निवासी 23 वर्षीय युवक की कोरोना ने जान ले ली। बेटे के शव को अस्पताल लेने पहुंचे पिता को तीन घंटे तक इसलिए इंतजार करना पड़ा क्योंकि पिता के पास अस्पताल को बिल चुकाने के लिए 54 हजार रुपए नहीं थे।
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
विस्तार
हापुड़ के पिलखुवा निवासी 23 वर्षीय युवक की कोरोना ने जान ले ली। बेटे के शव को अस्पताल लेने पहुंचे पिता को तीन घंटे तक इसलिए इंतजार करना पड़ा क्योंकि पिता के पास अस्पताल को बिल चुकाने के लिए 54 हजार रुपए नहीं थे। एसडीम धौलाना के हस्तक्षेप के बाद पीड़ित ने 35 हजार जुटाकर अस्पताल में जमा कराएं। उसके बाद ही उसे शव सौंपा गया।
हापुड़ के पिलखुवा निवासी मनोज गोयल के 23 वर्षीय पुत्र कोरोना से पीड़ित था। पीड़ित पिता ने जैसे तैसे उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। मंगलवार रात बेटे को मौत हो गई। पीड़ित पिता जब बेटे का शव लेने पहुंचा तो अस्पताल प्रबंधन ने 54 हजार रुपये का बिल थमा दिया।
पीड़ित ने अपनी आर्थिक स्थिति अच्छी न होने का हवाला देते हुए अस्पताल प्रबंधन से कुछ रियायत की गुहार लगाई लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने किसी प्रकार की छूट देने से इनकार कर दिया। इस दौरान पिता रोता हुआ अपने पुत्र का शव प्राप्त करने की गुहार लगाता रहा। जिसे देखकर दूसरे लोगों का दिल भी पसीज गया।
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कोई हल ना होने पर पिता ने एसडीएम धौलाना से मामले की शिकायत की। एसडीम धौलाना के हस्तक्षेप के बाद 35 हजार में अस्पताल शव देने को राजी हो गया। एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी ने बताया कि दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी के बाद शव उसके पिता को अंतिम संस्कार के लिए सुपुर्द करा दिया गया।
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हापुड़ के पिलखुवा निवासी मनोज गोयल के 23 वर्षीय पुत्र कोरोना से पीड़ित था। पीड़ित पिता ने जैसे तैसे उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। मंगलवार रात बेटे को मौत हो गई। पीड़ित पिता जब बेटे का शव लेने पहुंचा तो अस्पताल प्रबंधन ने 54 हजार रुपये का बिल थमा दिया।
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पीड़ित ने अपनी आर्थिक स्थिति अच्छी न होने का हवाला देते हुए अस्पताल प्रबंधन से कुछ रियायत की गुहार लगाई लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने किसी प्रकार की छूट देने से इनकार कर दिया। इस दौरान पिता रोता हुआ अपने पुत्र का शव प्राप्त करने की गुहार लगाता रहा। जिसे देखकर दूसरे लोगों का दिल भी पसीज गया।
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कोई हल ना होने पर पिता ने एसडीएम धौलाना से मामले की शिकायत की। एसडीम धौलाना के हस्तक्षेप के बाद 35 हजार में अस्पताल शव देने को राजी हो गया। एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी ने बताया कि दोनों पक्षों की आपसी रजामंदी के बाद शव उसके पिता को अंतिम संस्कार के लिए सुपुर्द करा दिया गया।