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टीचर ने डांटा तो 12वीं के छात्र ने ट्रेन के आगे कूदकर दे दी जान
Fri, 27 Dec 2019 01:18 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
Published by: गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 01:18 AM IST
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विवेक
- फोटो : अमर उजाला
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प्रयोगात्मक परीक्षा में देरी से पहुंचने पर टीचर के डांटने से क्षुब्ध होकर 12वीं के छात्र ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। लालकुआं क्षेत्र निवासी छात्र कविनगर स्थित विवेकानंद सरस्वती शिशु मंदिर में 12वीं कक्षा में पढ़ता था। घटना का पता चलते ही परिजनों व स्कूल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों ने देर रात तक कोई तहरीर नहीं दी है।
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जानकारी के मुताबिक लालकुआं स्थित शंकर विहार कॉलोनी में सत्यम एंक्लेव निवासी विनोद कुमार एनएच-9 स्थित एक सोसायटी में सुरक्षा गार्ड हैं। मूलरूप से बुलदशहर निवासी विनोद कुमार के तीन बेटे बिट्टू, विकास और विवेक हैं। सबसे छोटा बेटा विवेक कुमार (17) कविनगर स्थित विवेकानंद सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में कक्षा 12 (कला संकाय) का छात्र था।
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जानकारी के मुताबिक बृहस्पतिवार को अंग्रेजी विषय की प्रयोगात्मक परीक्षा था, जो सुबह साढ़े 9 बजे शुरू होनी थी। विवेक स्कूल नहीं पहुंचा तो क्लास टीचर ने घर फोन किया, जो उसके पिता विनोद ने उठाया। इसके बाद विवेक पड़ोस में रहने वाले सहपाठी ऋषभ के साथ सुबह करीब साढ़े 10 बजे स्कूल पहुंचा।
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टीचर ने इंतजार करने को कहा, छात्र बैग उठाकर चला गया
स्कूल पहुंचने पर टीचर असेसमेंट ऑफ स्पीकिंग एंड लर्निंग की प्रयोगात्मक परीक्षा ले रही थीं। बताया जा रहा है कि देरी से आने पर टीचर ने उसे डांट दिया और इंतजार करने के लिए कहा। इसके बाद विवेक बैग उठाकर स्कूल से निकल गया। सुबह करीब 11 बजे विवेक आरडीसी फ्लाईओवर के पास रेलवे ट्रैक पर पहुंचा और ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। पता लगने पर पहुंची पुुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। वहीं, जानकारी लगने पर स्कूल प्रबंधन ने पुलिस को छात्र के बारे में जानकारी दी।
स्कूल प्रबंधन ने एकाएक बदल दिया परीक्षा का समय
विवेक के पिता विनोद का कहना है कि उनके बेटे से बताया गया था कि प्रयोगात्मक परीक्षा 26 दिसंबर को दोपहर 12 से 3 बजे के बीच होनी है। वह उसी हिसाब से तैयार था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने एकाएक परीक्षा का समय सुबह साढ़े 9 बजे बदलकर व्हॉट्सएप पर मैसेज भेज दिया। बोर्ड परीक्षा के कारण विवेक को मोबाइल से दूर रखा गया था, जिसके चलते वह मैसेज नहीं देख सका। स्कूल से फोन आने पर परीक्षा के बारे में पता चला।
विवेक को ज्यादा डांट दिया, इसलिए स्कूल से चला गया
विवेक के सहपाठी ऋषभ का कहना है कि स्कूल में अन्य छात्र भी देरी से आ रहे थे, लेकिन टीचर ने विवेक को ज्यादा डांट दिया था, जिसके कारण वह बैग उठाकर स्कूल से चला गया। पिता विनोद का कहना है कि स्कूल टीचर ने उसे डांटा-फटकारा और सही व्यवहार नहीं किया। असके चलते उनके बेटे ने आत्महत्या कर ली।
पहले से ही परेशान व गुस्से में था विवेक
क्लास टीचर विपिन सिंह का कहना है कि प्रयोगात्मक परीक्षा में कुछ छात्र नहीं पहुंचे थे, जिसके चलते उनके परिजनों को फोन किया था। विवेक के पिता को साढ़े 10 बजे फोन किया। विवेक पहुंचा तो परीक्षा शुरू हो चुकी थी, इसलिए शिक्षिका ने उसे थोड़ा इंतजार करने को कहा था। क्लास टीचर का कहना है कि विवेक पहले से ही किसी बात को लेकर गुस्सा व परेशान था और बैग उठाकर चला गया। उन्होंने बताया कि विवेक व्यवहारिक छात्र था।
फीका पड़ा क्रिसमस का जश्न, केक लेकर लौटे छात्र
25 दिसंबर को छुट्टी होने के कारण छात्रों ने 26 दिसंबर को स्कूल में क्रिसमस मनाने की योजना बनाई थी। इसके लिए वे केक आदि भी लेकर आए थे। लेकिन स्कूल के छात्र द्वारा आत्महत्या करने की सूचना मिलते ही क्रिसमस का जश्न फीका पड़ गया और छात्र केक लेकर लौट गए। वहीं, स्कूल स्टाफ में भी शोक फैल गया।
बच्चों के साथ लगातार करते रहें बातचीत, जानें मन की बात
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा. संजीव त्यागी ने बताया कि ऐसे मामलों में बच्चों पर किन-किन चीजों का दबाव था यह देखने की जरूरत है। महज डांटने भर से कोई भी आत्महत्या नहीं करता है। ऐसे मामलों में स्कूल से लेकर घर तक बच्चों का व्यवहार देखने की जरूरत है। कई जगह अभिभावकों और बच्चों के बीच कम्यूनिकेशन गैप रहता है, जो गलत है। बच्चों से लगातार बात करते रहें। उनके मन की बातों को जानें। बच्चों को सुनाने के बजाय उनकी भी सुनें। लगातार बातचीत और बच्चों के मन को जानने से इस तरह की घटनाआें को रोका जा सकता है।