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9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा
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9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष की सजा
गाजियाबाद। नौ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को विशेष न्यायालय पाक्सो कोर्ट के जज हर्षवर्धन ने 20 वर्ष की सजा सुनाई है। अदालत ने एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। घटना 27 जुलाई 2015 की है।
पाक्सो कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक उत्कर्ष वत्स ने बताया कि व्यक्ति विजयनगर में अपने परिवार के साथ रहता है। 27 जुलाई 215 को उसकी पत्नी बाजार से सब्जी लेने गई थी, जबकि उसकी नौ वर्षीय बेटी घर में थी, इस दौरान पड़ोस में रहने वाले युवक ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। बच्ची के पिता ने विजय नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
बच्ची की हिम्मत से मिली केस को मजबूती
विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि घटना के बाद बच्ची पूरी तरह से डर गई थी, वह कई दिन तक परेशान रही। इलाज के बाद सामान्य होने पर बच्ची ने पूरी घटना मजिस्ट्रेट को बताई, वही बयान अदालत में दिया। दोनों बयान एक जैसे होने के कारण ही केस की पैरवी में मजबूती मिली। गवाही में बच्ची के मां-बाप पूरी तरह से अडिग रहे और हर पेशी पर पैरवी के लिए आते थे।
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इस तरह का अपराध जघन्यतम श्रेणी में आता है। अगर अपराधी को सजा देने में उदारता बरती जाए तो समाज में गलत संदेश जाएगा। विधि का सुस्थापित सिद्धांत है कि दोष सिद्ध होने के बाद अभियुक्त को दी जाने वाली सजा और उसके द्वारा किया गए अपराध की सजा समानुपातिक होनी चाहिए।
विशेष पाक्सो कोर्ट
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गाजियाबाद। नौ वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को विशेष न्यायालय पाक्सो कोर्ट के जज हर्षवर्धन ने 20 वर्ष की सजा सुनाई है। अदालत ने एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। घटना 27 जुलाई 2015 की है।
पाक्सो कोर्ट के विशेष लोक अभियोजक उत्कर्ष वत्स ने बताया कि व्यक्ति विजयनगर में अपने परिवार के साथ रहता है। 27 जुलाई 215 को उसकी पत्नी बाजार से सब्जी लेने गई थी, जबकि उसकी नौ वर्षीय बेटी घर में थी, इस दौरान पड़ोस में रहने वाले युवक ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था। बच्ची के पिता ने विजय नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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बच्ची की हिम्मत से मिली केस को मजबूती
विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि घटना के बाद बच्ची पूरी तरह से डर गई थी, वह कई दिन तक परेशान रही। इलाज के बाद सामान्य होने पर बच्ची ने पूरी घटना मजिस्ट्रेट को बताई, वही बयान अदालत में दिया। दोनों बयान एक जैसे होने के कारण ही केस की पैरवी में मजबूती मिली। गवाही में बच्ची के मां-बाप पूरी तरह से अडिग रहे और हर पेशी पर पैरवी के लिए आते थे।
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इस तरह का अपराध जघन्यतम श्रेणी में आता है। अगर अपराधी को सजा देने में उदारता बरती जाए तो समाज में गलत संदेश जाएगा। विधि का सुस्थापित सिद्धांत है कि दोष सिद्ध होने के बाद अभियुक्त को दी जाने वाली सजा और उसके द्वारा किया गए अपराध की सजा समानुपातिक होनी चाहिए।
विशेष पाक्सो कोर्ट