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जहरीले कणों से आंखों में चुभन, सो नहीं पा रहे लोग
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जहरीले कणों से आंखों में चुभन, सो नहीं पा रहे लोग
साहिबाबाद। हवा में घुले जहरीले कण आंखों में चुभ रहे हैं। लोग सो नहीं पा रहे। बच्चों को ज्यादा दिक्कत है। सेहत पर यह हमला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्त्रस्वार को तो हवाइस सीजन में सबसे ज्यादा जहरीली रही । वायु गुणवत्ता सूचकांक ( एक्यूआई ) 486 दर्ज किया गया जबकि दिवाली पर 471 था।
चिकित्सकों ने बताया कि ओपीडी में हर दस में से तीन मरीज अनिद्रा और बेचैनी के हैं। इनमें बुर्जुग ही नहीं बल्कि 30 -32 साल के युवा भी हैं। बच्चों में आंखों में जलन के 15 से 20 मामले प्रतिदिन आ रहे हैं। छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष अग्रवाल ने बताया कि प्रदूषण के चलते फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचने में परेशानी होती है। शरीर में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से मस्तिष्क पर असर पड़ता है। ऐसे में सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या बढ़ जाती है। इससे लोगों में चिड़चिड़ापन या तनाव जैसी स्थिति बन जाती है। जिन मरीजों में अनिद्रा की शिकायत आ रही है, उनमें वायु प्रदूषण से हो रहे तनाव के चलते यह परेशानी हो रही है।
शास्त्रीनगर निवासी 55 वर्षीय व्यक्ति को दिवाली के बाद से लगातार सांस लेने में तकलीफ की शिकायत है। डॉ. आशीष अग्रवाल ने बताया कि ऑक्सीजन देने के बाद उनको राहत है लेकिन नींद न आने की परेशानी लगातार बनी हुई है।
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लोनी में सबसे खतरनाक हवा
इलाका एक्यूआई
लोनी 499
इंदिरापुरम 488
संजय नगर 487
वसुंधरा 483
सात दिन में मरीज
सांस लेने में तकलीफ - 3585
आंखों में जलन - 1319
बुखार - 2078
गला खराब, खांसी - 1527
नींद न आने की शिकायत - 600
प्रदूषण में निकलने से करें परहेज
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बीवी जिंदल ने बताया कि जितना हो सके प्रदूषण में निकलने से परहेज करें। बुर्जुग सुबह की सैर के बजाय घर में हल्का व्यायाम करें। एन-95 मास्क का इस्तेमाल जरूरी है। अधिक से अधिक पानी पिएं और हरी सब्जियों का सेवन करें।
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साहिबाबाद। हवा में घुले जहरीले कण आंखों में चुभ रहे हैं। लोग सो नहीं पा रहे। बच्चों को ज्यादा दिक्कत है। सेहत पर यह हमला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्त्रस्वार को तो हवाइस सीजन में सबसे ज्यादा जहरीली रही । वायु गुणवत्ता सूचकांक ( एक्यूआई ) 486 दर्ज किया गया जबकि दिवाली पर 471 था।
चिकित्सकों ने बताया कि ओपीडी में हर दस में से तीन मरीज अनिद्रा और बेचैनी के हैं। इनमें बुर्जुग ही नहीं बल्कि 30 -32 साल के युवा भी हैं। बच्चों में आंखों में जलन के 15 से 20 मामले प्रतिदिन आ रहे हैं। छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष अग्रवाल ने बताया कि प्रदूषण के चलते फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचने में परेशानी होती है। शरीर में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से मस्तिष्क पर असर पड़ता है। ऐसे में सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या बढ़ जाती है। इससे लोगों में चिड़चिड़ापन या तनाव जैसी स्थिति बन जाती है। जिन मरीजों में अनिद्रा की शिकायत आ रही है, उनमें वायु प्रदूषण से हो रहे तनाव के चलते यह परेशानी हो रही है।
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शास्त्रीनगर निवासी 55 वर्षीय व्यक्ति को दिवाली के बाद से लगातार सांस लेने में तकलीफ की शिकायत है। डॉ. आशीष अग्रवाल ने बताया कि ऑक्सीजन देने के बाद उनको राहत है लेकिन नींद न आने की परेशानी लगातार बनी हुई है।
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लोनी में सबसे खतरनाक हवा
इलाका एक्यूआई
लोनी 499
इंदिरापुरम 488
संजय नगर 487
वसुंधरा 483
सात दिन में मरीज
सांस लेने में तकलीफ - 3585
आंखों में जलन - 1319
बुखार - 2078
गला खराब, खांसी - 1527
नींद न आने की शिकायत - 600
प्रदूषण में निकलने से करें परहेज
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. बीवी जिंदल ने बताया कि जितना हो सके प्रदूषण में निकलने से परहेज करें। बुर्जुग सुबह की सैर के बजाय घर में हल्का व्यायाम करें। एन-95 मास्क का इस्तेमाल जरूरी है। अधिक से अधिक पानी पिएं और हरी सब्जियों का सेवन करें।