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इमरजेंसी में एक बेड पर दो मरीज, हृदय और सांस रोग की दवाएं खत्म
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इमरजेंसी में एक बेड पर दो मरीज, हृदय और सांस रोग की दवाएं खत्म
गाजियाबाद। जिला एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यहां बेड की संख्या कम है जबकि गर्मी का पारा चढ़ने से मरीज बढ़ गए हैं। आलम यह है कि एक-एक बेड पर दो-दो मरीज लिटाए जा रहे हैं। इससे भी काम चल नहीं रहा, कई को रेफर किया जा रहा है। इतना ही नहीं, दवाओं की भी भारी किल्लत हो गई है। हृदय और सांस रोग की दवा तो मिल ही नहीं रही। दोपहर दो बजे के बाद परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि एक्सरे और अल्ट्रासाउंड समेत सभी जांच बंद हो जाती हैं।
सोमवार को 70 मरीज आए। इनमें से 56 को ही भर्ती किया जा सका। बेड की कमी और दवाओं की किल्लत के कारण हृदय और सांस रोग के 14 मरीज रेफर कर दिए गए। यह स्थिति रोज की है। यहां छाती रोग, हृदय रोग और गुर्दा रोग के चिकित्सक भी नहीं है। इन बीमारियों के मरीज भी रेफर किए जा रहे हैं। ये परेशानी मरीजों की संख्या के साथ बढ़ती जा रही है।
जिला अस्पताल में भी बेड फुल
इमरजेंसी से मरीज जिला अस्पताल के वार्डों में शिफ्ट किए जाते हैं लेकिन यहां भी स्थिति ठीक नहीं है। पिछले 15 दिन से भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या इतनी बढ़ी है कि बेड फुल हो गए हैं। 160 बेड हैं। जितने खाली होते हैं, उतने ही मरीज आ जाते हैं।
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ओपीडी में डेढ़ गुना हो गए मरीज
जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को बारी का इंतजार काफी समय करना पड़ रहा है। 15 दिन पहले 2000 से 2500 मरीज रोज आते थे। इनकी संख्या डेढ़ गुना हो गई है। रोज 3000 से 3500 आ रहे हैं। सोमवार को 3240 आए।
एक बेड पर दो मरीज होना मजबूरी
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि इमरजेंसी में कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि एक बेड पर दो मरीज हो जाते हैं। इमरजेंसी में आने वाले किसी भी मरीज को बिना इलाज वापस नहीं किया जाता है। अधिकांश दवाइयां उपलब्ध हैं। जो नहीं हैं, उनके विकल्प के तौर पर दूसरी दवाई दी जा रही है ।
तीन दिन बाद भी नहीं दी एक्सपायर दवाइयों की सूची
सीएमओ ने जिले के तीनों बड़े अस्पतालों जिला एमएमजी, महिला और संयुक्त अस्पताल के सीएमएस से स्टोर में उपलब्ध दवाइयों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। तीनों अस्पतालों के सीएमएस को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अस्पताल के दवा स्टोर में उपलब्ध दवाओं और उनकी एक्सपायरी के संबंध में तीन दिनों में सूचना भेजें, जिससे रिपोर्ट शासन को भेजी जा सके। सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री ने नोएडा में अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई बड़ी कमियां मिलीं। इसके बाद से गाजियाबाद के अधिकारियों के इस बात का डर सता रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री के गाजियाबाद में औचक निरीक्षण के दौरान कोई कमी न मिल जाए।
दवाइयों की चल रही है किल्लत
जिला अस्पतालों में कई दवाओं की कमी लंबे समय से चली आ रही है। इसके अलावा लखनऊ में एक्सपायरी दवाइयां मिलने के बाद अस्पतालों के मेडिकल स्टोर में मौजूद दवाइयों के स्टॉक खंगाले जा रहे हैं। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने तीनों अस्पतालों के सीएमएस को दवा स्टोर में उपलब्ध दवाओं के स्टॉक की जांच करने और एक्सपायरी दवाओं के संबंध में पूरी सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
2000-2500
मरीज एमएमजी की ओपीडी में रोज आ रहे थे 15 दिन पहले
3200-3400
मरीज रोज आ रहे हैं गर्मी बढ़ने से, डायरिया के सबसे ज्यादा
35-40
मरीज भर्ती किए जा रहे थे 15 दिन पहले तक
60-70
मरीज रोज भर्ती किए जा रहे हैं
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गाजियाबाद। जिला एमएमजी अस्पताल की इमरजेंसी में मरीजों को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यहां बेड की संख्या कम है जबकि गर्मी का पारा चढ़ने से मरीज बढ़ गए हैं। आलम यह है कि एक-एक बेड पर दो-दो मरीज लिटाए जा रहे हैं। इससे भी काम चल नहीं रहा, कई को रेफर किया जा रहा है। इतना ही नहीं, दवाओं की भी भारी किल्लत हो गई है। हृदय और सांस रोग की दवा तो मिल ही नहीं रही। दोपहर दो बजे के बाद परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि एक्सरे और अल्ट्रासाउंड समेत सभी जांच बंद हो जाती हैं।
सोमवार को 70 मरीज आए। इनमें से 56 को ही भर्ती किया जा सका। बेड की कमी और दवाओं की किल्लत के कारण हृदय और सांस रोग के 14 मरीज रेफर कर दिए गए। यह स्थिति रोज की है। यहां छाती रोग, हृदय रोग और गुर्दा रोग के चिकित्सक भी नहीं है। इन बीमारियों के मरीज भी रेफर किए जा रहे हैं। ये परेशानी मरीजों की संख्या के साथ बढ़ती जा रही है।
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जिला अस्पताल में भी बेड फुल
इमरजेंसी से मरीज जिला अस्पताल के वार्डों में शिफ्ट किए जाते हैं लेकिन यहां भी स्थिति ठीक नहीं है। पिछले 15 दिन से भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या इतनी बढ़ी है कि बेड फुल हो गए हैं। 160 बेड हैं। जितने खाली होते हैं, उतने ही मरीज आ जाते हैं।
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ओपीडी में डेढ़ गुना हो गए मरीज
जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को बारी का इंतजार काफी समय करना पड़ रहा है। 15 दिन पहले 2000 से 2500 मरीज रोज आते थे। इनकी संख्या डेढ़ गुना हो गई है। रोज 3000 से 3500 आ रहे हैं। सोमवार को 3240 आए।
एक बेड पर दो मरीज होना मजबूरी
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार चतुर्वेदी का कहना है कि इमरजेंसी में कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि एक बेड पर दो मरीज हो जाते हैं। इमरजेंसी में आने वाले किसी भी मरीज को बिना इलाज वापस नहीं किया जाता है। अधिकांश दवाइयां उपलब्ध हैं। जो नहीं हैं, उनके विकल्प के तौर पर दूसरी दवाई दी जा रही है ।
तीन दिन बाद भी नहीं दी एक्सपायर दवाइयों की सूची
सीएमओ ने जिले के तीनों बड़े अस्पतालों जिला एमएमजी, महिला और संयुक्त अस्पताल के सीएमएस से स्टोर में उपलब्ध दवाइयों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। तीनों अस्पतालों के सीएमएस को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि अस्पताल के दवा स्टोर में उपलब्ध दवाओं और उनकी एक्सपायरी के संबंध में तीन दिनों में सूचना भेजें, जिससे रिपोर्ट शासन को भेजी जा सके। सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री ने नोएडा में अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान कई बड़ी कमियां मिलीं। इसके बाद से गाजियाबाद के अधिकारियों के इस बात का डर सता रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री के गाजियाबाद में औचक निरीक्षण के दौरान कोई कमी न मिल जाए।
दवाइयों की चल रही है किल्लत
जिला अस्पतालों में कई दवाओं की कमी लंबे समय से चली आ रही है। इसके अलावा लखनऊ में एक्सपायरी दवाइयां मिलने के बाद अस्पतालों के मेडिकल स्टोर में मौजूद दवाइयों के स्टॉक खंगाले जा रहे हैं। सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधार ने तीनों अस्पतालों के सीएमएस को दवा स्टोर में उपलब्ध दवाओं के स्टॉक की जांच करने और एक्सपायरी दवाओं के संबंध में पूरी सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
2000-2500
मरीज एमएमजी की ओपीडी में रोज आ रहे थे 15 दिन पहले
3200-3400
मरीज रोज आ रहे हैं गर्मी बढ़ने से, डायरिया के सबसे ज्यादा
35-40
मरीज भर्ती किए जा रहे थे 15 दिन पहले तक
60-70
मरीज रोज भर्ती किए जा रहे हैं