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खाना-चाय बनाने की बात पर टूट रहे परिवार
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खाना-चाय बनाने की बात पर टूट रहे परिवार
गाजियाबाद। सात जन्मों का साथ निभाने का वादा करने वाले पति-पत्नी के रिश्ते अहम और अहंकार की वजह से टूटने की कगार पर पहुंच रहे हैं। जिले के महिला थाने और परिवार परामर्श केंद्र में हर महीने गृहस्थी के झगड़े के 2400 केस दर्ज हो रहे हैं। इनमें करीब 700 मामले की वजह छोटी-छोटी बातें हैं। करीब 30 प्रतिशत मामलों की वजह शक है।
पति-पत्नी अच्छे आमदनी वाले सरकारी और गैरसरकारी पदों पर होते हुए भी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ रहे हैं। कभी घर के काम को लेकर तो कभी पति की बात न मानने को लेकर रिश्ते टूटने की कगार पर आ जाते हैं। परिवार परामर्श केंद्र में अहम की वजह से परिवार टूटने के मामले सबसे ज्यादा पहुंच रहे हैं। पत्नी-पति से आगे बढ़ जाए या पत्नी को घर के काम ज्यादा करने पड़ जाएं तो रिश्ते दरकने लगते हैं। सप्ताह में चार दिन होने वाली सुनवाई में हर दिन करीब 120 से 150 मामले सिर्फ इसी तरह के पहुंच रहे हैं। इनमें से 50 फीसदी मामले सुलझ जाते हैं, लेकिन 50 फीसदी मामलों में परिवार टूट रहे हैं।
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केस-1
राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाली एक महिला की शादी को सात साल हो गए हैं। बिजनेस में पत्नी के सफल होने पर पति को यह बात अखरने लगी है। मल्टीनेशल कंपनी में नौकरी करने वाले पति ने एमबीए पास पत्नी को बैग बनाने का व्यवसाय शुरू कराया था। तीन साल में पत्नी का व्यवसाय चल निकला। इसके बाद दोनों ने अपने नाम पर राजनगर एक्सटेंशन में एक फ्लैट खरीद लिया। पत्नी का व्यवसाय अच्छा चल जाने के बाद से ही पति बात-बात पर लड़ने लगा। पति फ्लैट बेचकर खुद भी बिजनेस करने की बात पर अड़ गया। पत्नी ने फ्लैट बेचने से मना कर दिया तो विवाद बढ़ गया। पति कई बार बिना बताए घर से गायब रहता तो कभी खर्च के लिए पैसे नहीं देता। फ्लैट बेचने पर सहमति न देने पर पति नाराज हो गया और पत्नी को प्रॉपर्टी से प्यार का कारण बताकर तलाक देने की जिद पर अड़ गया।
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केस-2
हिंडन पार क्षेत्र की एक पॉश कॉलोनी में रहने वाले पति-पत्नी मल्टीनेशनल कंपनी में कार्य करते हैं। दोनों वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। दोनों में अक्सर चाय बनाने और घरेलू काम में सहायता करने को लेकर विवाद होता है। पत्नी का कहना है कि जब दोनों जॉब कर रहे हैं तो सिर्फ मैं ही चाय क्यों बनाऊं। रिश्तेदारों की खातिरदारी की जिम्मेदारी सिर्फ मेरी क्यों है। पति ने घरेलू काम करने से साफ इनकार कर दिया। इस पर लगातार विवाद बढ़ने के बाद मामला महिला थाने में पहुंच गया है।
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इनसेट:
- सप्ताह में चार दिन होने वाली सुनवाई - 150 प्रतिदिन
- एक महीने में कुल सुनवाई - 2400 से 2500
- एक महीने में आए विवाद के मामले - 700
- साल भर में आए सिर्फ मामले - 8249
कोट्स
छोटी-छोटी बातों पर कहासुनी शुरू हो जाती हैं, विवाद बढ़ने पर मामले परिवार परामर्श केंद्र में पहुंच जाते हैं। अहम के कारण पति-पत्नी में कोई पीछे नहीं हटना चाहता। परिवार को बसाने के लिए काउंसलिंग करते हैं। इनमें से कुछ जोड़े तो मान जाते हैं, लेकिन कुछ ऐेसे जोड़े होते हैं जो अपना बसा बसाया परिवार तोड़ देते हैं। - आफताब नाज, काउंसिलर
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अच्छे पढ़े-लिखे परिवारों में अहम की वजह से घर टूटने के केस अधिक आते हैं। दोनों अच्छे पदों पर नौकरी करते हैं या व्यवसाय में सफल होते हैं। पति-पत्नी एक दूसरे के सामने झुकना नहीं चाहते जिसकी वजह से परिवार टूट रहे हैं। - नेहा चौहान, परिवार परामर्श केंद्र प्रभारी
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गाजियाबाद। सात जन्मों का साथ निभाने का वादा करने वाले पति-पत्नी के रिश्ते अहम और अहंकार की वजह से टूटने की कगार पर पहुंच रहे हैं। जिले के महिला थाने और परिवार परामर्श केंद्र में हर महीने गृहस्थी के झगड़े के 2400 केस दर्ज हो रहे हैं। इनमें करीब 700 मामले की वजह छोटी-छोटी बातें हैं। करीब 30 प्रतिशत मामलों की वजह शक है।
पति-पत्नी अच्छे आमदनी वाले सरकारी और गैरसरकारी पदों पर होते हुए भी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ रहे हैं। कभी घर के काम को लेकर तो कभी पति की बात न मानने को लेकर रिश्ते टूटने की कगार पर आ जाते हैं। परिवार परामर्श केंद्र में अहम की वजह से परिवार टूटने के मामले सबसे ज्यादा पहुंच रहे हैं। पत्नी-पति से आगे बढ़ जाए या पत्नी को घर के काम ज्यादा करने पड़ जाएं तो रिश्ते दरकने लगते हैं। सप्ताह में चार दिन होने वाली सुनवाई में हर दिन करीब 120 से 150 मामले सिर्फ इसी तरह के पहुंच रहे हैं। इनमें से 50 फीसदी मामले सुलझ जाते हैं, लेकिन 50 फीसदी मामलों में परिवार टूट रहे हैं।
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केस-1
राजनगर एक्सटेंशन में रहने वाली एक महिला की शादी को सात साल हो गए हैं। बिजनेस में पत्नी के सफल होने पर पति को यह बात अखरने लगी है। मल्टीनेशल कंपनी में नौकरी करने वाले पति ने एमबीए पास पत्नी को बैग बनाने का व्यवसाय शुरू कराया था। तीन साल में पत्नी का व्यवसाय चल निकला। इसके बाद दोनों ने अपने नाम पर राजनगर एक्सटेंशन में एक फ्लैट खरीद लिया। पत्नी का व्यवसाय अच्छा चल जाने के बाद से ही पति बात-बात पर लड़ने लगा। पति फ्लैट बेचकर खुद भी बिजनेस करने की बात पर अड़ गया। पत्नी ने फ्लैट बेचने से मना कर दिया तो विवाद बढ़ गया। पति कई बार बिना बताए घर से गायब रहता तो कभी खर्च के लिए पैसे नहीं देता। फ्लैट बेचने पर सहमति न देने पर पति नाराज हो गया और पत्नी को प्रॉपर्टी से प्यार का कारण बताकर तलाक देने की जिद पर अड़ गया।
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केस-2
हिंडन पार क्षेत्र की एक पॉश कॉलोनी में रहने वाले पति-पत्नी मल्टीनेशनल कंपनी में कार्य करते हैं। दोनों वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं। दोनों में अक्सर चाय बनाने और घरेलू काम में सहायता करने को लेकर विवाद होता है। पत्नी का कहना है कि जब दोनों जॉब कर रहे हैं तो सिर्फ मैं ही चाय क्यों बनाऊं। रिश्तेदारों की खातिरदारी की जिम्मेदारी सिर्फ मेरी क्यों है। पति ने घरेलू काम करने से साफ इनकार कर दिया। इस पर लगातार विवाद बढ़ने के बाद मामला महिला थाने में पहुंच गया है।
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इनसेट:
- सप्ताह में चार दिन होने वाली सुनवाई - 150 प्रतिदिन
- एक महीने में कुल सुनवाई - 2400 से 2500
- एक महीने में आए विवाद के मामले - 700
- साल भर में आए सिर्फ मामले - 8249
कोट्स
छोटी-छोटी बातों पर कहासुनी शुरू हो जाती हैं, विवाद बढ़ने पर मामले परिवार परामर्श केंद्र में पहुंच जाते हैं। अहम के कारण पति-पत्नी में कोई पीछे नहीं हटना चाहता। परिवार को बसाने के लिए काउंसलिंग करते हैं। इनमें से कुछ जोड़े तो मान जाते हैं, लेकिन कुछ ऐेसे जोड़े होते हैं जो अपना बसा बसाया परिवार तोड़ देते हैं। - आफताब नाज, काउंसिलर
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अच्छे पढ़े-लिखे परिवारों में अहम की वजह से घर टूटने के केस अधिक आते हैं। दोनों अच्छे पदों पर नौकरी करते हैं या व्यवसाय में सफल होते हैं। पति-पत्नी एक दूसरे के सामने झुकना नहीं चाहते जिसकी वजह से परिवार टूट रहे हैं। - नेहा चौहान, परिवार परामर्श केंद्र प्रभारी