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जिले से एक लाख वाहन होंगे बाहर
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ghaziabad news
नई स्क्रैप पॉलिसी के बाद जिले की सड़कों से करीब एक लाख वाहन बाहर हो जाएंगे। एनसीआर के बाहर के जिलों में फिटनेस टेस्ट के बाद 20 साल तक निजी वाहन चल सकेंगे। इसका असर एनसीआर के जिलों में रहने वाले ग्राहकों पर सीधे तौर पर पड़ेगा। संभावना है कि पॉलिसी में एनसीआर के जिलों को कोई लाभ नहीं मिलेगा। इसके बाद सीधे तौर पर एक लाख निजी वाहन अप्रैल तक सड़कों से वाहन हो जाएंगे। इसमें निजी फोर व्हीलर के साथ कॉमर्शियल वाहन शामिल हैं, जिनके बाहर होने से लोगों की जेब पर बोझ बढ़ेगा।
कारोबारियों को उम्मीद है कि घोषणा के बाद मार्च तक केंद्र सरकार से पूरी गाइडलाइन आ सकती है, जिसके बाद अप्रैल से ऑटोमोबाइल सेक्टर में उछाल आएगा। जिले में करीब एक लाख निजी और कॉमर्शियल वाहन ऐसे हैं, जो कबाड़ बन चुके हैं। अगर इनमें से 70 फीसदी लोग दोबारा वाहन खरीदते हैं तो यह साल ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए अच्छा रहने वाला है। स्क्रैप पॉलिसी के तहत अब 20 साल पुरानी निजी गाड़ियों और 15 साल पुराने कॉमर्शियल वाहनों को सड़कों पर दौड़ने के लिए फिटनेस टेस्ट को पास करना होगा। फिटनेस में फेल होने वाले वाहन देश में कहीं भी नहीं दौड़ा सकेंगे और उनको सड़कों से हटाने का काम किया जाएगा। 15 से 20 साल में अधिकांश वाहन कबाड़ की श्रेणी में आ जाते हैं। एनसीआर में डीजल वाहन 10 साल और पेट्रोल वाहन 15 वर्ष तक चल सकते हैं। इससे अब एक लाख वाहन बाहर होने जा रहे हैं। ऐसे में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को बूस्टर डोज मिलने के आसार हैं। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारी अप्रैल से बाजार में बूम आने की उम्मीद जता रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार से स्क्रैप पॉलिसी को लेकर जल्द ही पूरी गाइडलाइन आती है, तो इसका लाभ भी जल्द ही मिलना शुरू होगा।
ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को मिलेगी रफ्तार
गाजियाबाद में 500 से अधिक औद्योगिक इकाईयों में ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए अलग-अलग पार्ट्स तैयार किए जाते हैं। इंजन पार्ट्स से लेकर क्लच, रिंग्स सहित तमाम पार्ट्स जिले से ऑटोमोबाइल कंपनियों को तैयार कर दिए जाते हैं। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हुआ। ऐसे में स्क्रैप पॉलिसी लागू होने के बाद उत्पादन क्षमता 60 फीसदी तक बढ़ सकती है। एआरटीओ प्रशासन विश्वजीत सिंह ने बताया कि जिले में करीब एक लाख वाहन ऐसे हैं, जिनकी मियाद पूरी हो चुकी है। एनसीआर में इनके संचालन पर प्रतिबंध है, लेकिन इस तरह के वाहन दूसरे राज्यों से एनओसी लेकर चलते हैं। स्क्रैप पॉलिसी को लेकर गाइडलाइन आने के बाद इनके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का रिन्यूवल नहीं होगा। इससे उन्हें स्क्रैप में ही बेचना पड़ सकता है।
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कारोबारियों को उम्मीद है कि घोषणा के बाद मार्च तक केंद्र सरकार से पूरी गाइडलाइन आ सकती है, जिसके बाद अप्रैल से ऑटोमोबाइल सेक्टर में उछाल आएगा। जिले में करीब एक लाख निजी और कॉमर्शियल वाहन ऐसे हैं, जो कबाड़ बन चुके हैं। अगर इनमें से 70 फीसदी लोग दोबारा वाहन खरीदते हैं तो यह साल ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए अच्छा रहने वाला है। स्क्रैप पॉलिसी के तहत अब 20 साल पुरानी निजी गाड़ियों और 15 साल पुराने कॉमर्शियल वाहनों को सड़कों पर दौड़ने के लिए फिटनेस टेस्ट को पास करना होगा। फिटनेस में फेल होने वाले वाहन देश में कहीं भी नहीं दौड़ा सकेंगे और उनको सड़कों से हटाने का काम किया जाएगा। 15 से 20 साल में अधिकांश वाहन कबाड़ की श्रेणी में आ जाते हैं। एनसीआर में डीजल वाहन 10 साल और पेट्रोल वाहन 15 वर्ष तक चल सकते हैं। इससे अब एक लाख वाहन बाहर होने जा रहे हैं। ऐसे में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को बूस्टर डोज मिलने के आसार हैं। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारी अप्रैल से बाजार में बूम आने की उम्मीद जता रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार से स्क्रैप पॉलिसी को लेकर जल्द ही पूरी गाइडलाइन आती है, तो इसका लाभ भी जल्द ही मिलना शुरू होगा।
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ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को मिलेगी रफ्तार
गाजियाबाद में 500 से अधिक औद्योगिक इकाईयों में ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए अलग-अलग पार्ट्स तैयार किए जाते हैं। इंजन पार्ट्स से लेकर क्लच, रिंग्स सहित तमाम पार्ट्स जिले से ऑटोमोबाइल कंपनियों को तैयार कर दिए जाते हैं। कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान हुआ। ऐसे में स्क्रैप पॉलिसी लागू होने के बाद उत्पादन क्षमता 60 फीसदी तक बढ़ सकती है। एआरटीओ प्रशासन विश्वजीत सिंह ने बताया कि जिले में करीब एक लाख वाहन ऐसे हैं, जिनकी मियाद पूरी हो चुकी है। एनसीआर में इनके संचालन पर प्रतिबंध है, लेकिन इस तरह के वाहन दूसरे राज्यों से एनओसी लेकर चलते हैं। स्क्रैप पॉलिसी को लेकर गाइडलाइन आने के बाद इनके रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट का रिन्यूवल नहीं होगा। इससे उन्हें स्क्रैप में ही बेचना पड़ सकता है।
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