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कीमत चुकाने के बाद भी लोगों को नहीं मिल रहा आशियाना
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कीमत चुकाने के बाद भी लोगों को नहीं मिला आशियाना
गाजियाबाद। वर्षों से अपने घर का सपना देख रहे राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग और हिंडन पार क्षेत्र के एक हजार से ज्यादा लोगों को लंबे इंतजार के बाद भी आशियाना नहीं मिल सके हैं। कभी फंड की तो अब श्रमिकों की कमी बताकर बिल्डरों ने हाउसिंग प्रोजेक्ट रोक दिए गए हैं। कई बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट रुक जाने की वजह से हजारों लोगों का फ्लैट मिलने का सपना इस साल भी पूरा नहीं हो पाएगा। फ्लैट की कीमत दे चुके आवंटियों को फ्लैट भी न मिला और अब बैंक लोन की किस्तें भरने की वजह से दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। रेरा और जीडीए अधिकारियों से शिकायत के बावजूद न तो आशियाना मिला और न ही बिल्डरों से पैसा लौटाया। क्रॉसिंग सिटी का एक प्रोजेक्ट तो करीब सात साल लेट हो चुका है, लेकिन आवंटियों की सुनवाई नहीं हो रही है।
अजनारा के 400 आवंटी दीपावली पर भी नहीं कर पाएंगे गृह प्रवेश
राजनगर एक्सटेंशन की अजनारा इंटीग्रिटी सोसायटी में तीन हाउसिंग टावर का निर्माण दिसंबर 2020 में पूरा होना था, लेकिन इससे करीब छह माह पहले ही निर्माण कार्य रोक दिया। इनमें करीब 400 लोगों ने फ्लैट बुक करा रखे हैं। इन टावरों में फ्लैट बुक कराकर अपना घर मिलने का इंतजार कर रहे लोगों का कहना है कि नवंबर 2020 में उन्होंने बिल्डर से मिलकर शिकायत दर्ज कराई तो उन्होंने अगस्त 2021 में निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया। ऐसे में दीपावली पर नए घर में गृह प्रवेश की तैयारी कर रहे 400 आवंटियों को फिर से करीब एक साल का इंतजार करना पड़ेगा।
2014 में मिलना था घर, सात साल बाद भी इंतजार अधूरा
क्रॉसिंग्स रिपब्लिक सोसायटी में जयपुरिया बिल्डर ने सोसायटी का निर्माण करीब 2012 में शुरू किया था। आवंटियों का कहना है कि दो टावर वाली इस सोसायटी में एक टावर बन चुका है। इसमें करीब 40 परिवार रह रहे हैं। दूसरे टावर का निर्माण 2014 में पूरा कर आवंटियों को फ्लैट दिए जाने थे, लेकिन नहीं मिले। साल 2013 में ही पूरा पैसा जमा करा चुके लोगों को अब न घर मिला और न ही उनका पैसा वापस किया जा रहा है। इस टावर में करीब 95 आवंटियों को मकान मिलने थे। सात साल बाद भी उनका अपने घर का सपना पूरा नहीं हो पाया। आवंटियों का कहना है कि वह बिल्डर के ऑफिस के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। अब कई साल से बिल्डर का भी अता-पता नहीं है। उनका पैसा फंस गया है।
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इंदिरापुरम में भी कई बिल्डरों ने रोका निर्माण
दिल्ली और नोएडा के पास स्थित इंदिरापुरम में भी कई बिल्डर लोगों के अपने घर के सपने पर कुंडली मारकर बैठ गए हैं। पांच-पांच साल से लोगों को न तो घर मिल रहा है और न ही पैसा वापस मिल रहा है। रेरा में शिकायत और बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद सरकारी मशीनरी लोगों को उनके फ्लैट का पजेशन नहीं दिला पाई है। लोग जीडीए से मदद मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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गाजियाबाद। वर्षों से अपने घर का सपना देख रहे राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग और हिंडन पार क्षेत्र के एक हजार से ज्यादा लोगों को लंबे इंतजार के बाद भी आशियाना नहीं मिल सके हैं। कभी फंड की तो अब श्रमिकों की कमी बताकर बिल्डरों ने हाउसिंग प्रोजेक्ट रोक दिए गए हैं। कई बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट रुक जाने की वजह से हजारों लोगों का फ्लैट मिलने का सपना इस साल भी पूरा नहीं हो पाएगा। फ्लैट की कीमत दे चुके आवंटियों को फ्लैट भी न मिला और अब बैंक लोन की किस्तें भरने की वजह से दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। रेरा और जीडीए अधिकारियों से शिकायत के बावजूद न तो आशियाना मिला और न ही बिल्डरों से पैसा लौटाया। क्रॉसिंग सिटी का एक प्रोजेक्ट तो करीब सात साल लेट हो चुका है, लेकिन आवंटियों की सुनवाई नहीं हो रही है।
अजनारा के 400 आवंटी दीपावली पर भी नहीं कर पाएंगे गृह प्रवेश
राजनगर एक्सटेंशन की अजनारा इंटीग्रिटी सोसायटी में तीन हाउसिंग टावर का निर्माण दिसंबर 2020 में पूरा होना था, लेकिन इससे करीब छह माह पहले ही निर्माण कार्य रोक दिया। इनमें करीब 400 लोगों ने फ्लैट बुक करा रखे हैं। इन टावरों में फ्लैट बुक कराकर अपना घर मिलने का इंतजार कर रहे लोगों का कहना है कि नवंबर 2020 में उन्होंने बिल्डर से मिलकर शिकायत दर्ज कराई तो उन्होंने अगस्त 2021 में निर्माण कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया। ऐसे में दीपावली पर नए घर में गृह प्रवेश की तैयारी कर रहे 400 आवंटियों को फिर से करीब एक साल का इंतजार करना पड़ेगा।
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2014 में मिलना था घर, सात साल बाद भी इंतजार अधूरा
क्रॉसिंग्स रिपब्लिक सोसायटी में जयपुरिया बिल्डर ने सोसायटी का निर्माण करीब 2012 में शुरू किया था। आवंटियों का कहना है कि दो टावर वाली इस सोसायटी में एक टावर बन चुका है। इसमें करीब 40 परिवार रह रहे हैं। दूसरे टावर का निर्माण 2014 में पूरा कर आवंटियों को फ्लैट दिए जाने थे, लेकिन नहीं मिले। साल 2013 में ही पूरा पैसा जमा करा चुके लोगों को अब न घर मिला और न ही उनका पैसा वापस किया जा रहा है। इस टावर में करीब 95 आवंटियों को मकान मिलने थे। सात साल बाद भी उनका अपने घर का सपना पूरा नहीं हो पाया। आवंटियों का कहना है कि वह बिल्डर के ऑफिस के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। अब कई साल से बिल्डर का भी अता-पता नहीं है। उनका पैसा फंस गया है।
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इंदिरापुरम में भी कई बिल्डरों ने रोका निर्माण
दिल्ली और नोएडा के पास स्थित इंदिरापुरम में भी कई बिल्डर लोगों के अपने घर के सपने पर कुंडली मारकर बैठ गए हैं। पांच-पांच साल से लोगों को न तो घर मिल रहा है और न ही पैसा वापस मिल रहा है। रेरा में शिकायत और बिल्डर के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद सरकारी मशीनरी लोगों को उनके फ्लैट का पजेशन नहीं दिला पाई है। लोग जीडीए से मदद मिलने का इंतजार कर रहे हैं।