{"_id":"674d157e0433f897840c2b0b","slug":"ghaziabad-news-13-companies-registered-on-student-pan-number-gst-dues-of-rs-37-57-crore-ghaziabad-2024-12-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"UP: छात्र के पैन नंबर पर 13 कंपनियां... 37.57 करोड़ का जीएसटी बकाया; ऐसे हुआ मामला का खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
UP: छात्र के पैन नंबर पर 13 कंपनियां... 37.57 करोड़ का जीएसटी बकाया; ऐसे हुआ मामला का खुलासा
Mon, 02 Dec 2024 10:16 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 02 Dec 2024 10:16 AM IST
सार
छात्र के पैन नंबर पर 13 कंपनियां रजिस्टर्ड करने का मामला सामने आया है। इन कंपनियों ने धोखाधड़ी कर 37.57 करोड़ का जीएसटी बकाया भी जमा नहीं किया। छात्र की ईमेल और डाक द्वारा आयकर विभाग का नोटिस मिलने के बाद मामले का खुलासा हुआ।
विज्ञापन
PAN Card
- फोटो : AdobeStock
विस्तार
तमिलनाडु में एमबीए की शिक्षा ग्रहण करने के दौरान छात्र के पैन नंबर का दुरुपयोग किया गया। वर्ष 2022 से अब तक छात्र के पैन कार्ड पर 13 कंपनी रजिस्टर्ड कर दी गई। इन कंपनियों ने धोखाधड़ी कर जीएसटी भी जमा नहीं की।
अब छात्र की ईमेल और डाक द्वारा आयकर विभाग का नोटिस भेजा गया है। इसमें जीएसटी के करीब 37.57 करोड़ रुपये बकाया जमा करने की बात कही गई है। छात्र के पिता ने कोर्ट के आदेश पर कविनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
आरडीसी निवासी अम्बरीश कुमार त्यागी ने बताया कि उनका बेटा ईशू त्यागी वर्ष 2022 तक इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट तिरुचिरापल्ली तमिलनाडु से एमबीए का छात्र रहा है। इसके बाद एक निजी कंपनी में ईशू त्यागी का चयन हो गया।
विज्ञापन
नौकरी लगने पर ईशू त्यागी ने अपना पैन कार्ड आयकर विभाग पोर्टल पर पंजीकृत किया। इसके बाद आयकर विभाग ने ईशू त्यागी की ईमेल और डाक द्वारा नोटिस भेजकर वर्ष 2019 में तीन कंपनी रजिस्टर्ड होने की बात कही।
विज्ञापन
अब छात्र की ईमेल और डाक द्वारा आयकर विभाग का नोटिस भेजा गया है। इसमें जीएसटी के करीब 37.57 करोड़ रुपये बकाया जमा करने की बात कही गई है। छात्र के पिता ने कोर्ट के आदेश पर कविनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।
विज्ञापन
आरडीसी निवासी अम्बरीश कुमार त्यागी ने बताया कि उनका बेटा ईशू त्यागी वर्ष 2022 तक इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट तिरुचिरापल्ली तमिलनाडु से एमबीए का छात्र रहा है। इसके बाद एक निजी कंपनी में ईशू त्यागी का चयन हो गया।
विज्ञापन
नौकरी लगने पर ईशू त्यागी ने अपना पैन कार्ड आयकर विभाग पोर्टल पर पंजीकृत किया। इसके बाद आयकर विभाग ने ईशू त्यागी की ईमेल और डाक द्वारा नोटिस भेजकर वर्ष 2019 में तीन कंपनी रजिस्टर्ड होने की बात कही।
छानबीन में पता चला कि पैन कार्ड पर रजिस्टर्ड कंपनियों ने जीएसटी नंबर भी लिए हैं। समय-समय पर पैन नंबर पर टीडीएस भी जमा किया गया। वर्तमान में ईशू के पैन कार्ड नंबर पर 13 कंपनियां रजिस्टर्ड हैं और व्यापार में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है।
पीड़ित का दावा है कि हम दोनों पिता-पुत्र ने आज तक कोई व्यापारिक गतिविधियां नहीं की। जबकि उनके बेटे के नाम से खरीद और बिक्री भी की गई है।
पीड़ित ने फर्जी तरीके से जीएसटी नंबरों की फर्म से खरीद व बिक्री करने वाली सभी फर्म के खिलाफ धोखाधड़ी, जीएसटी की चोरी और फर्मों को पंजीकरण करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है।
469 करोड़ की आईटीसी वसूलने के लिए बनाईं 100 से ज्यादा फर्मे
बोगस फर्म का जिले में ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी राज्यकर, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर और डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस की टीमें बोगस फर्मों का खुलासा कर चुकी हैं। इस साल अक्तूबर में राज्यकर विभाग ने 106 बोगस फर्म से 469 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा किया था।
बोगस फर्म का जिले में ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी राज्यकर, केंद्रीय वस्तु एवं सेवाकर और डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस की टीमें बोगस फर्मों का खुलासा कर चुकी हैं। इस साल अक्तूबर में राज्यकर विभाग ने 106 बोगस फर्म से 469 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा किया था।
इन फर्मों से 2,605 करोड़ के कारोबार को आईटीसी क्लेम करने के लिए दिखाया गया। शक होने पर अधिकारियों ने जांच शुरू की तो पता चला कि दिल्ली के दो भाई विक्रांत, सचिन और इनके सहयोगी गौरव जैन ने फर्मों के जरिए विभाग को चूना लगाया। कागजी खरीद-फरोख्त में बिल्डिंग मैटेरियल का लेनदेन दिखाया गया।
इसके अलावा कई पतों पर सीए और वकीलों के मकान के दस्तावेज का प्रयोग भी जालसाज कर चुके हैं। विभाग के जांच करने पर ज्यादातर मामलों में बोगस फर्म की जगह पर खाली प्लॉट या किसी साधारण व्यक्ति का मकान मिला है, जिससे जांच में कुछ सामने नहीं आता।