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जुनून से नई ऊंचाई छू रहीं पैरा एथलीट तृप्ति राजपूत
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तृप्ति
जुनून से नई ऊंचाई छू रहीं पैरा एथलीट तृप्ति राजपूत
गाजियाबाद। महामाया स्पोर्ट्स स्टेडियम में प्रैक्टिस करने वाली 16 वर्षीय पैरा एथलीट तृप्ति राजपूत ने अपने जुनून और हौसले से युवाओं के लिए आदर्श स्थापित किया है। 7 साल पहले वह घर के छत पर खड़ी होकर पड़ोसियों से बात कर रही थीं, तभी हाईटेंशन लाइन के करंट से उन्हें अपना बायां हाथ गंवाना पड़ा। फिर भी तृप्ति ने एथलीट बनने का सपना देखा और आज वह कामयाब हैं।
तृप्ति राजपूत को बचपन से ही खेलों में रुचि थी। उनके साथ दुर्घटना घटी तो एक पल के लिए उन्हें अपने सपने टूटते जरूर नजर आए, लेकिन उनके जुनून ने उन्हें हिम्मत नहीं हारने दी। तृप्ति ने अपनी प्रतिभा से सब को चौंकाया और देखते ही देखते स्कूल के खो-खो टीम में एक आत्मनिर्भर खिलाड़ी के रूप में शामिल हो गईं। उन्होंने जिलास्तरीय प्रतियोगिता में स्कूल के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया। नेशनल प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाली टीम का हिस्सा बनीं। बाद में उन्होंने नेटबॉल भी खेलना शुरू किया।
वह इस खेल में तीन बार जूनियर नेशनल टीम का हिस्सा रहीं। तृप्ति को एथलेटिक्स कोच अनीता नागर ने पैरा खेलों में हिस्सा लेने की सलाह दी। इसके बाद से वह स्टेडियम में 100 का 200 मीटर दौड़ की तैयारी कर रही हैं।
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पैरा ओलंपिक में गोल्ड जीतने का सपना
तृप्ति पैरा ओलंपिकमें देश का प्रतिनिधित्व कर गोल्ड जीतना चाहती हैं। इसके लिए वह कठिन परिश्रम कर रही हैं। चाहे परिस्थिति कैसी भी हो वह रोजाना महामाया स्टेडियम पहुंचती हैं। एथलेटिक्स कोच अनीता नागर ने बताया कि तृप्ति बेहद आत्मविश्वास से भरी और अनुशासित खिलाड़ी हैं। खुद को साबित करने की उनमें जो जिद है वह उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
तीन बार ऑपरेशन के बाद भी नहीं बनी बात
तृप्ति ने बताया कि हादसे के बाद उनके परिजनों ने उनका हाथ बचाने के लिए हर संभव कोशिश की। उनका तीन बार ऑपरेशन भी हुआ। अंत में डॉक्टर उनका हाथ बचाने में असफल रहे, लेकिन उनके परिजनों ने उन्हें कभी कमजोर महसूस नहीं होने दिया। हमेशा हौसला बढ़ाया। वह अपना आदर्श पिता कृष्ण कुमार राजपूत को मानती हैं। जो खुद भी हमेशा बेटी को अपना हीरो मनाते हैं। वह चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनका कहना है कि इस हादसे से निकलना उनके परिवार के लिए भी आसान नहीं था।
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गाजियाबाद। महामाया स्पोर्ट्स स्टेडियम में प्रैक्टिस करने वाली 16 वर्षीय पैरा एथलीट तृप्ति राजपूत ने अपने जुनून और हौसले से युवाओं के लिए आदर्श स्थापित किया है। 7 साल पहले वह घर के छत पर खड़ी होकर पड़ोसियों से बात कर रही थीं, तभी हाईटेंशन लाइन के करंट से उन्हें अपना बायां हाथ गंवाना पड़ा। फिर भी तृप्ति ने एथलीट बनने का सपना देखा और आज वह कामयाब हैं।
तृप्ति राजपूत को बचपन से ही खेलों में रुचि थी। उनके साथ दुर्घटना घटी तो एक पल के लिए उन्हें अपने सपने टूटते जरूर नजर आए, लेकिन उनके जुनून ने उन्हें हिम्मत नहीं हारने दी। तृप्ति ने अपनी प्रतिभा से सब को चौंकाया और देखते ही देखते स्कूल के खो-खो टीम में एक आत्मनिर्भर खिलाड़ी के रूप में शामिल हो गईं। उन्होंने जिलास्तरीय प्रतियोगिता में स्कूल के लिए बेहतरीन प्रदर्शन किया। नेशनल प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाली टीम का हिस्सा बनीं। बाद में उन्होंने नेटबॉल भी खेलना शुरू किया।
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वह इस खेल में तीन बार जूनियर नेशनल टीम का हिस्सा रहीं। तृप्ति को एथलेटिक्स कोच अनीता नागर ने पैरा खेलों में हिस्सा लेने की सलाह दी। इसके बाद से वह स्टेडियम में 100 का 200 मीटर दौड़ की तैयारी कर रही हैं।
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पैरा ओलंपिक में गोल्ड जीतने का सपना
तृप्ति पैरा ओलंपिकमें देश का प्रतिनिधित्व कर गोल्ड जीतना चाहती हैं। इसके लिए वह कठिन परिश्रम कर रही हैं। चाहे परिस्थिति कैसी भी हो वह रोजाना महामाया स्टेडियम पहुंचती हैं। एथलेटिक्स कोच अनीता नागर ने बताया कि तृप्ति बेहद आत्मविश्वास से भरी और अनुशासित खिलाड़ी हैं। खुद को साबित करने की उनमें जो जिद है वह उन्हें नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
तीन बार ऑपरेशन के बाद भी नहीं बनी बात
तृप्ति ने बताया कि हादसे के बाद उनके परिजनों ने उनका हाथ बचाने के लिए हर संभव कोशिश की। उनका तीन बार ऑपरेशन भी हुआ। अंत में डॉक्टर उनका हाथ बचाने में असफल रहे, लेकिन उनके परिजनों ने उन्हें कभी कमजोर महसूस नहीं होने दिया। हमेशा हौसला बढ़ाया। वह अपना आदर्श पिता कृष्ण कुमार राजपूत को मानती हैं। जो खुद भी हमेशा बेटी को अपना हीरो मनाते हैं। वह चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनका कहना है कि इस हादसे से निकलना उनके परिवार के लिए भी आसान नहीं था।