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कोरोना को हराकर दूसरों का बढ़ाया हौसला
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नीतू सिंह
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कोरोना को हराकर दूसरों का बढ़ाया हौसला
गाजियाबाद। कोरोना के शुरूआती दौर में जब दहशत में अपने भी दूरी बना रहे थे। डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ मरीजों का सहारा बने। महिला शक्ति ने इजाज के मोर्चे पर अपने कदम पीछे नहीं खींचे एक तरफ घर तो दूसरी ओर नौकरी का दायित्व निभाया। संक्रमित हुई फिर भी नौकरी की जिम्मेदारी निभाई। टीकाकरण के बाद उसी जोश और विश्वास से अपने काम में जुटी हैं।
डॉक्टर और नर्स बने सहारा
जिस समय संक्रमण तेजी से बढ़ रहा था, उस दौरान कई अस्पतालों में मरीजों को वापस कर दिया जाता था, लेकिन हम लोगों ने तय कर रखा था कि किसी भी संक्रमित मरीज को वापस नहीं किया जाएगा क्योंकि वह क्षण देश के लिए बहुत ही नाजुक पल था। किसी के भी संक्रमण की चपेट में आने पर भी अपने सगे दूरी बना लेते थे। ऐसे में संक्रमित मरीजों के लिए डाक्टर और नर्स ही सहारा थे। मरीजों के इलाज के दौरान मैं भी संक्रमण की चपेट में आ गई थी। इलाज के दौरान सिर्फ 14 दिन का अवकाश लिया था। अब टीकाकरण भी करवा चुकी हूं।
लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर) डॉ राधा राना, डायरेक्टर पेशेंट केयर सर्विसेज यशोदा अस्पताल
पहले डर लगा, फिर किया जागरूक
जिस समय अस्पताल में पहला कोरोना का मरीज भर्ती हुआ था। अस्पताल में दहशत हो गई थी। फिजिशियन डॉ. आरपी सिंह ने स्टॉफ को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि अगर हम लोग डर जाएंगे तो इनका इलाज कौन करेगा? यह हमारे जीवन के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान है, इसमें हम लोगों को किसी भी हाल में पास होना है। प्रोत्साहन के बाद सभी ने मरीजों का देखभाल शुरू कर दिया । इस दौरान मैं भी संक्रमण की चपेट में आ गई थी। अब टीकाकरण करा लिया है, फिर भी अभी पूरी सावधानी बरत रही हूं।
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आकांक्षा दीक्षित, स्टॉफ नर्स
संक्रमित होने पर हो गई थी नर्वस
एमएमजी अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज बंद हो गया, लेकिन जो मरीज बुखार व सांस की चपेट में आने पर इलाज के लिए आते थे, वह भर्ती भी होते थे। इसमें पता नहीं चलता था कि कौन पॉजिटिव है, कौन निगेटिव। ऐसे में किस मरीज के इलाज के दौरान संक्रमित हुए इसके बारे में कोई जानकारी नहीं चल पाई, जब बुखार हुआ तो जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। एक बार नर्वस हो गई थी, लेकिन घर वालों ने बहुत सहयोग किया। स्वस्थ होने के बाद दोबारा मरीजों की देखभाल शुरू कर दी।
नीतू सिंह, नर्स
दो दिन बाद पता चलता था रिपोर्ट पॉजिटिव
मई-जून में जिस मरीज को इंजेक्शन लगाने व इलाज करने में स्टॉफ जुटा रहता था, उसके दो दिन पता चलता था कि उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है। ऐसे में डर तो लगता था, लेकिन काम भी करना था। रात में ड्यूटी चल रही थी। जब बुखार होने के साथ ही सिर दर्द व उल्टी होने की परेशानी हुई तब जांच कराई। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद ईएसआईसी में भर्ती रही। स्वस्थ होने के बाद एक हौसला भी मिला कि हम अपना दायित्व निभाते हुए संक्रमण की चपेट में आए थे, तो इससे पीछे नहीं हटना है। अब तो संक्रमण से बचाव के लिए दोनों टीके भी लगवा चुकी हूं।
गायत्री देवी, नर्स
मुश्किल दौर पार हो चुुका
एक समय ऐसा भी आया था कि जब अपने भी मरीज से दूरी बना रहे थे, उस समय हम लोग मरीज के पास होते थे। संक्रमित मरीज के 14 दिन तक लगातार देखभाल करने के दौरान डाक्टर व नर्सिंग स्टाफ सबसे ज्यादा संक्रमण की जद में रहता था। मैं भी संक्रमित हुई, इलाज कराया और फिर दोबारा मरीजों के इलाज में लगी हूं। कोरोना टीकाकरण शुरू हो चुका है, लेकिन अभी खतरा टला नहीं है। ऐसे में अभी हम लोगों को सजग रहना चाहिए। हालांकि टीकाकरण से संक्रमण से बचाव होगा, लेकिन अभी हम लोगों को जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी।
जूली जेम्स, नर्स
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गाजियाबाद। कोरोना के शुरूआती दौर में जब दहशत में अपने भी दूरी बना रहे थे। डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ मरीजों का सहारा बने। महिला शक्ति ने इजाज के मोर्चे पर अपने कदम पीछे नहीं खींचे एक तरफ घर तो दूसरी ओर नौकरी का दायित्व निभाया। संक्रमित हुई फिर भी नौकरी की जिम्मेदारी निभाई। टीकाकरण के बाद उसी जोश और विश्वास से अपने काम में जुटी हैं।
डॉक्टर और नर्स बने सहारा
जिस समय संक्रमण तेजी से बढ़ रहा था, उस दौरान कई अस्पतालों में मरीजों को वापस कर दिया जाता था, लेकिन हम लोगों ने तय कर रखा था कि किसी भी संक्रमित मरीज को वापस नहीं किया जाएगा क्योंकि वह क्षण देश के लिए बहुत ही नाजुक पल था। किसी के भी संक्रमण की चपेट में आने पर भी अपने सगे दूरी बना लेते थे। ऐसे में संक्रमित मरीजों के लिए डाक्टर और नर्स ही सहारा थे। मरीजों के इलाज के दौरान मैं भी संक्रमण की चपेट में आ गई थी। इलाज के दौरान सिर्फ 14 दिन का अवकाश लिया था। अब टीकाकरण भी करवा चुकी हूं।
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लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर) डॉ राधा राना, डायरेक्टर पेशेंट केयर सर्विसेज यशोदा अस्पताल
पहले डर लगा, फिर किया जागरूक
जिस समय अस्पताल में पहला कोरोना का मरीज भर्ती हुआ था। अस्पताल में दहशत हो गई थी। फिजिशियन डॉ. आरपी सिंह ने स्टॉफ को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि अगर हम लोग डर जाएंगे तो इनका इलाज कौन करेगा? यह हमारे जीवन के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान है, इसमें हम लोगों को किसी भी हाल में पास होना है। प्रोत्साहन के बाद सभी ने मरीजों का देखभाल शुरू कर दिया । इस दौरान मैं भी संक्रमण की चपेट में आ गई थी। अब टीकाकरण करा लिया है, फिर भी अभी पूरी सावधानी बरत रही हूं।
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आकांक्षा दीक्षित, स्टॉफ नर्स
संक्रमित होने पर हो गई थी नर्वस
एमएमजी अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज बंद हो गया, लेकिन जो मरीज बुखार व सांस की चपेट में आने पर इलाज के लिए आते थे, वह भर्ती भी होते थे। इसमें पता नहीं चलता था कि कौन पॉजिटिव है, कौन निगेटिव। ऐसे में किस मरीज के इलाज के दौरान संक्रमित हुए इसके बारे में कोई जानकारी नहीं चल पाई, जब बुखार हुआ तो जांच कराने पर रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। एक बार नर्वस हो गई थी, लेकिन घर वालों ने बहुत सहयोग किया। स्वस्थ होने के बाद दोबारा मरीजों की देखभाल शुरू कर दी।
नीतू सिंह, नर्स
दो दिन बाद पता चलता था रिपोर्ट पॉजिटिव
मई-जून में जिस मरीज को इंजेक्शन लगाने व इलाज करने में स्टॉफ जुटा रहता था, उसके दो दिन पता चलता था कि उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है। ऐसे में डर तो लगता था, लेकिन काम भी करना था। रात में ड्यूटी चल रही थी। जब बुखार होने के साथ ही सिर दर्द व उल्टी होने की परेशानी हुई तब जांच कराई। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद ईएसआईसी में भर्ती रही। स्वस्थ होने के बाद एक हौसला भी मिला कि हम अपना दायित्व निभाते हुए संक्रमण की चपेट में आए थे, तो इससे पीछे नहीं हटना है। अब तो संक्रमण से बचाव के लिए दोनों टीके भी लगवा चुकी हूं।
गायत्री देवी, नर्स
मुश्किल दौर पार हो चुुका
एक समय ऐसा भी आया था कि जब अपने भी मरीज से दूरी बना रहे थे, उस समय हम लोग मरीज के पास होते थे। संक्रमित मरीज के 14 दिन तक लगातार देखभाल करने के दौरान डाक्टर व नर्सिंग स्टाफ सबसे ज्यादा संक्रमण की जद में रहता था। मैं भी संक्रमित हुई, इलाज कराया और फिर दोबारा मरीजों के इलाज में लगी हूं। कोरोना टीकाकरण शुरू हो चुका है, लेकिन अभी खतरा टला नहीं है। ऐसे में अभी हम लोगों को सजग रहना चाहिए। हालांकि टीकाकरण से संक्रमण से बचाव होगा, लेकिन अभी हम लोगों को जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी।
जूली जेम्स, नर्स