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लुभावने ऑफर का मेसेज भेजकर ठगी कर रहे साइबर जालसाज
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लुभावने ऑफर का मेसेज भेजकर ठगी कर रहे साइबर जालसाज
गाजियाबाद। त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है। ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट पर तमाम तरह के ऑफर की भरमार चल रही है। ऐसे में साइबर जालसाज नामी कंपनियों की मिलती-जुलती डोमेन आईडी से लुभावने आफर का मेसेज भेजकर ठगी कर रहे हैं। पुलिस के पास ऐसे मामले आए हैं, जिनमें लोगों को ऑफर का मेसेज मिला और ऑर्डर बुक करते ही खाते से रकम साफ हो गई।
साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि साइबर जालसाज माहौल के हिसाब से ठगी के तरीके बदलते रहते हैं। कोरोनाकाल में रेमडेसिविर, अस्पताल में बेड, एंबुलेंस और ऑक्सीजन के नाम पर ठगी के मामले बढ़े तो वहीं, अब जालसाजों ने त्योहारी सीजन में ऑफर का झांसा देकर ठगी शुरू कर दी है। ई-कॉमर्स साइट के जरिये खरीदारी और ऑनलाइन शॉपिंग में लोगों के बढ़ते क्रेज को साइबर जालसाज भुना रहे हैं। इसके लिए वह ई-कॉमर्स कंपनियों व नामचीन संस्थानों के नाम का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में लोगों को सचेत रहने की जरूरत है। ऑफर की पड़ताल करने के बाद ही बुकिंग करें। हो सके तो कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प चुनें।
ऐसे दे रहे ठगी को अंजाम
फर्जी वेबसाइट बनाकर : नामचीन कंपनियों व संस्थानों के नाम से मिलती जुलती वेबसाइट बनाकर इंटरनेट पर डाल दिया जाता है। उस पर हेल्पलाइन नंबर ठगों का होता है। ऑर्डर बुक करने या शिकायत करने पर जालसाजों से बात होती है। ये लोगों को झांसे में लेकर रकम ऐंठ लेते हैं।
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क्लोन एप बनाकर
प्ले स्टोर पर ई-कॉमर्स कंपनियों के एप का क्लोन एप बनाकर डाल देते हैं। इस पर डिस्काउंट या अन्य लुभावना ऑफर देकर लोगों को झांसे में लेते हैं और उनसे अपने खाते में रकम ट्रांसफर कराकर लोगों को ठगते हैं।
डोमेन आईडी से मेसेज भेजकर
नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से नामी कंपनियों से मिलते जुलते नाम की डोमेन आईडी लेते हैं। उसी के माध्यम से मेसेज भेजकर झांसे में लेते हैं। मेसेज को क्लिक करने पर रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कराई जाती है। जिसके बाद जालसाज पीड़ित के मोबाइल का एक्सेस अपने हाथों में लेकर डाटा इस्तेमाल करते हैं।
ऐसे बचें
मेरठ जोन पुलिस के साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह ने बताया कि ट्राई ने डोमेन आईडी से टेक्स्ट मेसेज भेजने वाली कंपनियों का पता लगाने के लिए सुविधा दी है। इसके लिए tri.gov.in पर जाकर एसएमएस हेडर चेक कर सकते हैं। इस पर कंपनी की पूरी जानकारी और पता सामने आ जाएगा। साथ ही, कंपनी से जुड़ी अन्य फर्मों की जानकारी भी मिल जाएगी। इसके अलावा किसी भी कंपनी के पेज पर कॉपीराइट वाला ऑप्शन देख लें। कंपनी सही होगी तो उस पर वैट आईडी भी दिखाई देगी। रजिस्टर्ड वेबसाइट के सामने हमेशा लॉक लगा होता है। इसे चेक कर लें।
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गाजियाबाद। त्योहारी सीजन शुरू हो चुका है। ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट पर तमाम तरह के ऑफर की भरमार चल रही है। ऐसे में साइबर जालसाज नामी कंपनियों की मिलती-जुलती डोमेन आईडी से लुभावने आफर का मेसेज भेजकर ठगी कर रहे हैं। पुलिस के पास ऐसे मामले आए हैं, जिनमें लोगों को ऑफर का मेसेज मिला और ऑर्डर बुक करते ही खाते से रकम साफ हो गई।
साइबर सेल प्रभारी सुमित कुमार ने बताया कि साइबर जालसाज माहौल के हिसाब से ठगी के तरीके बदलते रहते हैं। कोरोनाकाल में रेमडेसिविर, अस्पताल में बेड, एंबुलेंस और ऑक्सीजन के नाम पर ठगी के मामले बढ़े तो वहीं, अब जालसाजों ने त्योहारी सीजन में ऑफर का झांसा देकर ठगी शुरू कर दी है। ई-कॉमर्स साइट के जरिये खरीदारी और ऑनलाइन शॉपिंग में लोगों के बढ़ते क्रेज को साइबर जालसाज भुना रहे हैं। इसके लिए वह ई-कॉमर्स कंपनियों व नामचीन संस्थानों के नाम का सहारा ले रहे हैं। ऐसे में लोगों को सचेत रहने की जरूरत है। ऑफर की पड़ताल करने के बाद ही बुकिंग करें। हो सके तो कैश ऑन डिलीवरी का विकल्प चुनें।
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ऐसे दे रहे ठगी को अंजाम
फर्जी वेबसाइट बनाकर : नामचीन कंपनियों व संस्थानों के नाम से मिलती जुलती वेबसाइट बनाकर इंटरनेट पर डाल दिया जाता है। उस पर हेल्पलाइन नंबर ठगों का होता है। ऑर्डर बुक करने या शिकायत करने पर जालसाजों से बात होती है। ये लोगों को झांसे में लेकर रकम ऐंठ लेते हैं।
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क्लोन एप बनाकर
प्ले स्टोर पर ई-कॉमर्स कंपनियों के एप का क्लोन एप बनाकर डाल देते हैं। इस पर डिस्काउंट या अन्य लुभावना ऑफर देकर लोगों को झांसे में लेते हैं और उनसे अपने खाते में रकम ट्रांसफर कराकर लोगों को ठगते हैं।
डोमेन आईडी से मेसेज भेजकर
नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से नामी कंपनियों से मिलते जुलते नाम की डोमेन आईडी लेते हैं। उसी के माध्यम से मेसेज भेजकर झांसे में लेते हैं। मेसेज को क्लिक करने पर रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड कराई जाती है। जिसके बाद जालसाज पीड़ित के मोबाइल का एक्सेस अपने हाथों में लेकर डाटा इस्तेमाल करते हैं।
ऐसे बचें
मेरठ जोन पुलिस के साइबर एक्सपर्ट कर्मवीर सिंह ने बताया कि ट्राई ने डोमेन आईडी से टेक्स्ट मेसेज भेजने वाली कंपनियों का पता लगाने के लिए सुविधा दी है। इसके लिए tri.gov.in पर जाकर एसएमएस हेडर चेक कर सकते हैं। इस पर कंपनी की पूरी जानकारी और पता सामने आ जाएगा। साथ ही, कंपनी से जुड़ी अन्य फर्मों की जानकारी भी मिल जाएगी। इसके अलावा किसी भी कंपनी के पेज पर कॉपीराइट वाला ऑप्शन देख लें। कंपनी सही होगी तो उस पर वैट आईडी भी दिखाई देगी। रजिस्टर्ड वेबसाइट के सामने हमेशा लॉक लगा होता है। इसे चेक कर लें।