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धारा-144 के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज
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धारा-144 के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज
गाजियाबाद। गाजीपुर बॉर्डर पर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा लगाई धारा-144 के खिलाफ दाखिल की गई याचिका जिला न्यायाधीश नीरज निगम ने खारिज कर दी। अदालत ने अर्जी खारिज करते हुए कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति का अधिकार है। दूसरी तरफ संविधान की धारा 19(2) के तहत किसी भी नागरिक को ऐसी सभा या सम्मेलन आयोजित करने की स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती है जिससे शांतिभंग हो, देश की प्रभुता एवं अखंडता या लोक व्यवस्था संकट में पड़ जाए। अदालत ने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से जूझ रहा है। इस महामारी से काफी जनहानि हो चुकी है। सरकार द्वारा लोगों के स्वास्थ्य एवं जीवनसंकट को देखते हुए आपस में दूरी बनाए रखने के लिए समय-समय पर गाइडलाइन जारी की जा रही है। मामले की सभी परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश 20 जनवरी में कोई विधिक अनियमितता प्रतीत नहीं होती है। आदेश क्षेत्राधिकार के अंतर्गत पारित किया गया है, इसलिए अर्जी निरस्त की जाती है।
बता दें बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नाहर सिंह यादव, औरंगजेब सहित अन्य अधिवक्ताओं ने गाजीपुर बॉर्डर पर लगाई गई धारा-144 के खिलाफ जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की थी। इसमें कहा गया था कि जिला मजिस्ट्रेट को अधिकार नहीं है कि वह हाइवे और किसानों के धरना स्थल पर धारा-144 लगाएं। नाहर सिंह यादव का कहना है कि अदालत के फैसले को पढ़ा नहीं है, अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई आदेश हुआ है तो अवमानना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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गाजियाबाद। गाजीपुर बॉर्डर पर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा लगाई धारा-144 के खिलाफ दाखिल की गई याचिका जिला न्यायाधीश नीरज निगम ने खारिज कर दी। अदालत ने अर्जी खारिज करते हुए कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति का अधिकार है। दूसरी तरफ संविधान की धारा 19(2) के तहत किसी भी नागरिक को ऐसी सभा या सम्मेलन आयोजित करने की स्वतंत्रता नहीं दी जा सकती है जिससे शांतिभंग हो, देश की प्रभुता एवं अखंडता या लोक व्यवस्था संकट में पड़ जाए। अदालत ने कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व कोरोना वैश्विक महामारी से जूझ रहा है। इस महामारी से काफी जनहानि हो चुकी है। सरकार द्वारा लोगों के स्वास्थ्य एवं जीवनसंकट को देखते हुए आपस में दूरी बनाए रखने के लिए समय-समय पर गाइडलाइन जारी की जा रही है। मामले की सभी परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए जिला मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेश 20 जनवरी में कोई विधिक अनियमितता प्रतीत नहीं होती है। आदेश क्षेत्राधिकार के अंतर्गत पारित किया गया है, इसलिए अर्जी निरस्त की जाती है।
बता दें बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नाहर सिंह यादव, औरंगजेब सहित अन्य अधिवक्ताओं ने गाजीपुर बॉर्डर पर लगाई गई धारा-144 के खिलाफ जिला जज की अदालत में याचिका दाखिल की थी। इसमें कहा गया था कि जिला मजिस्ट्रेट को अधिकार नहीं है कि वह हाइवे और किसानों के धरना स्थल पर धारा-144 लगाएं। नाहर सिंह यादव का कहना है कि अदालत के फैसले को पढ़ा नहीं है, अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई आदेश हुआ है तो अवमानना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
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