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माया-नसीमुद्दीन की जंग में हिला गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजियाबाद
Updated Fri, 12 May 2017 12:33 AM IST
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मायावती
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बसपा सुप्रीमो मायावती और नसीमुद्दीन सिद्दीकी की जंग के बाद जहां पूरे यूपी में राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है, वहीं गाजियाबाद भी इससे अछूता नहीं रहा। माया और नसीमुद्दीन के बीच वार्ता का जो ऑडियो टेप सामने आया है, उसमें गाजियाबाद की तीन विधानसभाओं का हिसाब-किताब मांगा जा रहा है।
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स्टिंग के बाद से पार्टी की जिला इकाई में हड़कंप मच गया और पदाधिकारियों ने चुप्पी साथ ली है, यहां तक कि ऑडियो टेप में जिक्र होने के बावजूद बसपा की ओर से प्रत्याशी बनाए गए दो पूर्व विधायकों ने भी चुप्पी साध ली है।
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ऑडियो टेप में गाजियाबाद की साहिबाबाद, लोनी और मोदीनगर विधानसभा के प्रत्याशियों का हिसाब-किताब बाकी होने की बात मायावती कर रही हैं। इस मामले में मुरादनगर से पूर्व विधायक और पिछले विधानसभा चुनाव में मोदीनगर से बसपा प्रत्याशी रहे वहाब चौधरी ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
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लोनी से पूर्व विधायक और बसपा प्रत्याशी रहे जाकिर अली ने भी कुछ नहीं कहा। साहिबाबाद विधानसभा से प्रत्याशी बनाए गए जलालु्दीन सिद्दीकी ही सामने आए हैं, जिन्होंने नसीमुद्दीन सिद्दीकी का साथ देते हुए पार्टी छोड़ दी है। उन्होंने बसपा को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बताया है।
बसपा से निकाले गए नेताओं से साधा निशाना
पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा से प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद ऐन मौके पर पार्टी से निकाले गए पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा ने कहा कि नसीमु्द्दीन सिद्दीकी रोज फोन कर पैसों की मांग कर टार्चर करते थे। जो आरोप मैंने तब लगाए थे, आज सही साबित हुए।
पैसे नहीं दे पाने पर नसीमुद्दीन ने पार्टी से बाहर कराया था। उधर, बसपा से राज्यसभा सांसद और पार्टी महासचिव रहे नरेंद्र कश्यप को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। उन्होंने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। बुरे नतीजों के बाद इसका बुरा असर ही पड़ेगा।
जिस मकसद को लेकर बसपा बनी थी, दलित और पिछड़ाें को उससे उम्मीदें थीं, उन लोगों को निश्चित ही इससे ठेस पहुंची है। पार्टी में रहते हुए किसी को बोलने का अधिकार नहीं है, शायद इसीलिए सब लोग निकलने के बाद बोलते है।