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एक किलो पर 250 रुपये का मुनाफा कमा, कर रहे थे सेहत का सौदा
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एक किलो पर 250 रुपये का मुनाफा कमा, कर रहे थे सेहत का सौदा
खोड़ा। वंदना एंक्लेव के चार मंजिला मकान में महज 250 रुपये प्रति किलो मुनाफे के लिए नकली देशी घी बनाकर लोगों की सेहत का सौदा हो रहा था। पिछले चार वर्षों से चोरी-छिपे यह अवैध फैक्टरी किराए के मकान में चल रही थी। आरोपी बाजार से वनस्पति और डालडा घी खरीदने के बाद उसे फैक्टरी के अंदर पिघलाते थे। देशी घी की सुगंध लाने के लिए एसेंस मिलाते थे। एक ब्रांडेड कंपनी के इंटेलिजेंस ऑफिसर जितेंद्र सिंह के मुताबिक, वनस्पति और डालडा को पिघलाकर उसका मिश्रण करना ही लोगों की सेहत के लिए ज्यादा हानिकारक होता है। जो फेफड़ों पर असर डालकर लोगों की सांस पर धीरे-धीरे प्रभाव डालता है।
पुलिस जांच में सामने आया कि वंदना एंक्लेव में चार मंजिला मकान को महेंद्र खंडेलवाल उर्फ महेंद्र कुमार ने किराए पर लिया था। मकान मालिक प्रदेश से बाहर रहता है अभी उसके बारे कुछ जानकारी नहीं हुई है। मकान के बेसमेंट में आरोपी देशी घी के टिन तैयार कर सप्लाई के लिए रखते थे। जबकि दूसरी मंजिल पर टिन को पैक किया जाता था। आरोपी बाजार से वनस्पति घी और डालडा के टिन 1500 से 2000 रुपये में खरीदते थे। इसके बाद उसे देशी घी में बदलकर लोगों को 2200 से 2500 रुपये में बेच दिया करते थे। एक किलो घी पर करीब 250 रुपये का मुनाफा कमाते थे।
खाद्य विभाग के डीओ विनीत कुमार ने बताया कि आरोपी नीरज और राजकुमार की होटल व रेस्टोरेंट संचालक समेत अन्य लोगों से अच्छी पहचान थी। लिहाजा वह अचानक कोई कार्यक्रम होने पर यदि एक घंटा पहले भी आरोपियों को ऑर्डर देते थे तो नीरज निम्न पते पर घी के टिन पहुंचा देता था। फैक्टरी की जानकारी होने पर ब्रांडेड कंपनी के इंटेलिजेंस ऑफिस जितेंद्र सिंह ने खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम के साथ पूरा जाल बिछाकर आरोपी राजकुमार की दुकान से एक किलो घी पैक कराया था। जबकि 20 किलो घी का ऑर्डर देकर तुरंत मंगाने के लिए कहा। कुछ देर बाद नीरज स्कूटी लेकर वहां पहुंचा तभी टीम ने उसे दबोच लिया। खोड़ा थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार कुशवाहा का कहना है कि फैक्टरी संचालक की तलाश में टीम लगी है। संचालक ने कोई वेरिफिकेशन नहीं कराया हुआ था। उसके पकड़े जाने पर अन्य बिंदुओं पर पूछताछ की जाएगी।
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खोड़ा। वंदना एंक्लेव के चार मंजिला मकान में महज 250 रुपये प्रति किलो मुनाफे के लिए नकली देशी घी बनाकर लोगों की सेहत का सौदा हो रहा था। पिछले चार वर्षों से चोरी-छिपे यह अवैध फैक्टरी किराए के मकान में चल रही थी। आरोपी बाजार से वनस्पति और डालडा घी खरीदने के बाद उसे फैक्टरी के अंदर पिघलाते थे। देशी घी की सुगंध लाने के लिए एसेंस मिलाते थे। एक ब्रांडेड कंपनी के इंटेलिजेंस ऑफिसर जितेंद्र सिंह के मुताबिक, वनस्पति और डालडा को पिघलाकर उसका मिश्रण करना ही लोगों की सेहत के लिए ज्यादा हानिकारक होता है। जो फेफड़ों पर असर डालकर लोगों की सांस पर धीरे-धीरे प्रभाव डालता है।
पुलिस जांच में सामने आया कि वंदना एंक्लेव में चार मंजिला मकान को महेंद्र खंडेलवाल उर्फ महेंद्र कुमार ने किराए पर लिया था। मकान मालिक प्रदेश से बाहर रहता है अभी उसके बारे कुछ जानकारी नहीं हुई है। मकान के बेसमेंट में आरोपी देशी घी के टिन तैयार कर सप्लाई के लिए रखते थे। जबकि दूसरी मंजिल पर टिन को पैक किया जाता था। आरोपी बाजार से वनस्पति घी और डालडा के टिन 1500 से 2000 रुपये में खरीदते थे। इसके बाद उसे देशी घी में बदलकर लोगों को 2200 से 2500 रुपये में बेच दिया करते थे। एक किलो घी पर करीब 250 रुपये का मुनाफा कमाते थे।
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खाद्य विभाग के डीओ विनीत कुमार ने बताया कि आरोपी नीरज और राजकुमार की होटल व रेस्टोरेंट संचालक समेत अन्य लोगों से अच्छी पहचान थी। लिहाजा वह अचानक कोई कार्यक्रम होने पर यदि एक घंटा पहले भी आरोपियों को ऑर्डर देते थे तो नीरज निम्न पते पर घी के टिन पहुंचा देता था। फैक्टरी की जानकारी होने पर ब्रांडेड कंपनी के इंटेलिजेंस ऑफिस जितेंद्र सिंह ने खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम के साथ पूरा जाल बिछाकर आरोपी राजकुमार की दुकान से एक किलो घी पैक कराया था। जबकि 20 किलो घी का ऑर्डर देकर तुरंत मंगाने के लिए कहा। कुछ देर बाद नीरज स्कूटी लेकर वहां पहुंचा तभी टीम ने उसे दबोच लिया। खोड़ा थाना प्रभारी ब्रजेश कुमार कुशवाहा का कहना है कि फैक्टरी संचालक की तलाश में टीम लगी है। संचालक ने कोई वेरिफिकेशन नहीं कराया हुआ था। उसके पकड़े जाने पर अन्य बिंदुओं पर पूछताछ की जाएगी।
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