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आठ महिलाओं समेत १५ डेंगू संक्रमित
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8 महिलाओं समेत डेंगू के 17 मरीज मिले
गाजियाबाद। बरसात बंद होने के बावजूद लगातार डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को आठ महिलाओं समेत 15 मरीजों में डेंगू बुखार की पुष्टि हुई है। बाहर के दो मरीजों समेत 17 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती किए गए हैं। अब तक जिले में कुल 405 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 301 स्वस्थ हो चुके हैं। इस समय 68 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। डीएसओ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि 12 संक्रमित ऐसे हैं जो पिछली साल भी डेंगू की चपेट में आए थे और इस बार भी डेंगू से ग्रसित हैं।
रक्तस्राव होने के बाद प्लेट्लेट्स हुई 20 हजार से कम
सीएमओ कार्यालय के स्टाफ ने बताया कि आईडीएसपी लैब में कार्यरत एक लैब टेकभनीशियन (एलटी) डेंगू संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। रक्तस्राव के बाद प्लेट्लेट्स 20 हजार पर आ गई है। 26 वर्षीय एलटी को हापुड़ के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्टाफ के अनुसार एलटी पिछली बार भी डेंगू की चपेट में आया था। वह कोरोना की पहली लहर में कोरोना संक्रमित भी हुए थे। डेंगू संक्रमितों में 22 मरीज ऐसे हैं जो कोरोना की भी चपेट में आ चुके हैं।
दूसरी बार डेंगू की चपेट में आने पर रक्तस्राव की होती है परेशानी
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीबी जिंदल ने बताया कि दूसरी बार संक्रमण की चपेट में आने पर रक्तस्राव बढ़ने की आशंका रहती है। प्लेटलेट्स काउंट कम होने के साथ रक्तस्राव होने पर मौत होने का खतरा रहता है। डेंगू वायरस से संक्रमित होने के दो से तीन दिन बाद बुखार आता है। बुखार तीन से चौथे दिन ठीक हो जाता है। इससे प्लेटलेट्स काउंट कम होने लगते हैं और खून गाढ़ा हो जाता है। चौथे से पांचवें दिन प्लेटलेट्स काउंट 50 हजार (सामान्य स्तर 1.50 से 4 लाख) से नीचे पहुंच जाते हैं। यह 20 हजार से नीचे पहुंच जाएं और रक्तस्राव होने लगे तो मरीज शॉक में चला जाता है। ब्लड प्रेशर कम होने लगता है, ऐसे केस में मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। पांचवें दिन के बाद रिकवरी फेज (ठीक होना) शुरू हो जाता है। शरीर में दर्द, कमजोरी और थकान रहती है लेकिन खतरा कम हो जाता है। 10 दिन बाद मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
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गाजियाबाद। बरसात बंद होने के बावजूद लगातार डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बुधवार को आठ महिलाओं समेत 15 मरीजों में डेंगू बुखार की पुष्टि हुई है। बाहर के दो मरीजों समेत 17 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती किए गए हैं। अब तक जिले में कुल 405 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 301 स्वस्थ हो चुके हैं। इस समय 68 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। डीएसओ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि 12 संक्रमित ऐसे हैं जो पिछली साल भी डेंगू की चपेट में आए थे और इस बार भी डेंगू से ग्रसित हैं।
रक्तस्राव होने के बाद प्लेट्लेट्स हुई 20 हजार से कम
सीएमओ कार्यालय के स्टाफ ने बताया कि आईडीएसपी लैब में कार्यरत एक लैब टेकभनीशियन (एलटी) डेंगू संक्रमण की चपेट में आ गए हैं। रक्तस्राव के बाद प्लेट्लेट्स 20 हजार पर आ गई है। 26 वर्षीय एलटी को हापुड़ के प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्टाफ के अनुसार एलटी पिछली बार भी डेंगू की चपेट में आया था। वह कोरोना की पहली लहर में कोरोना संक्रमित भी हुए थे। डेंगू संक्रमितों में 22 मरीज ऐसे हैं जो कोरोना की भी चपेट में आ चुके हैं।
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दूसरी बार डेंगू की चपेट में आने पर रक्तस्राव की होती है परेशानी
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष व वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीबी जिंदल ने बताया कि दूसरी बार संक्रमण की चपेट में आने पर रक्तस्राव बढ़ने की आशंका रहती है। प्लेटलेट्स काउंट कम होने के साथ रक्तस्राव होने पर मौत होने का खतरा रहता है। डेंगू वायरस से संक्रमित होने के दो से तीन दिन बाद बुखार आता है। बुखार तीन से चौथे दिन ठीक हो जाता है। इससे प्लेटलेट्स काउंट कम होने लगते हैं और खून गाढ़ा हो जाता है। चौथे से पांचवें दिन प्लेटलेट्स काउंट 50 हजार (सामान्य स्तर 1.50 से 4 लाख) से नीचे पहुंच जाते हैं। यह 20 हजार से नीचे पहुंच जाएं और रक्तस्राव होने लगे तो मरीज शॉक में चला जाता है। ब्लड प्रेशर कम होने लगता है, ऐसे केस में मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। पांचवें दिन के बाद रिकवरी फेज (ठीक होना) शुरू हो जाता है। शरीर में दर्द, कमजोरी और थकान रहती है लेकिन खतरा कम हो जाता है। 10 दिन बाद मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
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