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जालसाजी से बेची बंजर जमीन, 35 साल बाद मुकदमा
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जालसाजी से बेची बंजर जमीन, 35 साल बाद मुकदमा
गाजियाबाद। तहसील सदर के मटियाला गांव में 35 साल पहले जालसाजी कर बंजर जमीन को अपने नाम कराकर बेचने के मामले में अशोक संयुक्त सहकारी समिति और अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति के सदस्यों के खिलाफ क्षेत्रीय लेखपाल वैशाली गोयल की ओर से सिहानी गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के लिए 2012 में धारा थ्रीडी के प्रकाशन के बाद फर्जीवाड़ा कर ग्राम सभा की जमीन को अपने नाम कराकर अधिकारियों की मिलीभगत से बैनामा कर 22 करोड़ से अधिक मुआवजा हड़पने वाले अरुण गुप्ता, गोल्डी गुप्ता समेत अशोक संयुक्त सहकारी समिति और अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति के सदस्यों का एक और कारनामा सामने आया है। दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया गया है कि 1987 में तहसील सदर के मटियाला गांव में खसरा नंबर 618 में दर्ज बंजर जमीन को कागजों में हेरफेर कर अपने नाम दर्ज करा लिया और 1987 में एक बीघा सात बिस्वा जमीन अशोक संयुक्त सहकारी गृह निर्माण खेती समिति लिमिटेड के अध्यक्ष गोल्डी गुप्ता निवासी ए-2/83 सफदरजंग एंक्लेव नई दिल्ली ने शास्त्री नगर निवासी आरके को बेच दी। इसी गांव में 1323 नंबर बैनामे की जांच की गई तो पता चला कि खसरा नंबर 507 रकबा तीन बीघा पांच विस्वा बंजर जमीन को हेरफर कर समिति के अध्यक्ष गोल्डी गुप्ता ने दरीबाकलां दिल्ली निवासी धनेंद्र कुमार, सुनील कुमार व अनिल कुमार को बेच दी। दोनों नंबर बंजर में दर्ज हैं। एडीएम प्रशासन रितु सुहास ने बताया कि समिति बनाकर आरोपियों ने कई गांवों में सरकारी जमीन में हेरफेर की है। समिति सदस्यों द्वारा सरकारी जमीन को जालसाजी कर बेचने के मामले में छठी एफआईआर है। गोल्डी गुप्ता, आरके सिंह, धनेंद्र कुमार, सुनील कुमार के खिलाफ जालसाजी व धोखाधड़ी कर सरकारी जमीन बेचने और खरीदने का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
अब तक 11 के खिलाफ रिपोर्ट, दो को जेल
बंजर और ऊसर जमीन को कागजों में हेरफेर कर अपने और समिति के नाम कराकर बेचने के मामले में अब तक मास्टर माइंड गोल्डी गुप्ता, अरुण गुप्ता समेत 11 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में अधिग्रहण के बाद सरकारी जमीन बेचकर करोड़ों का मुआवजा हड़पने वाले गोल्डी गुप्ता और उनके साथी सुधाकर मिश्रा को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है। फर्जीवाड़ा करने वाले नौ आरोपी अभी तक पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। अभी समिति और उनके सदस्यों के खिलाफ पांच एफआईआर सिहानी गेट और एक एफआईआर कविनगर में दर्ज कराई जा चुकी है।
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एसआईटी की जांच एक कदम भी नहीं चली
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में धारा थ्रीडी के बाद सरकारी जमीन बेचकर 22 करोड़ का मुआवजा हड़पने वाले आरोपियों के खिलाफ शासन के आदेश के बाद एसआईटी जांच शुरू होने के 15 दिन बाद भी जांच एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है। 20 मई का रसूलपुर सिकरोडा गांव की जमीन बेचने और करोड़ों का मुआवजा हड़पने की रिपोर्ट सिहानी गेट थाने में अरुण गुप्ता समेत आठ लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट में अरुण गुप्ता, किसमिश, फतेह मोहम्मद, सुधाकर मिश्रा को नामजद किया गया। इसके अलावा चार नाम को नहीं खोला गया। तत्कालीन राजस्व कर्मी, सब रजिस्ट्रार, राजस्व कर्मी और भूमि अध्यप्ति का नाम आज तक नहीं खोला गया है।
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गाजियाबाद। तहसील सदर के मटियाला गांव में 35 साल पहले जालसाजी कर बंजर जमीन को अपने नाम कराकर बेचने के मामले में अशोक संयुक्त सहकारी समिति और अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति के सदस्यों के खिलाफ क्षेत्रीय लेखपाल वैशाली गोयल की ओर से सिहानी गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के लिए 2012 में धारा थ्रीडी के प्रकाशन के बाद फर्जीवाड़ा कर ग्राम सभा की जमीन को अपने नाम कराकर अधिकारियों की मिलीभगत से बैनामा कर 22 करोड़ से अधिक मुआवजा हड़पने वाले अरुण गुप्ता, गोल्डी गुप्ता समेत अशोक संयुक्त सहकारी समिति और अशोक सहकारी गृह निर्माण समिति के सदस्यों का एक और कारनामा सामने आया है। दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया गया है कि 1987 में तहसील सदर के मटियाला गांव में खसरा नंबर 618 में दर्ज बंजर जमीन को कागजों में हेरफेर कर अपने नाम दर्ज करा लिया और 1987 में एक बीघा सात बिस्वा जमीन अशोक संयुक्त सहकारी गृह निर्माण खेती समिति लिमिटेड के अध्यक्ष गोल्डी गुप्ता निवासी ए-2/83 सफदरजंग एंक्लेव नई दिल्ली ने शास्त्री नगर निवासी आरके को बेच दी। इसी गांव में 1323 नंबर बैनामे की जांच की गई तो पता चला कि खसरा नंबर 507 रकबा तीन बीघा पांच विस्वा बंजर जमीन को हेरफर कर समिति के अध्यक्ष गोल्डी गुप्ता ने दरीबाकलां दिल्ली निवासी धनेंद्र कुमार, सुनील कुमार व अनिल कुमार को बेच दी। दोनों नंबर बंजर में दर्ज हैं। एडीएम प्रशासन रितु सुहास ने बताया कि समिति बनाकर आरोपियों ने कई गांवों में सरकारी जमीन में हेरफेर की है। समिति सदस्यों द्वारा सरकारी जमीन को जालसाजी कर बेचने के मामले में छठी एफआईआर है। गोल्डी गुप्ता, आरके सिंह, धनेंद्र कुमार, सुनील कुमार के खिलाफ जालसाजी व धोखाधड़ी कर सरकारी जमीन बेचने और खरीदने का मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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अब तक 11 के खिलाफ रिपोर्ट, दो को जेल
बंजर और ऊसर जमीन को कागजों में हेरफेर कर अपने और समिति के नाम कराकर बेचने के मामले में अब तक मास्टर माइंड गोल्डी गुप्ता, अरुण गुप्ता समेत 11 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में अधिग्रहण के बाद सरकारी जमीन बेचकर करोड़ों का मुआवजा हड़पने वाले गोल्डी गुप्ता और उनके साथी सुधाकर मिश्रा को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है। फर्जीवाड़ा करने वाले नौ आरोपी अभी तक पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। अभी समिति और उनके सदस्यों के खिलाफ पांच एफआईआर सिहानी गेट और एक एफआईआर कविनगर में दर्ज कराई जा चुकी है।
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एसआईटी की जांच एक कदम भी नहीं चली
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में धारा थ्रीडी के बाद सरकारी जमीन बेचकर 22 करोड़ का मुआवजा हड़पने वाले आरोपियों के खिलाफ शासन के आदेश के बाद एसआईटी जांच शुरू होने के 15 दिन बाद भी जांच एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है। 20 मई का रसूलपुर सिकरोडा गांव की जमीन बेचने और करोड़ों का मुआवजा हड़पने की रिपोर्ट सिहानी गेट थाने में अरुण गुप्ता समेत आठ लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट में अरुण गुप्ता, किसमिश, फतेह मोहम्मद, सुधाकर मिश्रा को नामजद किया गया। इसके अलावा चार नाम को नहीं खोला गया। तत्कालीन राजस्व कर्मी, सब रजिस्ट्रार, राजस्व कर्मी और भूमि अध्यप्ति का नाम आज तक नहीं खोला गया है।