{"_id":"6297bd8bd2f4c219dc18bf15","slug":"ghaziabad-news-ghaziabad-city-news-gbd2393817116","type":"story","status":"publish","title_hn":"जून में होना है प्रसव, जुलाई में मिली अल्ट्रासाउंड जांच की तारीख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जून में होना है प्रसव, जुलाई में मिली अल्ट्रासाउंड जांच की तारीख
विज्ञापन
जून में होना है प्रसव, जुलाई में मिली अल्ट्रासाउंड जांच की तारीख
गाजियाबाद। जिला महिला अस्पताल में उधार के डॉक्टर मिलने के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधर पा रही है। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लंबी तारीख मिल रही है। हाल यह है कि प्रसव के लिए डॉक्टर ने 10 से 15 दिन का समय दिया है लेकिन जब महिला अल्ट्रासाउंड जांच कराने पहुंचती हैं तो उन्हें एक महीने बाद की तारीख मिलती है। ऐसे में मरीजों को निजी केंद्रों पर जाकर जांच कराना मजबूरी बन गया है।
महिला अस्पताल में कार्यरत रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक कुमार का आठ महीने पहले तबादला हो गया था। उनके जाने के बाद अभी तक दूसरे रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने एमएमजी अस्पताल में कार्यरत रेडियोलाजिस्ट डॉ. पंकज कुमार को महिला अस्पताल में रोजाना दो घंटे महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए कहा था। इसके बाद से कभी डॉ. पंकज तो कभी दूसरे रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विनेश जांच करने जाते हैं। कई बार स्थिति यह होती है कि डॉ. पंकज की इमरजेंसी या पोस्टमार्टम ड्यूटी लग जाती है तो डॉ. विनेश एमएमजी अस्पताल में जांच करते हैं। महिला अस्पताल में उस दिन जांच नहीं हो पाती है।
15 से 30 दिन बाद मिलता है समय
मरीजों के मुताबिक, कई बार डॉक्टर मरीज को तत्काल अल्ट्रासाउंड जांच कराकर रिपोर्ट दिखाने को कहते हैं, लेकिन उन्हें 15 से 30 दिन बाद की तारीख मिलती है। ऐसे में मरीज मजबूरी में अस्पताल से बाहर जाकर निजी केंद्रों पर जांच कराते हैं। अस्पताल परिसर के बाहर पांच अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर जांच कराने वाले अधिकांश मरीज और गर्भवती के पर्चे एमएमजी और महिला अस्पताल के होते हैं।
विज्ञापन
एमएमजी अस्पताल में एक दिन में होती है 40 से 45 जांच
सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि एक मरीज की जांच करने में पांच से सात मिनट का समय लगता है। अगर कोई गंभीर मामला होता है तो उसमें 10 से 12 मिनट का भी समय लग सकता है। अस्पताल में रोजाना 40 से 45 लोगों की जांच की जाती है। दूसरे दिन का समय उस मरीज को दिया जाता है जिनको खाली पेट जांच की सलाह डॉक्टर लिखते हैं और वह नाश्ता करने के बाद जांच कराने पहुंचते हैं।
स्थाई रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए लिखा गया है पत्र
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. संगीता गोयल ने बताया कि स्थाई रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र भेजने के साथ ही रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। संयुक्त निदेशक कार्यालय मेरठ से आश्वासन मिला है कि जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो जाएगी।
केस 1=
15 दिन बाद प्रसव और पांच जुलाई दी जांच की तारीख
नोएडा सेक्टर 62 से इलाज कराने पहुंची अर्चना को डॉक्टर ने बताया कि 15 से 20 जून के बीच प्रसव होगा, इसलिए अंतिम बार अल्ट्रासाउंड जांच करा लो। जांच कराने गई तो उन्हें पांच जुलाई की तारीख दी गई।
केस 2=
पेट में दर्द, दस दिन बाद दिया समय
विजय नगर से पेट दर्द का इलाज कराने पहुंची माया ने बताया कि पेट में दर्द था। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए लिखा था। जांच कराने गई तो 10 दिन बाद का समय दिया। निजी सेंटर पर 400 रुपये में जांच कराने पर पथरी की पुष्टि हुई है।
विज्ञापन
गाजियाबाद। जिला महिला अस्पताल में उधार के डॉक्टर मिलने के बाद भी व्यवस्था नहीं सुधर पा रही है। गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लंबी तारीख मिल रही है। हाल यह है कि प्रसव के लिए डॉक्टर ने 10 से 15 दिन का समय दिया है लेकिन जब महिला अल्ट्रासाउंड जांच कराने पहुंचती हैं तो उन्हें एक महीने बाद की तारीख मिलती है। ऐसे में मरीजों को निजी केंद्रों पर जाकर जांच कराना मजबूरी बन गया है।
महिला अस्पताल में कार्यरत रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अशोक कुमार का आठ महीने पहले तबादला हो गया था। उनके जाने के बाद अभी तक दूसरे रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने एमएमजी अस्पताल में कार्यरत रेडियोलाजिस्ट डॉ. पंकज कुमार को महिला अस्पताल में रोजाना दो घंटे महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए कहा था। इसके बाद से कभी डॉ. पंकज तो कभी दूसरे रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विनेश जांच करने जाते हैं। कई बार स्थिति यह होती है कि डॉ. पंकज की इमरजेंसी या पोस्टमार्टम ड्यूटी लग जाती है तो डॉ. विनेश एमएमजी अस्पताल में जांच करते हैं। महिला अस्पताल में उस दिन जांच नहीं हो पाती है।
विज्ञापन
15 से 30 दिन बाद मिलता है समय
मरीजों के मुताबिक, कई बार डॉक्टर मरीज को तत्काल अल्ट्रासाउंड जांच कराकर रिपोर्ट दिखाने को कहते हैं, लेकिन उन्हें 15 से 30 दिन बाद की तारीख मिलती है। ऐसे में मरीज मजबूरी में अस्पताल से बाहर जाकर निजी केंद्रों पर जांच कराते हैं। अस्पताल परिसर के बाहर पांच अल्ट्रासाउंड जांच केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर जांच कराने वाले अधिकांश मरीज और गर्भवती के पर्चे एमएमजी और महिला अस्पताल के होते हैं।
विज्ञापन
एमएमजी अस्पताल में एक दिन में होती है 40 से 45 जांच
सीएमएस डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि एक मरीज की जांच करने में पांच से सात मिनट का समय लगता है। अगर कोई गंभीर मामला होता है तो उसमें 10 से 12 मिनट का भी समय लग सकता है। अस्पताल में रोजाना 40 से 45 लोगों की जांच की जाती है। दूसरे दिन का समय उस मरीज को दिया जाता है जिनको खाली पेट जांच की सलाह डॉक्टर लिखते हैं और वह नाश्ता करने के बाद जांच कराने पहुंचते हैं।
स्थाई रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए लिखा गया है पत्र
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. संगीता गोयल ने बताया कि स्थाई रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के लिए शासन को पत्र भेजने के साथ ही रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। संयुक्त निदेशक कार्यालय मेरठ से आश्वासन मिला है कि जल्द ही रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो जाएगी।
केस 1=
15 दिन बाद प्रसव और पांच जुलाई दी जांच की तारीख
नोएडा सेक्टर 62 से इलाज कराने पहुंची अर्चना को डॉक्टर ने बताया कि 15 से 20 जून के बीच प्रसव होगा, इसलिए अंतिम बार अल्ट्रासाउंड जांच करा लो। जांच कराने गई तो उन्हें पांच जुलाई की तारीख दी गई।
केस 2=
पेट में दर्द, दस दिन बाद दिया समय
विजय नगर से पेट दर्द का इलाज कराने पहुंची माया ने बताया कि पेट में दर्द था। डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए लिखा था। जांच कराने गई तो 10 दिन बाद का समय दिया। निजी सेंटर पर 400 रुपये में जांच कराने पर पथरी की पुष्टि हुई है।