{"_id":"573b75034f1c1b644eac820f","slug":"ghaziabad-is-fatal-to-the-ears-of-the-noise","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानों के लिए घातक है गाजियाबाद का शोर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कानों के लिए घातक है गाजियाबाद का शोर
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 18 May 2016 01:16 AM IST
विज्ञापन
हेल्थ
- फोटो : getty images
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आपके कानों के लिए गाजियाबाद का शोर घातक है। मौजूदा हालात ये हैं कि मानक से 20 डेसिबल अधिक शोर आपके कानों तक पहुंच रहा है, जो सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस की स्थिति तक पहुंचा रहा है।
विज्ञापन
इस वक्त गाजियाबाद का ध्वनि प्रदूषण 75.60 डेसिबल है, जो 55 डेसिबल के स्वीकृत ध्वनि प्रदूषण से 20.60 डेसिबल ज्यादा है। ईएनटी स्पेशलिस्ट की मानें तो ये खतरे की घंटी है। एक्सपर्ट की मानें तो हर वर्ष 10 हजार लोग हियरिंग लॉस की चपेट में आते हैं।
विज्ञापन
बीते वर्ष के मुकाबले गाजियाबाद के ध्वनि प्रदूषण में मामूली कमी आई है, लेकिन फिर भी ज्यादा है। वर्ष 2014 में बीते चार वर्ष में ध्वनि प्रदूषण सबसे ज्यादा 78.80 डेसिबल मापा गया था। वर्ष 2013 में 75.67 और वर्ष 2012 में 75.80 डेसिबल ध्वनि प्रदूषण है।
विज्ञापन
गाजियाबाद में ध्वनि प्रदूषण की नियमित जांच नहीं की जाती है, जिससे कोई रियल टाइम डाटा उपलब्ध नहीं है। ये अनुमान जरूर है कि पीकआवर्स के दौरान ध्वनि प्रदूषण 90 डेसिबल तक पहुंच जाता है। हर वर्ष दीवाली के लिए दौरान ही ध्वनि प्रदूषण मापा जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वसुंधरा के क्षेत्रीय प्रबंधक पारसनाथ ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण में बीते वर्षों के मुकाबले कमी आई है।
70 डेसिबल अधिक शोर है घातक
ईएनटी स्पेशलिस्ट एंड हेड सर्जन डा. बीपी त्यागी ने बताया कि 70 फीसदी से अधिक शोर कानों के लिए घातक है। कान के विभिन्न रोगों से ग्रस्त हर 100 मरीजों में से 20 सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस से ग्रस्त होते हैं।
उन्होंने बताया कि सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस में मस्तिष्क की आठवीं क्रेनिएल नर्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसका पता अचानक नहीं चलता पर समय बीते के साथ ही कानों तक पहुंचने वाली आवाज की गुणवत्ता गिरती जाती है।