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विपक्ष के कारोबार के कीचड़ में खिल गया कमल
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विपक्ष के कारोबार के कीचड़ में खिल गया कमल
गाजियाबाद। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में कमल के खिलने में जिला पंचायत सदस्यों के कारोबार की भी भूमिका रही है। कारोबार के काले चिट्ठा का फायदा उठाकर सदस्यों पर दबाव बनाया गया। एक सदस्य का ईंट का भट्ठा नियम का हवाला देकर बंद करा दिया गया। सपा और रालोद के पदाधिकारी आरोप लगाते रहे कि उनके सदस्यों को धमकाया जा रहा है।
शनिवार को नामांकन के दिन वार्ड-6 से सदस्य मीनू यादव के पति विकास यादव के ईंट के भट्टे पर तहसीलदार फायर बिग्रेड की गाड़ी लेकर पहुंचे। निरीक्षण के बाद पांच भट्ठे बंद कराए गए थे, उनमें से एक विकास यादव का था। आरोप है कि वार्ड-4 के सदस्य को कंट्री इन होटल में बंधक बनाया गया। आरोपों को लेकर भाजपा ने कहा कि विपक्ष के पास अनुमोदक और प्रस्ताव भी नहीं बचे। इसलिए नामांकन नहीं कर पाए।
बताया गया कि कई सदस्यों के कारोबार अवैध तरीके से खड़े हुए हैं। इनमें कुछ प्रॉपर्टी डीलिंग और अवैध कब्जे कराने में शामिल हैं। डासना में ग्राम पंचायत की 200 करोड़ रुपये की संपत्ति कब्जाने में एक पंचायत सदस्य के पति का नाम आया था। हालांकि बाद में जमीन को मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद कब्जा मुक्त कराया गया। कुछ का नाम अवैध तरीके से कॉलोनी काटने में है। मोदीनगर क्षेत्र से आने वाले दो सदस्यों को मूल व्यवसाय कृषि है, लेकिन इसके साथ ही कॉलोनी काटने का भी उनका बड़ा कारोबार है, जिनके खिलाफ शिकायतों का बड़ा पुलिंदा था। दूसरी बार निर्वाचित हुए एक सदस्य पर शराब का कारोबार है। उनकी लिए मजबूरी थी कि अगर खिलाफत की गई तो उनका कारोबार दिक्कत में आ सकती है।
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दोनों तरफ थी सेटिंग
ममता त्यागी के निर्विरोध चुने जाने पर कई चर्चा हैं। कुछ विपक्षी जिला पंचायत सदस्य भाजपा नेताओं के संपर्क में थे और अपने दल से जुड़े नेताओं के भी। दोनों ही तरफ से सारी सेवाएं भी लेते रहे।
जिसकी सत्ता, अध्यक्ष उसका
जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर जिस पार्टी की सरकार है, उसके नुमाइंदे ही काबिज हो रहे हैं। 2010 से यह सिलसिला जारी है। 2010 में प्रदेश में बसपा की सरकार थी। बसपा के समर्थन से सुधा नागर निर्विरोध चुनी गईं। 2010 में सपा की सरकार आई तो सपा के समर्थन से तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य अजीत पाल त्यागी अध्यक्ष चुने गए। 2015 में सपा के प्रत्याशी नूर हसन मलिक निर्विरोध चुने गए। 2017 में सत्ता बदली। अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और नूर मलिक बहुमत साबित नहीं कर पाए। लक्ष्मी मावी को निर्विरोध चुना गया। अब ममता त्यागी निर्विरोध बनने जा रही हैं।
ममता त्यागी दूसरी बार जीतीं चुनाव
- पहली बार पंचायत सदस्य (वार्ड 14) - 2015
- दूसरी बार पंचायत सदस्य (वार्ड 14) - 2021
- पति - बसंत त्यागी, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष
- पता - गांव नानू लोनी
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गाजियाबाद। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में कमल के खिलने में जिला पंचायत सदस्यों के कारोबार की भी भूमिका रही है। कारोबार के काले चिट्ठा का फायदा उठाकर सदस्यों पर दबाव बनाया गया। एक सदस्य का ईंट का भट्ठा नियम का हवाला देकर बंद करा दिया गया। सपा और रालोद के पदाधिकारी आरोप लगाते रहे कि उनके सदस्यों को धमकाया जा रहा है।
शनिवार को नामांकन के दिन वार्ड-6 से सदस्य मीनू यादव के पति विकास यादव के ईंट के भट्टे पर तहसीलदार फायर बिग्रेड की गाड़ी लेकर पहुंचे। निरीक्षण के बाद पांच भट्ठे बंद कराए गए थे, उनमें से एक विकास यादव का था। आरोप है कि वार्ड-4 के सदस्य को कंट्री इन होटल में बंधक बनाया गया। आरोपों को लेकर भाजपा ने कहा कि विपक्ष के पास अनुमोदक और प्रस्ताव भी नहीं बचे। इसलिए नामांकन नहीं कर पाए।
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बताया गया कि कई सदस्यों के कारोबार अवैध तरीके से खड़े हुए हैं। इनमें कुछ प्रॉपर्टी डीलिंग और अवैध कब्जे कराने में शामिल हैं। डासना में ग्राम पंचायत की 200 करोड़ रुपये की संपत्ति कब्जाने में एक पंचायत सदस्य के पति का नाम आया था। हालांकि बाद में जमीन को मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद कब्जा मुक्त कराया गया। कुछ का नाम अवैध तरीके से कॉलोनी काटने में है। मोदीनगर क्षेत्र से आने वाले दो सदस्यों को मूल व्यवसाय कृषि है, लेकिन इसके साथ ही कॉलोनी काटने का भी उनका बड़ा कारोबार है, जिनके खिलाफ शिकायतों का बड़ा पुलिंदा था। दूसरी बार निर्वाचित हुए एक सदस्य पर शराब का कारोबार है। उनकी लिए मजबूरी थी कि अगर खिलाफत की गई तो उनका कारोबार दिक्कत में आ सकती है।
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दोनों तरफ थी सेटिंग
ममता त्यागी के निर्विरोध चुने जाने पर कई चर्चा हैं। कुछ विपक्षी जिला पंचायत सदस्य भाजपा नेताओं के संपर्क में थे और अपने दल से जुड़े नेताओं के भी। दोनों ही तरफ से सारी सेवाएं भी लेते रहे।
जिसकी सत्ता, अध्यक्ष उसका
जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर जिस पार्टी की सरकार है, उसके नुमाइंदे ही काबिज हो रहे हैं। 2010 से यह सिलसिला जारी है। 2010 में प्रदेश में बसपा की सरकार थी। बसपा के समर्थन से सुधा नागर निर्विरोध चुनी गईं। 2010 में सपा की सरकार आई तो सपा के समर्थन से तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य अजीत पाल त्यागी अध्यक्ष चुने गए। 2015 में सपा के प्रत्याशी नूर हसन मलिक निर्विरोध चुने गए। 2017 में सत्ता बदली। अविश्वास प्रस्ताव लाया गया और नूर मलिक बहुमत साबित नहीं कर पाए। लक्ष्मी मावी को निर्विरोध चुना गया। अब ममता त्यागी निर्विरोध बनने जा रही हैं।
ममता त्यागी दूसरी बार जीतीं चुनाव
- पहली बार पंचायत सदस्य (वार्ड 14) - 2015
- दूसरी बार पंचायत सदस्य (वार्ड 14) - 2021
- पति - बसंत त्यागी, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष
- पता - गांव नानू लोनी