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नौकरी करने का मन नहीं है, तीन महीने की छुट्टी जा रहा हूं
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नौकरी करने का मन नहीं है, तीन महीने की छुट्टी जा रहा हूं
गाजियाबाद। मेरठ में तैनाती के दौरान गोकशी होने पर खुद के खिलाफ तस्करा डलवाकर चर्चा में आने वाले इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी अब गाजियाबाद में सात पशु तस्करों के पैर में एक ही जगह गोली मारने के बाद सुर्खियों में हैं। पुलिस के अचूक निशाने की किरकिरी होने पर एसएसपी ने शनिवार को उन्हें चार्ज से हटा दिया। इस कार्रवाई के बाद इंस्पेक्टर ने तीन महीने की छुट्टी पर जाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि उनका मनोबल गिरा है, लिहाजा उनका नौकरी करने का मन नहीं है।
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी का मेरठ से गाजियाबाद तबादला हुआ था। एसएसपी ने 26 सितंबर को उन्हें लोनी बॉर्डर थाने का एसएचओ बनाया था। बृहस्पतिवार सुबह पशु कटान कर रहे तस्करों से मुठभेड़ को लेकर डेढ़ महीने के कार्यकाल में ही उन्हें चार्ज से हटना पड़ा। इस कार्रवाई के बाद इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी ने छुट्टी पर जाने का फैसला कर लिया है। उनका कहना है कि अब उनका नौकरी करने का मन नहीं है। लिहाजा तीन माह की छुट्टी लिखकर जा रहा हूं। अधिकारी छुट्टी स्वीकृत करें तो ठीक है, नहीं तो उनकी मर्जी।
गोकशी होने पर खुद के खिलाफ डाला था तस्करा
जुलाई 2018 में इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी मेरठ के खरखौदा थाने में तैनात थे। क्षेत्र में गोकशी होने पर उन्होंने दो दरोगा व बीट कांस्टेबल समेत खुद के खिलाफ भी तस्करा डाला था। उन्होंने घटना न रुकने के लिए खुद को जिम्मेदार बताया था। उनका कहना था कि हत्या, डकैती या गोकशी की घटना होने पर थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी तय होती है।
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सीबीसीआईडी में तबादला होने पर खोला था मोर्चा
जनवरी 2019 में इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी का तबादला सीबीसीआईडी में हो गया। इस पर उन्होंने मेरठ एसटीएफ के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोला था। उनका कहना है कि दो माह पहले उन्होंने मांस से भरा कैंटर पकड़ा था। पशु चिकित्सक द्वारा प्रतिबंधित पशु का मांस न होने की बात कहने के बावजूद उन्होंने गोकशी का केस दर्ज कराया। इसके बावजूद एसटीएफ के अधिकारियों ने गोकशी में लिप्त होने की बात कह उनके खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेज दी थी। उनका आरोप था कि इसी रिपोर्ट के आधार पर उनका तबादला हुआ। हालांकि, एसटीएफ के अधिकारियों ने रिपोर्ट भेजने से इंकार किया था।
छुट्टी का प्रार्थना पत्र नहीं आया
जनहित और प्रशासनिक समायोजन में इंस्पेक्टर का तबादला हुआ है। इंस्पेक्टर की छुट्टी का प्रार्थना-पत्र अभी मेरे पास नहीं आया है। प्रार्थना-पत्र मिलने पर देखा जाएगा कि उन्हें छुट्टी मिल सकती है या नहीं। या कितने दिन की मिल सकती है। वह ईएल मांगेंगे या सीएल, उसे देखकर कार्रवाई की जाएगी।
- पवन कुमार, एसएसपी
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गाजियाबाद। मेरठ में तैनाती के दौरान गोकशी होने पर खुद के खिलाफ तस्करा डलवाकर चर्चा में आने वाले इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी अब गाजियाबाद में सात पशु तस्करों के पैर में एक ही जगह गोली मारने के बाद सुर्खियों में हैं। पुलिस के अचूक निशाने की किरकिरी होने पर एसएसपी ने शनिवार को उन्हें चार्ज से हटा दिया। इस कार्रवाई के बाद इंस्पेक्टर ने तीन महीने की छुट्टी पर जाने का फैसला किया है। उनका कहना है कि उनका मनोबल गिरा है, लिहाजा उनका नौकरी करने का मन नहीं है।
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी का मेरठ से गाजियाबाद तबादला हुआ था। एसएसपी ने 26 सितंबर को उन्हें लोनी बॉर्डर थाने का एसएचओ बनाया था। बृहस्पतिवार सुबह पशु कटान कर रहे तस्करों से मुठभेड़ को लेकर डेढ़ महीने के कार्यकाल में ही उन्हें चार्ज से हटना पड़ा। इस कार्रवाई के बाद इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी ने छुट्टी पर जाने का फैसला कर लिया है। उनका कहना है कि अब उनका नौकरी करने का मन नहीं है। लिहाजा तीन माह की छुट्टी लिखकर जा रहा हूं। अधिकारी छुट्टी स्वीकृत करें तो ठीक है, नहीं तो उनकी मर्जी।
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गोकशी होने पर खुद के खिलाफ डाला था तस्करा
जुलाई 2018 में इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी मेरठ के खरखौदा थाने में तैनात थे। क्षेत्र में गोकशी होने पर उन्होंने दो दरोगा व बीट कांस्टेबल समेत खुद के खिलाफ भी तस्करा डाला था। उन्होंने घटना न रुकने के लिए खुद को जिम्मेदार बताया था। उनका कहना था कि हत्या, डकैती या गोकशी की घटना होने पर थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी तय होती है।
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सीबीसीआईडी में तबादला होने पर खोला था मोर्चा
जनवरी 2019 में इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी का तबादला सीबीसीआईडी में हो गया। इस पर उन्होंने मेरठ एसटीएफ के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोला था। उनका कहना है कि दो माह पहले उन्होंने मांस से भरा कैंटर पकड़ा था। पशु चिकित्सक द्वारा प्रतिबंधित पशु का मांस न होने की बात कहने के बावजूद उन्होंने गोकशी का केस दर्ज कराया। इसके बावजूद एसटीएफ के अधिकारियों ने गोकशी में लिप्त होने की बात कह उनके खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेज दी थी। उनका आरोप था कि इसी रिपोर्ट के आधार पर उनका तबादला हुआ। हालांकि, एसटीएफ के अधिकारियों ने रिपोर्ट भेजने से इंकार किया था।
छुट्टी का प्रार्थना पत्र नहीं आया
जनहित और प्रशासनिक समायोजन में इंस्पेक्टर का तबादला हुआ है। इंस्पेक्टर की छुट्टी का प्रार्थना-पत्र अभी मेरे पास नहीं आया है। प्रार्थना-पत्र मिलने पर देखा जाएगा कि उन्हें छुट्टी मिल सकती है या नहीं। या कितने दिन की मिल सकती है। वह ईएल मांगेंगे या सीएल, उसे देखकर कार्रवाई की जाएगी।
- पवन कुमार, एसएसपी