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आरटीपीसीआर जांच से भी बच रहा कोरोना
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आरटीपीसीआर जांच से भी बच रहा कोरोना
गाजियाबाद। दूसरी लहर में कोरोना का नया स्ट्रेन छिपकर वार कर रहा है। सामान्य जांच में संक्रमण का पता नहीं चल रहा है। यहां तक कि आरटीपीसीआर जांच में भी संक्रमण की पुष्टि नहीं हो पा रही है। संक्रमण का पता तब चल रहा है जब वह फेफड़ों को जकड़ ले रहा है। लगातार ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जब इसकी पुष्टि फेफड़ों में संक्रमण फैलने के बाद हो रही है वह भी जब मरीज आरटीपीसीआर के साथ सीने का सीटी स्कैन करा रहा है।
अप्रैल महीने में संक्रमण तेजी से बढ़ा है। 25 निजी अस्पतालों में आईसीयू के बेड भरे हुए हैं। चिकित्सक कहते हैं कि इनमें से करीब 15 से 20 फीसदी मरीज ऐसे हैं जिनकी शुरुआत में रिपोर्ट सामान्य आई थी। ऐसे मरीजों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि उनकी तबीयत अचानक से बिगड़ती है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है। यही कारण है कि जिले भर में आईसीयू के बेड भरे जा रहे हैं, और लोगों को बेड मिलने में भी परेशानी हो रही है।
नए तरहकी चुनौती
दूसरी लहर में यह नई तरीके की चुनौती है। वायरस शरीर में बहुत ही छिपकर काम कर रहा है। कई बार आरटीपीसीआर जांच कराने पर रिपोर्ट निगेटिव आती है। मरीज भी स्वस्थ दिखाई पड़ता है लेकिन चार-छह दिन के बाद अचानक से मरीज की तबीयत बिगड़ती है तो सीटी स्कैन कराने पर पता चलता है कि संक्रमण फेफड़ों में फैल चुका है। ऐसे में अगर जरा भी लक्षण दिखाई पड़ता है तो आरटीपीसीआर की रिपोर्ट निगेटिव आने पर सीटी स्कैन जरूर कराएं। - डॉ. आशीष अग्रवाल, वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ
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बुखार के बाद जरूर कराएं सीटी स्कैन
शुरुआत में सारी जांच रिपोर्ट निगेटिव आती है। यहां तक की कुछ मामलों में यह भी देखा गया कि पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल की जांच करते हैं तो वो भी 97-98 तक आता है लेकिन जब चेस्ट का सीटी कराते हैं तो पता चलता है कि संक्रमण अच्छा खासा फैसला हुआ है। इसलिए मेरी सलाह है कि बुखार आने के बाद छाती का सीटी स्कैन जरूर कराएं। - डॉ. आरसी गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन -संयुक्त अस्पताल
केस-1- काला पत्थर इंदिरापुरम निवासी 55 वर्षीय व्यक्ति को बीते एक सप्ताह से हल्की खांसी और बुखार की शिकायत थी। दो दिन के बाद उन्होंने रैपिड एंटीजन टेस्ट कराया, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद उन्होंने आरटीपीसीआर से जांच कराई तो वह भी निगेटिव आई। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर चिकित्सक ने सीने का सीटी स्कैन कराने को कहा। सीटी स्कैन में पता चला कि संक्रमण फेफड़े के काफी हिस्से को जकड़ चुका है।
केस-2- गोविंदपुरम निवासी 40 वर्षीय कारोबारी की फैक्टरी के श्रमिक कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव आए तो उन्होंने स्वयं को भी आइसोलेट कर लिया। एहतियात के तौर पर उन्होंने कोरोना की जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद उन्होंने सामान्य रूप से अपना कामकाज शुरू कर दिया लेकिन दो दिन पहले उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्होंने आरटीपीसीआर जांच कराई। साथ में चिकित्सक की सलाह पर सीने का सीटी स्कैन भी करा लें। रिपोर्ट आई तो पता चला कि इंफेक्शन 25 प्रतिशत तक फैल चुका है।
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गाजियाबाद। दूसरी लहर में कोरोना का नया स्ट्रेन छिपकर वार कर रहा है। सामान्य जांच में संक्रमण का पता नहीं चल रहा है। यहां तक कि आरटीपीसीआर जांच में भी संक्रमण की पुष्टि नहीं हो पा रही है। संक्रमण का पता तब चल रहा है जब वह फेफड़ों को जकड़ ले रहा है। लगातार ऐसे मामले बढ़ रहे हैं जब इसकी पुष्टि फेफड़ों में संक्रमण फैलने के बाद हो रही है वह भी जब मरीज आरटीपीसीआर के साथ सीने का सीटी स्कैन करा रहा है।
अप्रैल महीने में संक्रमण तेजी से बढ़ा है। 25 निजी अस्पतालों में आईसीयू के बेड भरे हुए हैं। चिकित्सक कहते हैं कि इनमें से करीब 15 से 20 फीसदी मरीज ऐसे हैं जिनकी शुरुआत में रिपोर्ट सामान्य आई थी। ऐसे मरीजों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि उनकी तबीयत अचानक से बिगड़ती है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखना पड़ रहा है। यही कारण है कि जिले भर में आईसीयू के बेड भरे जा रहे हैं, और लोगों को बेड मिलने में भी परेशानी हो रही है।
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नए तरहकी चुनौती
दूसरी लहर में यह नई तरीके की चुनौती है। वायरस शरीर में बहुत ही छिपकर काम कर रहा है। कई बार आरटीपीसीआर जांच कराने पर रिपोर्ट निगेटिव आती है। मरीज भी स्वस्थ दिखाई पड़ता है लेकिन चार-छह दिन के बाद अचानक से मरीज की तबीयत बिगड़ती है तो सीटी स्कैन कराने पर पता चलता है कि संक्रमण फेफड़ों में फैल चुका है। ऐसे में अगर जरा भी लक्षण दिखाई पड़ता है तो आरटीपीसीआर की रिपोर्ट निगेटिव आने पर सीटी स्कैन जरूर कराएं। - डॉ. आशीष अग्रवाल, वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ
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बुखार के बाद जरूर कराएं सीटी स्कैन
शुरुआत में सारी जांच रिपोर्ट निगेटिव आती है। यहां तक की कुछ मामलों में यह भी देखा गया कि पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल की जांच करते हैं तो वो भी 97-98 तक आता है लेकिन जब चेस्ट का सीटी कराते हैं तो पता चलता है कि संक्रमण अच्छा खासा फैसला हुआ है। इसलिए मेरी सलाह है कि बुखार आने के बाद छाती का सीटी स्कैन जरूर कराएं। - डॉ. आरसी गुप्ता, वरिष्ठ फिजीशियन -संयुक्त अस्पताल
केस-1- काला पत्थर इंदिरापुरम निवासी 55 वर्षीय व्यक्ति को बीते एक सप्ताह से हल्की खांसी और बुखार की शिकायत थी। दो दिन के बाद उन्होंने रैपिड एंटीजन टेस्ट कराया, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद उन्होंने आरटीपीसीआर से जांच कराई तो वह भी निगेटिव आई। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर चिकित्सक ने सीने का सीटी स्कैन कराने को कहा। सीटी स्कैन में पता चला कि संक्रमण फेफड़े के काफी हिस्से को जकड़ चुका है।
केस-2- गोविंदपुरम निवासी 40 वर्षीय कारोबारी की फैक्टरी के श्रमिक कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव आए तो उन्होंने स्वयं को भी आइसोलेट कर लिया। एहतियात के तौर पर उन्होंने कोरोना की जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद उन्होंने सामान्य रूप से अपना कामकाज शुरू कर दिया लेकिन दो दिन पहले उनकी तबीयत बिगड़ी तो उन्होंने आरटीपीसीआर जांच कराई। साथ में चिकित्सक की सलाह पर सीने का सीटी स्कैन भी करा लें। रिपोर्ट आई तो पता चला कि इंफेक्शन 25 प्रतिशत तक फैल चुका है।