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2600 सब्जी विक्रेताओं में किसी को नहीं लगा टीका
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2600 सब्जी विक्रेताओं में किसी को नहीं लगा टीका
गाजियाबाद। कोरोना काल में भी जिले की कई सब्जी मंडियों में प्रतिदिन हजारों लोग उमड़ रहे हैं। बावजूद इसके न ही यहां टेस्टिंग की कोई व्यवस्था है और न ही आढ़तियों को टीका लगाया गया है। प्रशासन भी आंख मूंदे हुए है। लोगों को चेहरे पर मास्क तो नजर आते हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग की धड़ल्ले से धज्जियां उड़ रही हैं।
हर रोज सुबह 11 बजे तक साहिबाबाद और पुराना बस अड्डा सब्जी मंडी में हजारों लोगों का हुजूम लगता है जिसकी तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं है। जबकि तीसरे लहर के खतरे को देखते हुए सबसे पहले वैक्सीनेशन की जरूरत यहीं पर है। जिले में दो सब्जी मंडियां संचालित हैं जिनमें साहिबाबाद की मंडी सबसे बड़ी है। इसमें हर रोज सुबह पांच बजे से सब्जी और फलों की खरीदारी शुरू होती है। यहां से पूरे जिले के ही नहीं बल्कि दिल्ली से जुड़े काफी फल व सब्जी विक्रेता भी थोक में खरीदारी करने के लिए आते हैं। इसके बाद नंबर आता है पुराने शहर की सब्जी मंडी का। पुराना बस अड्डा के पास स्थित इस सब्जी मंडी में फुटकर के अंदर फलों और सब्जी की बिक्री होती है। अन्य जगहों की अपेक्षा यहां पर फुटकर में सब्जी सस्ती मिलती है, जिसकी चलते बड़ी संख्या में लोग यहां पर भी खरीदारी करने के लिए आता है। यहां भी कभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होते नहीं दिखता ।
10 बजे के बाद पहुंचती है बड़ी भीड़
इस वक्त होलट, रेस्टोरेंट और ढाबे आदि बंद हैं। ऐसे में घर के इस्तेमाल में आने वाली सब्जी व फलों को खरीदने के लिए ही ग्राहक आते हैं। सब्जी विक्रेता बताते हैं कि गर्मी के मौसम में हर सब्जी 24 घंटे में खराब हो जाती है। इसलिए जिस दिन खरीद कर लाते हैं, उसी दिन बेचनी पड़ती है। इसके लिए सारी सब्जी बेचने के लिए हर रोज नौ-साढ़े नौ बजे के बाद सब्जियों को थोक मूल्य पर बेचना शुरू कर देते हैं। ऐसे में सब्जी की कीमतें कम हो जाती है। अब अधिकांश खरीदार भी इस बात को जानते हैं। क्योंकि यहां पर वो ही ग्राहक आते हैं जो लगातार यहां से सब्जी खरीदते हैं। इस स्थिति में सुबह में अंतिम एक डेढ़ घंटे मंडी में डेढ़ से दो हजार लोगों को हुजूम लग जाता है।
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हमारे यहां मंडी में सबसे ज्यादा आढ़ती हैं और करीब 30 हजार लोग प्रतिदिन यहां पर खरीदारी करने के लिए आते हैं। वैश्विक महामारी के दौरान शुरूआत में दो बार टेस्टिंग हुई, लेकिन टीकाकरण यहां अभी तक नहीं हुआ है। जबकि लोगों की भीड़ प्रतिदिन यहां जुटने के कारण सबसे पहले वैक्सीन लगाने की आवश्यकता यहीं है। हालांकि हम सभी अपने स्तर पर पूरी सतर्कता रखते हैं। - ज्ञान खंड यादव, अध्यक्ष साहिबाबाद मंडी
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हमारी मंडी में भी प्रतिदिन दो से ढाई हजार लोग इस वक्त पर भी आते हैं लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक यहां पर कोई वैक्सीनेशन या कोरोना की जांच का कैंप नहीं लगाया गया है। जबकि सबसे पहले आवश्यकता है कि यहां प सभी को वैक्सीन लगवाई जाए। सब्जी और फल सभी की जरूरत हैं। इसलिए मंडी भी बंद नहीं हो सकती। हम अपने स्तर पर पूरी सावधानी बरतते हैं लेकिन फिर भी खतरा तो रहता ही है। - श्रीपाल यादव, अध्यक्ष, वेलफेयर एसोसिएशन सब्जी मंडी- पुराना बस अड्डा
हम सब्जी बेचते वक्त पूरी सावधानी बरतते हैं। मास्क भी लगाते हैं लेकिन काम के बीच कई बार मास्क उतर जाता है। इसलिए खतरा पूरा बना हुआ है। प्रशासन को जरूरत थी कि वो प्राथिमकता के आधार पर यहां के सभी लोगों को वैक्सीन लगवाए, लेकिन अभी तक कोई प्रयास नहीं हुआ। हम लोग स्वयं अपने स्तर पर प्रयास करके लगवा रहे हैं। मैंने भी वैशाली में जाकर लगवाई थी। - गौरव, सब्जी विक्रेता।
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गाजियाबाद। कोरोना काल में भी जिले की कई सब्जी मंडियों में प्रतिदिन हजारों लोग उमड़ रहे हैं। बावजूद इसके न ही यहां टेस्टिंग की कोई व्यवस्था है और न ही आढ़तियों को टीका लगाया गया है। प्रशासन भी आंख मूंदे हुए है। लोगों को चेहरे पर मास्क तो नजर आते हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग की धड़ल्ले से धज्जियां उड़ रही हैं।
हर रोज सुबह 11 बजे तक साहिबाबाद और पुराना बस अड्डा सब्जी मंडी में हजारों लोगों का हुजूम लगता है जिसकी तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं है। जबकि तीसरे लहर के खतरे को देखते हुए सबसे पहले वैक्सीनेशन की जरूरत यहीं पर है। जिले में दो सब्जी मंडियां संचालित हैं जिनमें साहिबाबाद की मंडी सबसे बड़ी है। इसमें हर रोज सुबह पांच बजे से सब्जी और फलों की खरीदारी शुरू होती है। यहां से पूरे जिले के ही नहीं बल्कि दिल्ली से जुड़े काफी फल व सब्जी विक्रेता भी थोक में खरीदारी करने के लिए आते हैं। इसके बाद नंबर आता है पुराने शहर की सब्जी मंडी का। पुराना बस अड्डा के पास स्थित इस सब्जी मंडी में फुटकर के अंदर फलों और सब्जी की बिक्री होती है। अन्य जगहों की अपेक्षा यहां पर फुटकर में सब्जी सस्ती मिलती है, जिसकी चलते बड़ी संख्या में लोग यहां पर भी खरीदारी करने के लिए आता है। यहां भी कभी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होते नहीं दिखता ।
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10 बजे के बाद पहुंचती है बड़ी भीड़
इस वक्त होलट, रेस्टोरेंट और ढाबे आदि बंद हैं। ऐसे में घर के इस्तेमाल में आने वाली सब्जी व फलों को खरीदने के लिए ही ग्राहक आते हैं। सब्जी विक्रेता बताते हैं कि गर्मी के मौसम में हर सब्जी 24 घंटे में खराब हो जाती है। इसलिए जिस दिन खरीद कर लाते हैं, उसी दिन बेचनी पड़ती है। इसके लिए सारी सब्जी बेचने के लिए हर रोज नौ-साढ़े नौ बजे के बाद सब्जियों को थोक मूल्य पर बेचना शुरू कर देते हैं। ऐसे में सब्जी की कीमतें कम हो जाती है। अब अधिकांश खरीदार भी इस बात को जानते हैं। क्योंकि यहां पर वो ही ग्राहक आते हैं जो लगातार यहां से सब्जी खरीदते हैं। इस स्थिति में सुबह में अंतिम एक डेढ़ घंटे मंडी में डेढ़ से दो हजार लोगों को हुजूम लग जाता है।
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हमारे यहां मंडी में सबसे ज्यादा आढ़ती हैं और करीब 30 हजार लोग प्रतिदिन यहां पर खरीदारी करने के लिए आते हैं। वैश्विक महामारी के दौरान शुरूआत में दो बार टेस्टिंग हुई, लेकिन टीकाकरण यहां अभी तक नहीं हुआ है। जबकि लोगों की भीड़ प्रतिदिन यहां जुटने के कारण सबसे पहले वैक्सीन लगाने की आवश्यकता यहीं है। हालांकि हम सभी अपने स्तर पर पूरी सतर्कता रखते हैं। - ज्ञान खंड यादव, अध्यक्ष साहिबाबाद मंडी
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हमारी मंडी में भी प्रतिदिन दो से ढाई हजार लोग इस वक्त पर भी आते हैं लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक यहां पर कोई वैक्सीनेशन या कोरोना की जांच का कैंप नहीं लगाया गया है। जबकि सबसे पहले आवश्यकता है कि यहां प सभी को वैक्सीन लगवाई जाए। सब्जी और फल सभी की जरूरत हैं। इसलिए मंडी भी बंद नहीं हो सकती। हम अपने स्तर पर पूरी सावधानी बरतते हैं लेकिन फिर भी खतरा तो रहता ही है। - श्रीपाल यादव, अध्यक्ष, वेलफेयर एसोसिएशन सब्जी मंडी- पुराना बस अड्डा
हम सब्जी बेचते वक्त पूरी सावधानी बरतते हैं। मास्क भी लगाते हैं लेकिन काम के बीच कई बार मास्क उतर जाता है। इसलिए खतरा पूरा बना हुआ है। प्रशासन को जरूरत थी कि वो प्राथिमकता के आधार पर यहां के सभी लोगों को वैक्सीन लगवाए, लेकिन अभी तक कोई प्रयास नहीं हुआ। हम लोग स्वयं अपने स्तर पर प्रयास करके लगवा रहे हैं। मैंने भी वैशाली में जाकर लगवाई थी। - गौरव, सब्जी विक्रेता।