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81 बिल्डरों ने की 500 करोड़ की स्टांप चोरी
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81 बिल्डरों ने की 500 करोड़ की स्टांप चोरी
गाजियाबाद। शहर में 81 बिल्डरों ने 500 करोड़ की स्टांप चोरी की है। यह चोरी बिना रजिस्ट्री कराए ही 30749 फ्लैट पर खरीदारों को कब्जा देकर की गई है। इसका खुलासा स्टांप विभाग के हाल ही में कराए गए सर्वे में हुआ है। इसके बाद इन सभी बिल्डरों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर वे जल्द ही रजिस्ट्री कराकर स्टांप शुल्क जमा नहीं कराते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
बिना रजिस्ट्री के फ्लैट पर कब्जा देने का खेल लंबे समय से चल रहा है। सिर्फ निजी बिल्डर ही नहीं, आवास विकास और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने भी बड़ी संख्या में संपत्तियों की रजिस्ट्री नहीं कराई है। इससे सरकार को स्टांप के रूप में राजस्व नहीं मिल पाया है। सर्वे के बाद स्टांप चोरी करने वाले सभी विभाग, संस्थाओं, निजी बिल्डरों और समितियों की सूची तैयार कर ली गई है। शहर में कुल 30 हजार से ज्यादा संपत्ति बिना रजिस्ट्री के बेची गई हैं। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और आवास विभाग की विभिन्न योजनाओं में आवंटित 3398 संपत्तियों में भी 31 करोड़ से अधिक की स्टांप शुल्क राजस्व विभाग को नहीं मिला है।
राजनगर एक्सटेंशन में सबसे ज्यादा मामले
शहर में स्टांप चोरी के सबसे ज्यादा मामले राजनगर एक्सटेंशन में मिले हैं। यहां करीब 180 करोड़ की स्टांप चोरी मिली है। कुल 15 फीसदी संपत्तियों की ही रजिस्ट्री कराई गई है। यहां करीब 40 से अधिक बिल्डरों ने अपार्टमेंट बनाए हैं। इनमें 7438 फ्लैट हैं। बिल्डरों ने मात्र 1118 फ्लैटों की ही रजिस्ट्री कराई है जबकि 80 फीसदी से अधिक फ्लैट बिक चुके हैं और उसमें लोग रह रहे हैं।
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केस दर्ज कराएंगे
एआईजी स्टांप केके मिश्रा ने बताया कि सरकारी संस्थाओं के विभागाध्यक्षों को नोटिस भेज दिया गया है। बिल्डरों को नोटिस देकर कहा गया है कि रजिस्ट्री नहीं कराने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सभी सर्किलों के उप निबंधक को भी निर्देशित कर दिया गया है कि वह स्टांप चोरी करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करें।
फर्म कुल बेचे फ्लैट रजिस्ट्री कराई
1. वेवसिटी 2400 200
2. आदित्य वर्ल्ड सिटी 2000 1500
3. मैसर्स फ्रेंडस लैंड डेवलपर्स 752 36
4. सैवफेब बिल्डटेक 980 76
5. साया गोल्ड 1400 758
06. गौड़ सिद्धार्थम 2500 175
जीडीए ने सिर्फ 22 फ्लैट की रजिस्ट्री कराई
आवास विकास परिषद ने सिद्धार्थ विहार योजना में 3500 फ्लैट बनाए जबकि रजिस्ट्री सिर्फ 697 की कराई गई। जीडीए ने पिछले कुछ सालों में जो 795 फ्लैट बनाए हैं, उनमें रजिस्ट्री महज 227 की कराई है। अलग-अलग क्षेत्र में कराए गए सर्वे में चंद्रशिला कॉलोनी में 400 फ्लैट में से सिर्फ छह की रजिस्ट्री मिली।
31 जुलाई तक एकमुश्त समाधान योजना
एडीएम वित्त एवं राजस्व विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि 31 जुलाई तक एकमुश्त समाधान योजना चल रही है। स्टांप चोरी के वादों को 100 रुपये का अर्थदंड लगाकर निस्तारित किया जाएगा। ब्याज डेढ़ प्रतिशत सालाना के हिसाब से जमा करना होगा। इसके अलावा संपत्ति की रजिस्ट्री के समय जितना स्टांप कम लगाया है उसे जमा करना होगा। ओटीएस का लाभ लेने के लिए अभी तक पांच आवेदन आए हैं।
रजिस्ट्री नहीं कराने से आवंटी को नुकसान
रजिस्ट्री नहीं कराने से आवंटी को मालिकाना हक नहीं मिलता है। वह कहीं लोन नहीं ले सकता है और फ्लैट को बेच नहीं सकता है। उसे बिल्डर पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार बिल्डर एक ही फ्लैट को कई लोगों को बेच देता है। प्रशासन को सख्त रुख अपनाना होगा ताकि लाखों करोड़ों खर्च कर आशियाना लेने वालों को उनका हक मिल सके।
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गाजियाबाद। शहर में 81 बिल्डरों ने 500 करोड़ की स्टांप चोरी की है। यह चोरी बिना रजिस्ट्री कराए ही 30749 फ्लैट पर खरीदारों को कब्जा देकर की गई है। इसका खुलासा स्टांप विभाग के हाल ही में कराए गए सर्वे में हुआ है। इसके बाद इन सभी बिल्डरों को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर वे जल्द ही रजिस्ट्री कराकर स्टांप शुल्क जमा नहीं कराते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
बिना रजिस्ट्री के फ्लैट पर कब्जा देने का खेल लंबे समय से चल रहा है। सिर्फ निजी बिल्डर ही नहीं, आवास विकास और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने भी बड़ी संख्या में संपत्तियों की रजिस्ट्री नहीं कराई है। इससे सरकार को स्टांप के रूप में राजस्व नहीं मिल पाया है। सर्वे के बाद स्टांप चोरी करने वाले सभी विभाग, संस्थाओं, निजी बिल्डरों और समितियों की सूची तैयार कर ली गई है। शहर में कुल 30 हजार से ज्यादा संपत्ति बिना रजिस्ट्री के बेची गई हैं। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और आवास विभाग की विभिन्न योजनाओं में आवंटित 3398 संपत्तियों में भी 31 करोड़ से अधिक की स्टांप शुल्क राजस्व विभाग को नहीं मिला है।
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राजनगर एक्सटेंशन में सबसे ज्यादा मामले
शहर में स्टांप चोरी के सबसे ज्यादा मामले राजनगर एक्सटेंशन में मिले हैं। यहां करीब 180 करोड़ की स्टांप चोरी मिली है। कुल 15 फीसदी संपत्तियों की ही रजिस्ट्री कराई गई है। यहां करीब 40 से अधिक बिल्डरों ने अपार्टमेंट बनाए हैं। इनमें 7438 फ्लैट हैं। बिल्डरों ने मात्र 1118 फ्लैटों की ही रजिस्ट्री कराई है जबकि 80 फीसदी से अधिक फ्लैट बिक चुके हैं और उसमें लोग रह रहे हैं।
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केस दर्ज कराएंगे
एआईजी स्टांप केके मिश्रा ने बताया कि सरकारी संस्थाओं के विभागाध्यक्षों को नोटिस भेज दिया गया है। बिल्डरों को नोटिस देकर कहा गया है कि रजिस्ट्री नहीं कराने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सभी सर्किलों के उप निबंधक को भी निर्देशित कर दिया गया है कि वह स्टांप चोरी करने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करें।
फर्म कुल बेचे फ्लैट रजिस्ट्री कराई
1. वेवसिटी 2400 200
2. आदित्य वर्ल्ड सिटी 2000 1500
3. मैसर्स फ्रेंडस लैंड डेवलपर्स 752 36
4. सैवफेब बिल्डटेक 980 76
5. साया गोल्ड 1400 758
06. गौड़ सिद्धार्थम 2500 175
जीडीए ने सिर्फ 22 फ्लैट की रजिस्ट्री कराई
आवास विकास परिषद ने सिद्धार्थ विहार योजना में 3500 फ्लैट बनाए जबकि रजिस्ट्री सिर्फ 697 की कराई गई। जीडीए ने पिछले कुछ सालों में जो 795 फ्लैट बनाए हैं, उनमें रजिस्ट्री महज 227 की कराई है। अलग-अलग क्षेत्र में कराए गए सर्वे में चंद्रशिला कॉलोनी में 400 फ्लैट में से सिर्फ छह की रजिस्ट्री मिली।
31 जुलाई तक एकमुश्त समाधान योजना
एडीएम वित्त एवं राजस्व विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि 31 जुलाई तक एकमुश्त समाधान योजना चल रही है। स्टांप चोरी के वादों को 100 रुपये का अर्थदंड लगाकर निस्तारित किया जाएगा। ब्याज डेढ़ प्रतिशत सालाना के हिसाब से जमा करना होगा। इसके अलावा संपत्ति की रजिस्ट्री के समय जितना स्टांप कम लगाया है उसे जमा करना होगा। ओटीएस का लाभ लेने के लिए अभी तक पांच आवेदन आए हैं।
रजिस्ट्री नहीं कराने से आवंटी को नुकसान
रजिस्ट्री नहीं कराने से आवंटी को मालिकाना हक नहीं मिलता है। वह कहीं लोन नहीं ले सकता है और फ्लैट को बेच नहीं सकता है। उसे बिल्डर पर निर्भर रहना पड़ता है। कई बार बिल्डर एक ही फ्लैट को कई लोगों को बेच देता है। प्रशासन को सख्त रुख अपनाना होगा ताकि लाखों करोड़ों खर्च कर आशियाना लेने वालों को उनका हक मिल सके।