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एक लाख रुपये महीना दो और ड्राइवर रखो...तभी दूंगी खाना
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एक लाख रुपये महीना दो और ड्राइवर रखो...तभी दूंगी खाना
गाजियाबाद। सखी वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, उत्पीड़न के मामले की शिकायत आम बात हो गई है। इन दिनों एक नया मामला आया है। पत्नी ने पति पर आरोप लगाया है कि वह बेटे-बहू को एक लाख रुपये देते हैं और बहू के लिए ड्राइवर रखा है। अब मुझे भी एक लाख रुपये देंगे और ड्राइवर रखेंगे तभी खाना दूंगी। इस अनोखे मामले से सेंटर मैनेजर से लेकर काउंसलर सभी असमंजस में हैं कि समझौता कैसे कराएं। वर्ष 2016 से अब तक वन स्टॉप सेंटर में कुल 5658 केस पंजीकृत हुए हैं।
वन स्टॉप सेंटर में आने वाले कुल मामलों में से घरेलू हिंसा के 20 फीसदी मामले हाई सोसायटी के होते हैं। जिसमें इंदिरापुरम, वसुंधरा, वैशाली, राजनगर, कविनगर, राजनगर एक्सटेंशन और क्रासिंग के मामले आ रहे हैं। काउंसलर अंजना चौहान ने बताया कि कौशांबी में पर्यावरण संरक्षण एनजीओ चलाने वाली महिला ने शिकायत की थी कि बकाया मांगने कार्यालय में और सोसायटी में चले आते हैं जिससे सोसायटी में उनकी छवि खराब हो रही है। वहीं प्रतिवादी का पक्ष पूछा गया तो पता चला कि गुड़गांव की कंपनी से उन्होंने 24 लाख के बकाया पौधे लिए हैं लेकिन उसका भुगतान नहीं कर रही हैं। मांगने आने पर शिकायत दर्ज करा दी है।
केस -1
राजनगर निवासी 64 वर्षीय महिला ने अपने पति के खिलाफ शिकायत की है कि वह सिर्फ बच्चों की सुनते हैं और बच्चे भी पति की शह की वजह से उनका सम्मान नहीं करते। उनकी यह मांग है कि जब वह बहू-बेटे को एक लाख महीने का खर्चा देते हैं तो वह उन्हें भी एक लाख महीना दें और बहू के लिए ड्राइवर रखा है तो वह उनके लिए भी ड्राइवर रखें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह बेटे-बहू के साथ रहें, उन्हें घर में हिस्सा देकर अलग कर दें। काउंसिलिंग के दौरान पति ने कुछ शर्तें मानी लेकिन ड्राइवर वाली बात पर उन्होंने कहा कि जहां भी जाना होता है मैं लेकर जाता हूं तो ड्राइवर की क्या जरूरत। 69 वर्षीय पति काफी असमंजस की स्थिति में थे कि वह अब रहें किसके पास।
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केस -2
इंदिरापुरम निवासी जोड़े की शादी को ढाई साल हो गए हैं। पति ने हाल ही में 10 लाख से अधिक की नई कार और डायमंड की अंगूठी भी उपहार में दी है लेकिन पत्नी की शिकायत है कि वह समय नहीं देते हैं। पत्नी ने सेंटर पर शिकायत की है कि वह साथ नहीं रहना चाहती वह अलग होना चाहती है। इसके साथ ही पति शराब भी पीते हैं। काउंसलर ने जब पूछा कि क्या शराब पीकर उत्पीड़न करते हैं तो उनका कहना था कि नहीं लेकिन वह नहीं चाहती कि पति शराब पीएं। पति ने कहा कि वह पहले सोसायटी के स्टैंडर्ड को बनाए रखने केलिए शराब पीते थे लेकिन अब यह आदत बन गई है। जल्द ही शराब पीना भी छोड़ देंगे।
हाई सोसायटी के मामले 20 फीसदी से अधिक होते हैं। कोई मारपीट या उत्पीड़न के मामले नहीं होते लेकिन इगो और छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा बढ़ जाता है जो सेंटर तक पहुंचता है। उनकी काउंसिलिंग करा कर यहीं पर मामले सुलझा लिए जाते हैं। कुछ मामले ही कोर्ट में जाते हैं।
इनसेट:
वर्ष कुल केस घरेलू हिंसा
वर्ष 2022 ---- 832 350
वर्ष 2021 ----- 1011 507
वर्ष 2020 ------ 1171 701
वर्ष 2019 ----- 930 612
वर्ष 2018 ---- 908 654
वर्ष 2017 --- 592 388
वर्ष 2016 ---- 212 163
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गाजियाबाद। सखी वन स्टॉप सेंटर में घरेलू हिंसा, उत्पीड़न के मामले की शिकायत आम बात हो गई है। इन दिनों एक नया मामला आया है। पत्नी ने पति पर आरोप लगाया है कि वह बेटे-बहू को एक लाख रुपये देते हैं और बहू के लिए ड्राइवर रखा है। अब मुझे भी एक लाख रुपये देंगे और ड्राइवर रखेंगे तभी खाना दूंगी। इस अनोखे मामले से सेंटर मैनेजर से लेकर काउंसलर सभी असमंजस में हैं कि समझौता कैसे कराएं। वर्ष 2016 से अब तक वन स्टॉप सेंटर में कुल 5658 केस पंजीकृत हुए हैं।
वन स्टॉप सेंटर में आने वाले कुल मामलों में से घरेलू हिंसा के 20 फीसदी मामले हाई सोसायटी के होते हैं। जिसमें इंदिरापुरम, वसुंधरा, वैशाली, राजनगर, कविनगर, राजनगर एक्सटेंशन और क्रासिंग के मामले आ रहे हैं। काउंसलर अंजना चौहान ने बताया कि कौशांबी में पर्यावरण संरक्षण एनजीओ चलाने वाली महिला ने शिकायत की थी कि बकाया मांगने कार्यालय में और सोसायटी में चले आते हैं जिससे सोसायटी में उनकी छवि खराब हो रही है। वहीं प्रतिवादी का पक्ष पूछा गया तो पता चला कि गुड़गांव की कंपनी से उन्होंने 24 लाख के बकाया पौधे लिए हैं लेकिन उसका भुगतान नहीं कर रही हैं। मांगने आने पर शिकायत दर्ज करा दी है।
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केस -1
राजनगर निवासी 64 वर्षीय महिला ने अपने पति के खिलाफ शिकायत की है कि वह सिर्फ बच्चों की सुनते हैं और बच्चे भी पति की शह की वजह से उनका सम्मान नहीं करते। उनकी यह मांग है कि जब वह बहू-बेटे को एक लाख महीने का खर्चा देते हैं तो वह उन्हें भी एक लाख महीना दें और बहू के लिए ड्राइवर रखा है तो वह उनके लिए भी ड्राइवर रखें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह बेटे-बहू के साथ रहें, उन्हें घर में हिस्सा देकर अलग कर दें। काउंसिलिंग के दौरान पति ने कुछ शर्तें मानी लेकिन ड्राइवर वाली बात पर उन्होंने कहा कि जहां भी जाना होता है मैं लेकर जाता हूं तो ड्राइवर की क्या जरूरत। 69 वर्षीय पति काफी असमंजस की स्थिति में थे कि वह अब रहें किसके पास।
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केस -2
इंदिरापुरम निवासी जोड़े की शादी को ढाई साल हो गए हैं। पति ने हाल ही में 10 लाख से अधिक की नई कार और डायमंड की अंगूठी भी उपहार में दी है लेकिन पत्नी की शिकायत है कि वह समय नहीं देते हैं। पत्नी ने सेंटर पर शिकायत की है कि वह साथ नहीं रहना चाहती वह अलग होना चाहती है। इसके साथ ही पति शराब भी पीते हैं। काउंसलर ने जब पूछा कि क्या शराब पीकर उत्पीड़न करते हैं तो उनका कहना था कि नहीं लेकिन वह नहीं चाहती कि पति शराब पीएं। पति ने कहा कि वह पहले सोसायटी के स्टैंडर्ड को बनाए रखने केलिए शराब पीते थे लेकिन अब यह आदत बन गई है। जल्द ही शराब पीना भी छोड़ देंगे।
हाई सोसायटी के मामले 20 फीसदी से अधिक होते हैं। कोई मारपीट या उत्पीड़न के मामले नहीं होते लेकिन इगो और छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा बढ़ जाता है जो सेंटर तक पहुंचता है। उनकी काउंसिलिंग करा कर यहीं पर मामले सुलझा लिए जाते हैं। कुछ मामले ही कोर्ट में जाते हैं।
इनसेट:
वर्ष कुल केस घरेलू हिंसा
वर्ष 2022 ---- 832 350
वर्ष 2021 ----- 1011 507
वर्ष 2020 ------ 1171 701
वर्ष 2019 ----- 930 612
वर्ष 2018 ---- 908 654
वर्ष 2017 --- 592 388
वर्ष 2016 ---- 212 163