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कोरोना काल में दोगुना बढ़ी साइबर ठगी, 1467 को बनाया शिकार
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कोरोना काल में दोगुना बढ़ी साइबर ठगी, 1467 को बनाया शिकार
गाजियाबाद। कोरोना काल में जिले में साइबर ठगी करीब दोगुना बढ़ गई। वर्क फ्रॉम होम होने और सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ने का फायदा साइबर ठगों ने उठाया है। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर जैसे ही लोगों की निर्भरता बढ़ी, ठगों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी। फेसबुक पर फेक आईडी बनाने का मामला हो या फिर एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर ठगी का। कई तरीकों से साइबर ठगों ने अपना जाल बिछाया और लोग उसमें फंसते चले गए। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के चलते घरों में कैद लोगों का वक्त सोशल मीडिया पर बीता। इस दौरान लापरवाही बरतने पर मामले बढ़े हैं।
जिले में यूं तो साइबर अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कोरोना काल में साइबर अपराधियों की रफ्तार दोगुनी हो गई। मार्च से मई की बात करें तो वर्ष 2019 के सामान्य माहौल में साइबर ठगी के 759 मामले सामने आए। लेकिन पिछले साल कोरोनाकाल शुरू होने पर इन तीन महीनों में साइबर ठगी के मामले बढ़कर 922 हो गए। हैरत की बात यह है कि इस साल यह आंकड़ा 1467 पर पहुंच गया। तमाम कोशिशों के बाद गाजियाबाद पुलिस ने 75 आरोपी गिरफ्तार भी किए। लेकिन ठगी का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा।
2019 की तुलना में कोरोना काल के दौरान बैंकिंग फ्रॉड का आंकड़ा भी बढ़ा। मार्च से मई के बीच 2019 में बैकिंग फ्रॉड के 142 मामले आए तो 2020 में 246 और इस वर्ष 546 मामले दर्ज हुए। इसी तरह 2019 में तीन माह के भीतर एटीएम से निकासी से 145 मामले सामने आए तो इस साल 186 घटनाएं पुलिस के पास पहुंचीं।
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सोशल मीडिया को बनाया हथियार
साइबर जालसाजों ने लोगों को ठगने के लिए सोशल मीडिया को भी हथियार बनाया। 2019 में मार्च से मई तक फेसबुक अकाउंट हैक और फेक आईडी के 58 मामले सामने आए, जबकि पिछले साल 185 मामले सामने आए। इस साल तीन महीनों में फेसबुक अकाउंट हैक व फेक आईडी के 91 मामले पुलिस के पास पहुंचे।
साढ़े चार करोड़ की ठगी, रिकवरी 6 फीसदी भी नहीं
साइबर अपराधियों ने जनवरी से जून के बीच करीब 2850 लोगों को अपना शिकार बनाया। उन्हें साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई। लेकिन, पुलिस छह फीसदी रकम भी रिकवर नहीं कर सकी। साइबर से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक ठगी का शिकार हुए 54 लोगों के 25 लाख 69 हजार 402 रुपये वापस कराए गए।
मेवाती समेत अन्य गिरोह सक्रिय, स्थानीय गैंग्स ने भी बढ़ाई टेंशन
साइबर सेल के नोडल अधिकारी डीएसपी अभय कुमार मिश्र ने बताया कि साइबर ठगी करने वाले गैंग अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। गाजियाबाद में ओएलएक्स पर ठगी के अधिकांश मामले मेवाती गैंग द्वारा किए गए। इसके अलावा सिम ब्लॉक बताकर, पॉलिसी रिन्यू का झांसा देकर ठगी के मामले जामताड़ा गैंग द्वारा किए गए। कार्ड क्लोनिंग में रामानियन गैंग के अलावा प्रतापगढ़ व गोंडा के गैंग्स की भूमिका सामने आई है। ईमेल स्कूपिंग (मिलती-जुलती मेल आईडी बनाकर ठगी) में नाइजीरियन गैंग सक्रिय है। एक नाइजीरियन को साइबर सेल द्वारा गिरफ्तार करके जेल भी भेजा गया।
20 फर्जी कॉल सेंटर पकड़े, 75 गिरफ्तार
मेवाती, नाइजीरियन, जामताड़ा व अन्य गैंग की तुलना में स्थानीय गैंग्स ने पुलिस को टेंशन में रखा। गाजियाबाद साइबर अपराधियों का गढ़ बनता जा रहा है। छह माह में पुलिस ने जिले में 20 फर्जी कॉल सेंटरों का खुलासा किया। इसके अलावा अन्य तरीके से साइबर ठगी कर रहे सात अन्य मामलों का भी खुलासा किया। साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार के मुताबिक इस वर्ष जनवरी से जून माह तक साइबर ठगी करने वाले 75 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
साइबर अपराध 2021 2020 2019
बैंक/क्रेडिड कार्ड 546 246 142
एटीएम विड्रॉ 186 65 242
ओएलएक्स 67 51 39
नौकरी 23 09 11
लोन 34 15 04
पेटीएम 14 64 00
फेसबुक 91 185 57
व्हॉट्सएप 66 33 11
जीमेल 11 18 08
इंस्टाग्राम 32 16 02
ट्विटर 10 16 01
इंटरनेट पर निर्भरता और असावधानी से बढ़े मामले
कोरोनाकाल में लॉक डाउन व कोरोना कर्फ्यू लगने के कारण लोगों को घरों में कैद होना पड़ा। वर्क फ्रॉम होम का कल्चर भी शुरू हुआ। कुल मिलाकर लोगों की इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ी। रोजमर्रा से जुड़े अधिकांश कार्यों के लिए ऑनलाइन सेवा का सहारा लिया गया। इसमें लोगों ने असावधानी भी बरती। साइबर ठगों ने इसी माहौल का फायदा उठाया। स्थानीय स्तर पर भी गैंग सक्रिय हो गए हैं, जो पुलिस के लिए सिरदर्द बन रहे हैं। लोगों को सावाधानी बरतते हुए सोशल मीडिया व इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल करना चाहिए।
- कर्मवीर सिंह, साइबर एक्सपर्ट- मेरठ जोन पुलिस
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गाजियाबाद। कोरोना काल में जिले में साइबर ठगी करीब दोगुना बढ़ गई। वर्क फ्रॉम होम होने और सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ने का फायदा साइबर ठगों ने उठाया है। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर जैसे ही लोगों की निर्भरता बढ़ी, ठगों ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी। फेसबुक पर फेक आईडी बनाने का मामला हो या फिर एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर ठगी का। कई तरीकों से साइबर ठगों ने अपना जाल बिछाया और लोग उसमें फंसते चले गए। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू के चलते घरों में कैद लोगों का वक्त सोशल मीडिया पर बीता। इस दौरान लापरवाही बरतने पर मामले बढ़े हैं।
जिले में यूं तो साइबर अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कोरोना काल में साइबर अपराधियों की रफ्तार दोगुनी हो गई। मार्च से मई की बात करें तो वर्ष 2019 के सामान्य माहौल में साइबर ठगी के 759 मामले सामने आए। लेकिन पिछले साल कोरोनाकाल शुरू होने पर इन तीन महीनों में साइबर ठगी के मामले बढ़कर 922 हो गए। हैरत की बात यह है कि इस साल यह आंकड़ा 1467 पर पहुंच गया। तमाम कोशिशों के बाद गाजियाबाद पुलिस ने 75 आरोपी गिरफ्तार भी किए। लेकिन ठगी का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा।
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2019 की तुलना में कोरोना काल के दौरान बैंकिंग फ्रॉड का आंकड़ा भी बढ़ा। मार्च से मई के बीच 2019 में बैकिंग फ्रॉड के 142 मामले आए तो 2020 में 246 और इस वर्ष 546 मामले दर्ज हुए। इसी तरह 2019 में तीन माह के भीतर एटीएम से निकासी से 145 मामले सामने आए तो इस साल 186 घटनाएं पुलिस के पास पहुंचीं।
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सोशल मीडिया को बनाया हथियार
साइबर जालसाजों ने लोगों को ठगने के लिए सोशल मीडिया को भी हथियार बनाया। 2019 में मार्च से मई तक फेसबुक अकाउंट हैक और फेक आईडी के 58 मामले सामने आए, जबकि पिछले साल 185 मामले सामने आए। इस साल तीन महीनों में फेसबुक अकाउंट हैक व फेक आईडी के 91 मामले पुलिस के पास पहुंचे।
साढ़े चार करोड़ की ठगी, रिकवरी 6 फीसदी भी नहीं
साइबर अपराधियों ने जनवरी से जून के बीच करीब 2850 लोगों को अपना शिकार बनाया। उन्हें साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई। लेकिन, पुलिस छह फीसदी रकम भी रिकवर नहीं कर सकी। साइबर से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक ठगी का शिकार हुए 54 लोगों के 25 लाख 69 हजार 402 रुपये वापस कराए गए।
मेवाती समेत अन्य गिरोह सक्रिय, स्थानीय गैंग्स ने भी बढ़ाई टेंशन
साइबर सेल के नोडल अधिकारी डीएसपी अभय कुमार मिश्र ने बताया कि साइबर ठगी करने वाले गैंग अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। गाजियाबाद में ओएलएक्स पर ठगी के अधिकांश मामले मेवाती गैंग द्वारा किए गए। इसके अलावा सिम ब्लॉक बताकर, पॉलिसी रिन्यू का झांसा देकर ठगी के मामले जामताड़ा गैंग द्वारा किए गए। कार्ड क्लोनिंग में रामानियन गैंग के अलावा प्रतापगढ़ व गोंडा के गैंग्स की भूमिका सामने आई है। ईमेल स्कूपिंग (मिलती-जुलती मेल आईडी बनाकर ठगी) में नाइजीरियन गैंग सक्रिय है। एक नाइजीरियन को साइबर सेल द्वारा गिरफ्तार करके जेल भी भेजा गया।
20 फर्जी कॉल सेंटर पकड़े, 75 गिरफ्तार
मेवाती, नाइजीरियन, जामताड़ा व अन्य गैंग की तुलना में स्थानीय गैंग्स ने पुलिस को टेंशन में रखा। गाजियाबाद साइबर अपराधियों का गढ़ बनता जा रहा है। छह माह में पुलिस ने जिले में 20 फर्जी कॉल सेंटरों का खुलासा किया। इसके अलावा अन्य तरीके से साइबर ठगी कर रहे सात अन्य मामलों का भी खुलासा किया। साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार के मुताबिक इस वर्ष जनवरी से जून माह तक साइबर ठगी करने वाले 75 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
साइबर अपराध 2021 2020 2019
बैंक/क्रेडिड कार्ड 546 246 142
एटीएम विड्रॉ 186 65 242
ओएलएक्स 67 51 39
नौकरी 23 09 11
लोन 34 15 04
पेटीएम 14 64 00
फेसबुक 91 185 57
व्हॉट्सएप 66 33 11
जीमेल 11 18 08
इंस्टाग्राम 32 16 02
ट्विटर 10 16 01
इंटरनेट पर निर्भरता और असावधानी से बढ़े मामले
कोरोनाकाल में लॉक डाउन व कोरोना कर्फ्यू लगने के कारण लोगों को घरों में कैद होना पड़ा। वर्क फ्रॉम होम का कल्चर भी शुरू हुआ। कुल मिलाकर लोगों की इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ी। रोजमर्रा से जुड़े अधिकांश कार्यों के लिए ऑनलाइन सेवा का सहारा लिया गया। इसमें लोगों ने असावधानी भी बरती। साइबर ठगों ने इसी माहौल का फायदा उठाया। स्थानीय स्तर पर भी गैंग सक्रिय हो गए हैं, जो पुलिस के लिए सिरदर्द बन रहे हैं। लोगों को सावाधानी बरतते हुए सोशल मीडिया व इंटरनेट सेवा का इस्तेमाल करना चाहिए।
- कर्मवीर सिंह, साइबर एक्सपर्ट- मेरठ जोन पुलिस