{"_id":"611eaae48ebc3e79fb7bcbf6","slug":"ghaziyabad-ghaziabad-news-gbd2244058174","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना ने छुड़वा दी 10 हजार छात्राओं की पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना ने छुड़वा दी 10 हजार छात्राओं की पढ़ाई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना ने छुड़वा दी 10 हजार छात्राओं की पढ़ाई
गाजियाबाद। कोरोना काल सेहत के साथ-साथ परिषदीय स्कूलों की छात्राओं के कॅरिअर के लिए भी नुकसानदायक साबित हुआ। इस दौरान 10 हजार से अधिक लड़कियों का स्कूल छूट गया। यह सरकार की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के लिए एक आइना है। स्कूल बंद होने के दौरान केवल 15 फीसदी छात्राओं ने ही ऑनलाइन क्लासेज कीं। बाकी 85 फीसदी छात्राएं इससे वंचित रहीं। शिक्षकों ने अभिभावकों से संपर्क किया तो उन्होंने भी छात्राओं को स्कूल भेजने से मना कर दिया। अब विभाग के सामने विद्यालय छोड़ने वाली छात्राओं को प्रवेश दिलाना बड़ी चुनौती है।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालय में एक लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, केवल 40 फीसदी छात्र-छात्राओं ने ही ऑनलाइन कक्षाओं में पढ़ाई की। बाकी छात्र-छात्राएं संसाधनों के अभाव में वंचित रहे। शिक्षा विभाग ने उन्हें दूरदर्शन व अन्य माध्यमों से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली। 40 फीसदी में से 25 फीसदी छात्र और 15 फीसदी छात्राएं रहीं। बिगड़े आर्थिक हालात के चलते भी अभिभावकों न्रे बेटियों को पढ़ाना बंद कर दिया। अब ये लड़कियां घर के कार्यों में व्यस्त हैं।
स्कूल खुलने पर और घटेगी संख्या
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पंजीकृत एक लाख विद्यार्थियों में 49 हजार छात्राएं हैं। इसमें से 10 से 12 हजार छात्राओं का नाम स्कूलों में तो चल रहा है, लेकिन कोरोना के पहली लहर से ही उनका पढ़ाई से कोई लेना-देना नहीं है। फरवरी-मार्च में स्कूल खुले तो छात्र-छात्राओं को बुलाने के लिए शिक्षकों ने संपर्क किया था। करीब 10 हजार से अधिक छात्राओं के अभिभावकों ने उन्हें स्कूल भेजने से ही मना कर दिया था। अब 23 अगस्त से कक्षा 6 से 8 और एक सितंबर से कक्षा एक से पांच तक के स्कूल खोलने की तैयारी है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूल खुलने के बाद छात्राओं की संख्या और कम हो सकती है। क्योंकि पंजीकरण का डाटा पूर्व का है।
विज्ञापन
ये है स्थिति
परिषदीय स्कूल : 455
पंजीकृत विद्यार्थी : 1,00000
छात्र : 51,000
छात्राएं : 49,000
ऑनलाइन कक्षा : 40 फीसदी ने ली
ऑनलाइन कक्षा (छात्र) : 25 फीसदी ने ली
ऑनलाइन कक्षा (छात्राएं) : 15 फीसदी ने ली
स्कूल छोड़ने वाली छात्राएं : 10,000
ऐसे हुई छात्राओं के स्कूल छोड़ने की जानकारी
पहली लहर में विद्यालय खुलने केबाद 50 फीसदी विद्यार्थियों स्कूल बुलाया गया था। इसके लिए अलग-अलग दिन आवंटित किए गए थे। स्कूल न आने वाले बच्चों के घर सूचना दी गई, लेकिन अभिभावकों ने बच्चों को भेजने से इनकार कर दिया। उसके बाद शिक्षकों ने अभिभावकों से संपर्क किया। रैंडम सर्वे में छात्राओं की यह संख्या सामने आई है। विभागीय अधिकारियों ने इसकी सत्यापित रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी है, लेकिन छात्राओं को दोबारा स्कूल बुलाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं।
ड्रॉपआउट छात्राओं को चलेगा विशेष अभियान, पांच टीमें गठित
स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं को दोबारा बुलाने के लिए शिक्षा विभाग ने तैयारी कर ली है। बीएसए ने सभी ब्लॉक के एसआरपी और कुछ शिक्षकों के साथ बैठक कर ड्रॉपआउट छात्राओं की जानकारी ली। उनके अभिभावकों को समझाने की बात कही। उन्होंने कहा कि कक्षा 6 से 8 और कक्षा एक से पांच तक के स्कूल खुलने के बाद छात्राओं का सत्यापित डाटा मिल जाएगा। बैठक में पांच टीमों का गठन किया गया। इसमें एक टीम नगर क्षेत्र और चार टीमें देहात क्षेत्र में करेगी। हर टीम में चार सदस्य होंगे। एक एसआरपी और तीन शिक्षक शामिल होंगे।
छात्राओं को दोबारा बुलाएंगे
ड्रॉपआउट छात्राओं को दोबारा स्कूल बुलाने के लिए पांच टीम बनाई हैं। इसमें 20 शिक्षक काम करेंगे। प्रत्येक ब्लॉक के लिए एक टीम रहेगी। स्कूल खुलने के बाद ड्रॉपआउट छात्राओं को दोबारा मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
बृजभूषण चौधरी, बीएसए
विज्ञापन
गाजियाबाद। कोरोना काल सेहत के साथ-साथ परिषदीय स्कूलों की छात्राओं के कॅरिअर के लिए भी नुकसानदायक साबित हुआ। इस दौरान 10 हजार से अधिक लड़कियों का स्कूल छूट गया। यह सरकार की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना के लिए एक आइना है। स्कूल बंद होने के दौरान केवल 15 फीसदी छात्राओं ने ही ऑनलाइन क्लासेज कीं। बाकी 85 फीसदी छात्राएं इससे वंचित रहीं। शिक्षकों ने अभिभावकों से संपर्क किया तो उन्होंने भी छात्राओं को स्कूल भेजने से मना कर दिया। अब विभाग के सामने विद्यालय छोड़ने वाली छात्राओं को प्रवेश दिलाना बड़ी चुनौती है।
बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालय में एक लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, केवल 40 फीसदी छात्र-छात्राओं ने ही ऑनलाइन कक्षाओं में पढ़ाई की। बाकी छात्र-छात्राएं संसाधनों के अभाव में वंचित रहे। शिक्षा विभाग ने उन्हें दूरदर्शन व अन्य माध्यमों से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली। 40 फीसदी में से 25 फीसदी छात्र और 15 फीसदी छात्राएं रहीं। बिगड़े आर्थिक हालात के चलते भी अभिभावकों न्रे बेटियों को पढ़ाना बंद कर दिया। अब ये लड़कियां घर के कार्यों में व्यस्त हैं।
विज्ञापन
स्कूल खुलने पर और घटेगी संख्या
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि पंजीकृत एक लाख विद्यार्थियों में 49 हजार छात्राएं हैं। इसमें से 10 से 12 हजार छात्राओं का नाम स्कूलों में तो चल रहा है, लेकिन कोरोना के पहली लहर से ही उनका पढ़ाई से कोई लेना-देना नहीं है। फरवरी-मार्च में स्कूल खुले तो छात्र-छात्राओं को बुलाने के लिए शिक्षकों ने संपर्क किया था। करीब 10 हजार से अधिक छात्राओं के अभिभावकों ने उन्हें स्कूल भेजने से ही मना कर दिया था। अब 23 अगस्त से कक्षा 6 से 8 और एक सितंबर से कक्षा एक से पांच तक के स्कूल खोलने की तैयारी है। शिक्षकों का कहना है कि स्कूल खुलने के बाद छात्राओं की संख्या और कम हो सकती है। क्योंकि पंजीकरण का डाटा पूर्व का है।
विज्ञापन
ये है स्थिति
परिषदीय स्कूल : 455
पंजीकृत विद्यार्थी : 1,00000
छात्र : 51,000
छात्राएं : 49,000
ऑनलाइन कक्षा : 40 फीसदी ने ली
ऑनलाइन कक्षा (छात्र) : 25 फीसदी ने ली
ऑनलाइन कक्षा (छात्राएं) : 15 फीसदी ने ली
स्कूल छोड़ने वाली छात्राएं : 10,000
ऐसे हुई छात्राओं के स्कूल छोड़ने की जानकारी
पहली लहर में विद्यालय खुलने केबाद 50 फीसदी विद्यार्थियों स्कूल बुलाया गया था। इसके लिए अलग-अलग दिन आवंटित किए गए थे। स्कूल न आने वाले बच्चों के घर सूचना दी गई, लेकिन अभिभावकों ने बच्चों को भेजने से इनकार कर दिया। उसके बाद शिक्षकों ने अभिभावकों से संपर्क किया। रैंडम सर्वे में छात्राओं की यह संख्या सामने आई है। विभागीय अधिकारियों ने इसकी सत्यापित रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी है, लेकिन छात्राओं को दोबारा स्कूल बुलाने के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं।
ड्रॉपआउट छात्राओं को चलेगा विशेष अभियान, पांच टीमें गठित
स्कूल छोड़ने वाली छात्राओं को दोबारा बुलाने के लिए शिक्षा विभाग ने तैयारी कर ली है। बीएसए ने सभी ब्लॉक के एसआरपी और कुछ शिक्षकों के साथ बैठक कर ड्रॉपआउट छात्राओं की जानकारी ली। उनके अभिभावकों को समझाने की बात कही। उन्होंने कहा कि कक्षा 6 से 8 और कक्षा एक से पांच तक के स्कूल खुलने के बाद छात्राओं का सत्यापित डाटा मिल जाएगा। बैठक में पांच टीमों का गठन किया गया। इसमें एक टीम नगर क्षेत्र और चार टीमें देहात क्षेत्र में करेगी। हर टीम में चार सदस्य होंगे। एक एसआरपी और तीन शिक्षक शामिल होंगे।
छात्राओं को दोबारा बुलाएंगे
ड्रॉपआउट छात्राओं को दोबारा स्कूल बुलाने के लिए पांच टीम बनाई हैं। इसमें 20 शिक्षक काम करेंगे। प्रत्येक ब्लॉक के लिए एक टीम रहेगी। स्कूल खुलने के बाद ड्रॉपआउट छात्राओं को दोबारा मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।
बृजभूषण चौधरी, बीएसए