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Ghaziabad News: हनुमान जी पर था विश्वास, रोज मांगता था मन्नत

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 28 Nov 2024 12:59 AM IST
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Had faith in Hanuman ji, used to pray daily
20 साल पहले लापता हुए राजू का बचपन का फोटो अपने परीवार के साथ। स्रोत परिवार
साहिबाबाद। राजू ने बताया कि 1993 में वह अपनी बहन के साथ स्कूल गया था। स्कूल से आते हुए उसकी बहन के साथ लड़ाई हो गई थी। बहन नाराज होकर आगे चली गई और राजू वहीं सड़क पर बैठ गया था। उस समय राजू की उम्र करीब 12 साल थी। राजू ने बताया कि वह जमीन पर बैठे हुए थे तभी कुछ लोग आए और उन्हें टैंपो में डालकर ले गए।
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राजू ने बताया कि वह बचपन से ही हनुमान जी का भक्त था। स्कूल जाते समय भी रास्ते में पड़ने वाले मंदिर में हनुमान जी की पूजा करके आता था। जिस समय टैंपो के माध्यम से राजू को राजस्थान के जैसलमेर ले जाया गया। तो यहां भी राजू को हनुमान जी पर पूरा विश्वास था कि वह उसे उसके परिवार से मिलवाएंगें। राजू को एक परिवार ने अपने पास रखा। राजू को एक खेत की झोपड़ी में रखा गया। जिस परिवार ने उन्हें रखा वह उसका उत्पीड़न करते थे। राजू रोजाना दिन भर भेड़ बकरियां चराने के लिए जाता था, रात को वापस आने पर उसे खाने के लिए एक ही रोटी मिलती थी। राजू कहीं भाग न जाए, इसके लिए उसे जंजीरों से बांध कर रखा जाता था। राजू ने बताया कि जिस स्थान पर वह थे, वहां दूर-दूर तक कोई नहीं रहता था। आसपास रेत ही रेत था। कुछ दिनों पहले राजू से एक बकरी की मौत हो गई थी। बकरी के मरने पर उसके मालिक ने उसे बुरी तरह मारा था। मालिक की पिटाई से उसका हाथ टूट गया था। कुछ दिनों पहले कुछ लोग जैसलमेर बकरियां लेने गए थे। यहां लोगों ने देखा कि राजू को जंजीरों में बांध रखा है। राजू ने किसी तरह चोरी से उन लोगों से मदद मांगी। वह लोग भी राजू की मदद के लिए तैयार हो गए। राजू को लाने के लिए लोगों ने मालिक से बकरियों का सौदा किया और टैंपो में बकरियों को भर दिया। उन लोगों ने राजू को बकरियों के बीच में छिपा दिया और दिल्ली अपने साथ ले आए। उन्होंने भूखे राजू काे खाना भी खिलाया। यहां उन लोगों ने राजू को गाजियाबाद की ट्रेन में बैठा दिया। राजू गाजियाबाद पहुंचा तो वह दर-दर भटकने लगा। इसके बाद वह कई थानों में पैदल ही पहुंचा। लेकिन किसी भी थाना पुलिस ने उसकी मदद नहीं की। अंत में राजू खोड़ा थाने पहुंचा। खोड़ा थाना पुलिस ने राजू की समस्या सुनी और उसे उसके परिवार से मिलाने का वादा किया। राजू को रहने के लिए कमरे की व्यवस्था कराई। उसके खाने का ध्यान रखा। राजू के द्वारा पुलिस को बताया गया कि उसे ध्यान नहीं है, कुछ याद है कि वह खोड़ा के गांव में रहता था गांव में शिव मंदिर है और सरकारी स्कूल है। पुलिस ने आसपास के थानों और सार्वजनिक स्थानों पर फोटो दिखवाए। इसके बाद अखबारों और सोशल मीडिया में राजू के परिवार को मिलने की अपील चली। अखबार की खबर और फोटो देखकर परिवार राजू से मिला।
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हनुमान की मूर्ति के पास सोता था

पुलिस ने राजू के लिए कमरे की व्यवस्था कराई थी। लेकिन राजू कमरे में सोने की बजाए थाने में बने मंदिर के अंदर हनुमान की मूर्ति के पास सोता था। वह कहता था कि तुम ही मुझे मेरे परिवार से मिलवाओगे। वह रोज हनुमान जी की पूजा भी करता था। दिन भर वह परिवार से मिलने की मन्नत मांगता रहता था। राजू ने बताया कि जिस परिवार ने उन्हें बंधक बना रखा था उस परिवार में दो से तीन छोटी लड़कियां थीं। वह राजू पर होने वाले उत्पीड़िन से खफा थी। वह चोरी छिपे अपने परिवार से बचकर राजू को खाना खिलाती थीं। वह लड़कियां भी राजू को उसके घर से भाग जाने की बात कहती थीं।
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पुराने रिकॉर्ड खंगाल कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी

एसीपी साहिबाबाद रजनीश कुमार उपाध्याय ने बताया कि राजू को परिवार से मिलवा दिया है। 1993 में साहिबाबाद थाने में अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। उस समय के कागजात निकलवाए जा रहे हैं। न्यायालय में क्या कार्रवाई हुई इसकी भी जानकारी ली जा रही है। अगर पुराना रिकॉर्ड नहीं मिलेगा तो परिवार से नई शिकायत लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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