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प्रदूषण फैलाने पर कौशांबी की आरडब्ल्यूए पर लगाया जुर्माना
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प्रदूषण फैलाने पर कौशांबी की आरडब्ल्यूए पर लगाया जुर्माना
कौशांबी। प्रदूषण के खिलाफ एनजीटी में लड़ाई लड़ रही कौशांबी की आरडब्ल्यूए पीसीबी व नगर निगम की कार्रवाई से हैरान हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद निर्माण एवं खुले में निर्माण सामग्री रखे जाने पर 26 नवंबर को कार्रवाई कर 50-50 हजार का जुर्माना लगाया गया है। आरडब्ल्यूए को बुधवार को इसका नोटिस मिला, अब इस जुर्माने के खिलाफ कौशांबी आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने सवाल उठाए हैं।
कारवां अध्यक्ष विनय मित्तल का कहना है कि 24 नवंबर को कोर्ट ने निर्माण पर बैन लगा लिया था। उनके इलाके में कुछ आरडब्ल्यूए पदाधिकारी सिक्योरिटी गार्ड रूम आदि बनवा रही थी। सड़क पर महज एक-एक फुट रोड़ी एवं बदरपुर पड़ा था। विनय मित्तल का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने पीसीबी एवं नगर निगम अधिकारियों से यह कहा था कि वह लोग अपने स्तर से लोगों को कोर्ट आदेश के प्रति जागरूक कर दें। वहीं दूसरी ओर यूपीपीसीबी और नगर निगम ने कौशांबी में कुछ आरडब्ल्यूए के खिलाफ अलग-अलग प्रदूषण के आरोप में 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। कारवा अध्यक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई उचित नहीं है, लोगों को निर्माण सामग्री हटाने का समय नहीं दिया गया। वहीं जुर्माना राशि लगाए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं। कारवा पदाधिकारी का कहना है कि कहीं तो ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों के खिलाफ यही जुर्माना राशि है वहीं कौशांबी में तो महज एक फुट रोड़ी रखा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया है कि वह लोग एनजीटी में प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, इसलिए जान बूझकर सरकारी एजेंसियां उन्हें परेशान कर रही हैं। बृहस्पतिवार को कारवा पदाधिकारी इस मामले में डीएम से मिलने की बात कही है। वहीं पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा का कहना है कि यूपी पीसीबी ने कौशांबी में महज दो जगह कार्रवाई की है, बाकी कार्रवाई नगर निगम ने की है जिसकी रिपोर्ट उन्हें माह के अंत में मिलेगा। क्षेत्रीय अधिकारी ने आरडब्ल्यूए पदाधिकारी के आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
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कौशांबी। प्रदूषण के खिलाफ एनजीटी में लड़ाई लड़ रही कौशांबी की आरडब्ल्यूए पीसीबी व नगर निगम की कार्रवाई से हैरान हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद निर्माण एवं खुले में निर्माण सामग्री रखे जाने पर 26 नवंबर को कार्रवाई कर 50-50 हजार का जुर्माना लगाया गया है। आरडब्ल्यूए को बुधवार को इसका नोटिस मिला, अब इस जुर्माने के खिलाफ कौशांबी आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों ने सवाल उठाए हैं।
कारवां अध्यक्ष विनय मित्तल का कहना है कि 24 नवंबर को कोर्ट ने निर्माण पर बैन लगा लिया था। उनके इलाके में कुछ आरडब्ल्यूए पदाधिकारी सिक्योरिटी गार्ड रूम आदि बनवा रही थी। सड़क पर महज एक-एक फुट रोड़ी एवं बदरपुर पड़ा था। विनय मित्तल का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने पीसीबी एवं नगर निगम अधिकारियों से यह कहा था कि वह लोग अपने स्तर से लोगों को कोर्ट आदेश के प्रति जागरूक कर दें। वहीं दूसरी ओर यूपीपीसीबी और नगर निगम ने कौशांबी में कुछ आरडब्ल्यूए के खिलाफ अलग-अलग प्रदूषण के आरोप में 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया। कारवा अध्यक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई उचित नहीं है, लोगों को निर्माण सामग्री हटाने का समय नहीं दिया गया। वहीं जुर्माना राशि लगाए जाने पर भी उन्होंने सवाल उठाए हैं। कारवा पदाधिकारी का कहना है कि कहीं तो ऊंची-ऊंची बिल्डिंगों के खिलाफ यही जुर्माना राशि है वहीं कौशांबी में तो महज एक फुट रोड़ी रखा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया है कि वह लोग एनजीटी में प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं, इसलिए जान बूझकर सरकारी एजेंसियां उन्हें परेशान कर रही हैं। बृहस्पतिवार को कारवा पदाधिकारी इस मामले में डीएम से मिलने की बात कही है। वहीं पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा का कहना है कि यूपी पीसीबी ने कौशांबी में महज दो जगह कार्रवाई की है, बाकी कार्रवाई नगर निगम ने की है जिसकी रिपोर्ट उन्हें माह के अंत में मिलेगा। क्षेत्रीय अधिकारी ने आरडब्ल्यूए पदाधिकारी के आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
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