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दो हजार की नौकरी छोड़ शुरू किया खुद का उद्योग
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दो हजार की नौकरी करने वाली रचना ने 12 महिलाओं को दिया रोजगार
गाजियाबाद। दो हजार रुपये की नौकरी करने वाली लोनी के सादाबाद डूंगरावली निवासी रचना 12 महिलाओं को रोजगार दे रही है। आत्मनिर्भर होने का यह सफर रचना ने सिर्फ दो साल में तय किया है। पहले वह खुद बिंदी बनाती थी। अब दूसरी महिलाएं उसके लिए बिंदी बनाती हैं। दूसरों को रोजगार देने के अलावा रचना खुद 45 हजार रुपये महीना कमा रही है। दिल्ली-एनसीआर की महिलाओं के माथे पर रचना की बिंदी सज रही है। इस कामयाबी को महात्मा गांधी पुरस्कार योजना के तहत मंडल में दूसरे पुरस्कार से नवाजा गया है। 12 हजार रुपये का नकद इनाम दिया है।
ऐसे हुई शुरूआत
रचना ने बिंदी लोनी स्थित बिंदी बनाने की एक फैक्ट्री में दो हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी की। वहां बिंदी तैयार करना सीखा। उत्पादन की बारीकियों को समझा। दो हजार की नौकरी में मुश्किल हो रही थी। पति मनीष एक मेडिकल स्टोर पर काम करते हैं। दोनों की आमदनी में घर का गुजारा मुश्किल था। रचना ने जिला ग्रामोद्योग कार्यालय के अधिकारियों से संपर्क किया और ब्याज मुक्त मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के लिए आवेदन किया। रचना को एक बैंक से योजना के तहत ढाई लाख रुपये का मिल गया। उससे मशीनें, पावर प्रेस कटिंग मशीन, डाई, कच्चा माल खरीदकर काम की शुरूआत की।
100 डिब्बे करते हैं रोज तैयार
रचना ने दो साल में कड़ी मेहनत के बाद अपने उद्योग को आगे बढ़ाया। अब उनके साथ 12 महिला कारीगर कार्य कर रही हैं। इकाई में प्रतिदिन 100 बिंदी के डिब्बे तैयार किए जाते हैं। इन पर एक हजार रुपये की लागत आती है जबकि बाजार में एक डिब्बा करीब 1200 रुपये का बिकता है। 2018-19 में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत बिंदी निर्माण उद्योग के लिए रचना के उद्योग का चयन किया गया है। बिंदी के डिब्बे दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ और आसपास में सप्लाई किए जाते हैं।
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शुरू से ही अपना काम शुरू करने का मन था। नौकरी में मिलने वाले वेतन से घर का गुजारा मुश्किल था। पति का मेरे निर्णय में सहयोग मिला। उनके साथ से अपने उद्योग को आगे बढ़ाया है।
- रचना, उद्यमी
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गाजियाबाद। दो हजार रुपये की नौकरी करने वाली लोनी के सादाबाद डूंगरावली निवासी रचना 12 महिलाओं को रोजगार दे रही है। आत्मनिर्भर होने का यह सफर रचना ने सिर्फ दो साल में तय किया है। पहले वह खुद बिंदी बनाती थी। अब दूसरी महिलाएं उसके लिए बिंदी बनाती हैं। दूसरों को रोजगार देने के अलावा रचना खुद 45 हजार रुपये महीना कमा रही है। दिल्ली-एनसीआर की महिलाओं के माथे पर रचना की बिंदी सज रही है। इस कामयाबी को महात्मा गांधी पुरस्कार योजना के तहत मंडल में दूसरे पुरस्कार से नवाजा गया है। 12 हजार रुपये का नकद इनाम दिया है।
ऐसे हुई शुरूआत
रचना ने बिंदी लोनी स्थित बिंदी बनाने की एक फैक्ट्री में दो हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी की। वहां बिंदी तैयार करना सीखा। उत्पादन की बारीकियों को समझा। दो हजार की नौकरी में मुश्किल हो रही थी। पति मनीष एक मेडिकल स्टोर पर काम करते हैं। दोनों की आमदनी में घर का गुजारा मुश्किल था। रचना ने जिला ग्रामोद्योग कार्यालय के अधिकारियों से संपर्क किया और ब्याज मुक्त मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के लिए आवेदन किया। रचना को एक बैंक से योजना के तहत ढाई लाख रुपये का मिल गया। उससे मशीनें, पावर प्रेस कटिंग मशीन, डाई, कच्चा माल खरीदकर काम की शुरूआत की।
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100 डिब्बे करते हैं रोज तैयार
रचना ने दो साल में कड़ी मेहनत के बाद अपने उद्योग को आगे बढ़ाया। अब उनके साथ 12 महिला कारीगर कार्य कर रही हैं। इकाई में प्रतिदिन 100 बिंदी के डिब्बे तैयार किए जाते हैं। इन पर एक हजार रुपये की लागत आती है जबकि बाजार में एक डिब्बा करीब 1200 रुपये का बिकता है। 2018-19 में मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के तहत बिंदी निर्माण उद्योग के लिए रचना के उद्योग का चयन किया गया है। बिंदी के डिब्बे दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ और आसपास में सप्लाई किए जाते हैं।
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शुरू से ही अपना काम शुरू करने का मन था। नौकरी में मिलने वाले वेतन से घर का गुजारा मुश्किल था। पति का मेरे निर्णय में सहयोग मिला। उनके साथ से अपने उद्योग को आगे बढ़ाया है।
- रचना, उद्यमी