#LadengeCoronaSe : ये हैं संकट के सिपाही, ऑक्सीजन का लंगर लगाकर दे रहे हैं सांसों का दान
- संक्रमित होने के बाद भी कर रहे लोगों का इलाज
- उखड़ती सांसों को थामने की कामयाब कोशिश
- महामारी के दौर में जरूरत की खाई पाटने का काम कर रहे हैं कोरोना योद्धा
विस्तार
कोरोना संक्रमण के दौरान दहशत के बीच जरूरत की खाई को पाटने का काम जिले के कोरोना योद्धा बखूबी कर रहे हैं। कोई अकेले दम पर संक्रमित बीमार लोगों की सेवा में लगा है तो किसी संगठन के तमाम कार्यकर्ता कोरोना से उखड़ती सांसों को थामने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। परिवार से अधिक इन कोरोना योद्धाओं का ध्यान सिर्फ और सिर्फ लोगों की जान बचाने पर है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही कोरोना योद्धाओं की कहानी..
5000 से अधिक जरूरतमंद लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध करा चुका है खालसा इंटरनेशनल
खालसा हेल्प इंटरनेशनल के अध्य्क्ष व इंदिरापुरम के ज्ञान खंड - चार स्थित गुरुद्वारा सभा के प्रधान गुरुप्रीत सिंह रम्मी ने ऑक्सीजन के लिए मचे हाहाकार के बीच हर तीमारदार की मदद शुरू की। उनकी संस्था ने 22 अप्रैल की रात 11 बजे से ऑक्सीजन लंगर की शुरुआत की। गुरप्रीत सिंह रम्मी का कहना है कि अब तक करीब पांच हजार लोगों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई गई है। लोगों को किट के जरिए उनकी कार में ही या कुर्सी पर बैठाकर ऑक्सीजन दी जाती है। जिनके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर 70 से कम हो रहा है उन्हीं लोगों को ऑक्सीजन दी जा रही है। इसमें दिल्ली व अन्य स्थानों से संस्था से जुड़े लोग ऑक्सीजन गैस सिलिंडर की व्यवस्था कर रहे हैं। परिवार से दूर रहकर उनके साथ हर कार्यकर्ता 10 घंटे से अधिक काम कर रहा है।
डॉ. आरसी गुप्ता : परिवार के साथ खुद भी हुए संक्रमित फिर भी जारी है लोगों का इलाज
संजयनगर संयुक्त अस्पताल को कोविड एल-2 अस्पताल बनाने के बाद फरवरी से यहां कोरोना के मरीज भर्ती हैं। पिछले साल घर को भूलकर मरीजों की सेवा करने वाले वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरसी गुप्ता पर एल-2 अस्पताल की जिम्मेदारी थी। जनवरी से अब तक करीब 700 मरीजों को ठीक कर चुके डॉ. गुप्ता पिछले सप्ताह खुद कोरोना संक्रमित हो गए। इनके परिवार में पत्नी, बेटी, दामाद और भाई भी कोरोना संक्रमित हैं। अपने इलाज के साथ सभी का इलाज डॉ. गुप्ता कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि संक्रमित होने के बाद बजाय छुट्टी पर जाने के वो अपने मरीजों के इलाज में जुटे हुए हैं।
उन्होंने बताया कि पूरी सावधानी और नियमों का पालन करते हुए मरीजों का इलाज लगातार कर रहा हूं, जिससे अस्पताल में उदासी की चादर ओढ़कर आया मरीज मुस्कान के साथ स्वस्थ होकर अपने घर जाए।
होम आइसोलेशन में खाना और दवा पहुंचा रहा है निरभेद फाउंडेशन
रेलवे में कार्यरत सुशील कुमार मीणा अपनी संस्था निरभेद फाउंडेशन के साथ पिछले साल लॉकडाउन में बड़ी संख्या में लोगों को राशन पहुंचा चुके थे लेकिन इस बार चुनौती बड़ी और मुश्किल भरी थी। सुशील ने सोशल मीडिया के माध्यम से जरूरतमंद लोगों से संपर्क शुरू किया। इस दौरान करीब 12 ऐसे लोग मिले, जो संक्रमित होने के बाद अकेले ही होम आइसोलेशन में इलाज ले रहे थे। संक्रमण के चलते बाहर जा नही सकते और खाने का इंतजाम भी मुश्किल हो रहा था। अपनी फाउंडेशन के साथ सुशील ने इन लोगों को भोजन और जरूरी दवाइयां पहुंचना शुरू किया। 11 दिन पहले सुशील कोरोना संक्रमित हो गए। इस दौरान उन्होंने कोविड नियमों का पालन करते हुए आवाजाही को बंद किया और घर से ही अपने साथियों की मदद से लोगों तक जरूरत का सामान पहुंचाया। उनके साथियों ने चार लोगों को ऑक्सीजन भी उपलब्ध कराई। इसके लिए उनके साथियों ने भाग दौड़ भी की। हिंडन पार क्षेत्र में एक परिवार को ग्रेटर नोएडा से भी ऑक्सीजन का इंतजाम कराया।
परिवार से दूर सिर्फ सेवा का प्रण, लैब टेक्नीशियन जितेंद्र
कोरोना संक्रमण के इस भयावह दौर में मन में जनता की सेवा का प्रण लेकर डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल के लैब टेक्नीशियन जितेंद्र सिंह एक माह से अस्पताल में ही रुके हुए हैं। अस्पताल में रहकर ही वे अपने काम में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि एलटी ट्रेनिंग के वक्त काम की ली शपथ को ईमानदारी से निभाते हुए जनता की सेवा करना ही कर्त्तव्य है।
मूल रूप से कायमगंज के गांव नगली उम्मेद निवासी जितेंद्र सिंह की आठ माह पूर्व आयोग से डॉ. राममनोहर लोहिया अस्पताल में नियुक्ति हुई थी। वे यहां कोरोना जांच के लिए आए लोगों के नमूने लेते हैं। घर पर मां सुमनलता, पत्नी बीना और पुत्र रिषभ(5) तथा उत्कर्ष (1) हैं।
उन्होंने बताया कि संक्रमण के दौर में घर वालों को समस्या न हो, इसलिए अस्पताल में ही रुकने का निश्चय किया। जब तक संक्रमण का दौर रहेगा, तब तक घर नहीं जाऊंगा। घर पर वीडियो काल से बात कर लेते हैं। एक साल के बेटे को भी मोबाइल पर ही दुलार लेते हैं। बताया कि मां कहती है कि बेटा अपना ध्यान रखते हुए अपने काम से कभी पीछे न हटना, बस यही सोचकर हर वक्त ड्यूटी को तैयार रहते हैं।