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मनी लॉन्ड्रिंग में भी शामिल है ठग कंपनी का सीईओ
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मनी लॉन्ड्रिंग में भी शामिल
है ठग कंपनी का सीईओ
गाजियाबाद। ट्विटर पर ट्रेडिंग के कोर्स का विज्ञापन निकालकर क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर ढाई सौ लोगों से 50 करोड़ रुपये ठगने वाला नील उर्फ हितेष पटेल मनी लांड्रिंग के धंधे से भी जुड़ा था। गैंग के पीड़ितों ने विदेशों में बैठे अपने जानकारों की मदद से इस संबंध में कुछ अहम सुराग जुटाए हैं। इन दस्तावेजों को पीड़ितों ने साइबर सेल को मुहैया कराया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह की कुंडली खंगाली जा रही है।
मूलरुप से गुजरात निवासी नील उर्फ हितेष पटेल अमेरिका में बैठकर ठग कंपनी चला रहा है। वह कई वर्षों से अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपना शिकार बनाकर करोड़ों रुपये ठग चुका है। गैंग के पीड़ित कई वर्षों से इसके बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। इनमें से कुछ एनआरआई भी शामिल हैं। पीड़ितों के मुताबिक नील पटेल ठगी के साथ-साथ मनी लांड्रिंग के धंधे में भी शामिल है। इसके बारे में बड़ी रकम की ट्रांजेक्शन डिटेल भी हाथ लग गई है। पीड़ितों का कहना है कि नील पटेल एक कंपनी से दूसरे कंपनी में मनी लांड्रिंग करता था।
क्रिप्टो करेंसी खरीदकर दूसरी कंपनी के खाते में भेजीं
पीड़ितों के मुताबिक नील उर्फ हितेष पटेल ने अपनी कंपनी से डेढ़ करोड़ की क्रिप्टो करेंसी खरीदी और फिर पंजाब की एक कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दी। इस लेनदेन का रिकॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं, नील पटेल की कंपनी के मैनेजर नौबत सिंह ने भी नील की स्क्वीक्स कंपनी के खाते से अपने खाते में 90 लाख रुपये ट्रांसफर किए। नील पटेल समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराने वाले अकबरपुर बहरामपुर निवासी विनीत का कहना है कि 90 लाख की ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट उनके पास भी आया है।
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कई कंपनियों से है नील पटेल का टाई-अप
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नील की कंपनी स्क्वीक्स का टाई-अप कई कंपनियों से था। इन कंपनियों से उसका वर्चुअल करेंसी का लेन-देन था। किसी कंपनी से वह वर्चुअल करेंसी खरीदता तो किसी को बेचकर मुनाफा कमाता था। साइबर सेल इन कंपनियों की टिडेल खंगालने में जुट गई है। बताया जा रहा है कि नील पटेल के साथ कई एनआरआई और विदेशी भी ठगी के धंधे में जुड़े हुए हैं।
यह था मामला
स्क्वीक्स टेक्नोलॉजी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। इसके द्वारा नील ने 500 लोगों को विदेशी मुद्रा प्रशिक्षण और नौकरी का विज्ञापन निकाला था। बहमती बास गांधीनगर, गुजरात निवासी नील उर्फ हितेष पटेल कंपनी का सीईओ है, जो अमेरिका में रहकर इसे संचालित करता है। उसने ट्रेडिंग के कोर्स के दो प्लान बताए। 500 रुपये के प्लान में सिर्फ ट्रेडिंग की ट्रेनिंग देने तथा 45 हजार के प्लान में ट्रेनिंग के साथ-साथ 50 हजार प्रतिमाह सैलरी की नौकरी दिलाने की गारंटी भी दी गई। टेलीग्राम पर ग्रुप बनाकर 220 लोगों से पाठ्यक्त्रस्म शुल्क के तौर पर 45-45 हजार रुपये लिए गए। तीन माह के पाठ्यक्रम के बाद दो साल के लिए लोगों को काम पर रखने और उन्हें अपने अमेरिकी ग्राहकों द्वारा भी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी की। टेलीग्राम के एक ग्रुप से जुड़े 220 लोगों से करीब 50 करोड़ की ठगी की गई है। ठगी केपीड़ित अकबरपुर बहरामपुर निवासी विनीत कुमार ने विजयनगर थाने में नील, उसके डायरेक्टर पिता, मैनेजर व पार्टनर के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
कोट
मामले की छानबीन की जा रही है। नील पटेल और उसके संपर्क के लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही हैं। नील का किन-किन कंपनियों ने लेन-देन था, इसकी पता भी लगाया जा रहा है।
- सुमित कुमार, साइबर सेल प्रभारी
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है ठग कंपनी का सीईओ
गाजियाबाद। ट्विटर पर ट्रेडिंग के कोर्स का विज्ञापन निकालकर क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर ढाई सौ लोगों से 50 करोड़ रुपये ठगने वाला नील उर्फ हितेष पटेल मनी लांड्रिंग के धंधे से भी जुड़ा था। गैंग के पीड़ितों ने विदेशों में बैठे अपने जानकारों की मदद से इस संबंध में कुछ अहम सुराग जुटाए हैं। इन दस्तावेजों को पीड़ितों ने साइबर सेल को मुहैया कराया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह की कुंडली खंगाली जा रही है।
मूलरुप से गुजरात निवासी नील उर्फ हितेष पटेल अमेरिका में बैठकर ठग कंपनी चला रहा है। वह कई वर्षों से अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपना शिकार बनाकर करोड़ों रुपये ठग चुका है। गैंग के पीड़ित कई वर्षों से इसके बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। इनमें से कुछ एनआरआई भी शामिल हैं। पीड़ितों के मुताबिक नील पटेल ठगी के साथ-साथ मनी लांड्रिंग के धंधे में भी शामिल है। इसके बारे में बड़ी रकम की ट्रांजेक्शन डिटेल भी हाथ लग गई है। पीड़ितों का कहना है कि नील पटेल एक कंपनी से दूसरे कंपनी में मनी लांड्रिंग करता था।
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क्रिप्टो करेंसी खरीदकर दूसरी कंपनी के खाते में भेजीं
पीड़ितों के मुताबिक नील उर्फ हितेष पटेल ने अपनी कंपनी से डेढ़ करोड़ की क्रिप्टो करेंसी खरीदी और फिर पंजाब की एक कंपनी के खाते में ट्रांसफर कर दी। इस लेनदेन का रिकॉर्ड भी मिल चुका है। वहीं, नील पटेल की कंपनी के मैनेजर नौबत सिंह ने भी नील की स्क्वीक्स कंपनी के खाते से अपने खाते में 90 लाख रुपये ट्रांसफर किए। नील पटेल समेत चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराने वाले अकबरपुर बहरामपुर निवासी विनीत का कहना है कि 90 लाख की ट्रांजेक्शन का स्क्रीनशॉट उनके पास भी आया है।
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कई कंपनियों से है नील पटेल का टाई-अप
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नील की कंपनी स्क्वीक्स का टाई-अप कई कंपनियों से था। इन कंपनियों से उसका वर्चुअल करेंसी का लेन-देन था। किसी कंपनी से वह वर्चुअल करेंसी खरीदता तो किसी को बेचकर मुनाफा कमाता था। साइबर सेल इन कंपनियों की टिडेल खंगालने में जुट गई है। बताया जा रहा है कि नील पटेल के साथ कई एनआरआई और विदेशी भी ठगी के धंधे में जुड़े हुए हैं।
यह था मामला
स्क्वीक्स टेक्नोलॉजी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। इसके द्वारा नील ने 500 लोगों को विदेशी मुद्रा प्रशिक्षण और नौकरी का विज्ञापन निकाला था। बहमती बास गांधीनगर, गुजरात निवासी नील उर्फ हितेष पटेल कंपनी का सीईओ है, जो अमेरिका में रहकर इसे संचालित करता है। उसने ट्रेडिंग के कोर्स के दो प्लान बताए। 500 रुपये के प्लान में सिर्फ ट्रेडिंग की ट्रेनिंग देने तथा 45 हजार के प्लान में ट्रेनिंग के साथ-साथ 50 हजार प्रतिमाह सैलरी की नौकरी दिलाने की गारंटी भी दी गई। टेलीग्राम पर ग्रुप बनाकर 220 लोगों से पाठ्यक्त्रस्म शुल्क के तौर पर 45-45 हजार रुपये लिए गए। तीन माह के पाठ्यक्रम के बाद दो साल के लिए लोगों को काम पर रखने और उन्हें अपने अमेरिकी ग्राहकों द्वारा भी नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी की। टेलीग्राम के एक ग्रुप से जुड़े 220 लोगों से करीब 50 करोड़ की ठगी की गई है। ठगी केपीड़ित अकबरपुर बहरामपुर निवासी विनीत कुमार ने विजयनगर थाने में नील, उसके डायरेक्टर पिता, मैनेजर व पार्टनर के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
कोट
मामले की छानबीन की जा रही है। नील पटेल और उसके संपर्क के लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही हैं। नील का किन-किन कंपनियों ने लेन-देन था, इसकी पता भी लगाया जा रहा है।
- सुमित कुमार, साइबर सेल प्रभारी