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लोगों की जेब पर एक और बोझ, अब पार्किंग शुल्क को पांच गुना बढ़ाएगा निगम
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लोगों की जेब पर एक और बोझ, अब पार्किंग शुल्क को पांच गुना बढ़ाएगा निगम
गाजियाबाद। गृहकर और सरकारी दुकानों का किराया बढ़ाने के बाद अब नगर निगम वाहन चालकों पर पार्किंग शुल्क का बोझ बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। स्मार्ट पार्किंग मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने के नाम पर नगर निगम पार्किंग शुल्क को 5 गुना तक बढ़ाएगा। पार्किंग विभाग के अधिकारियों ने इसका खाका तैयार कर लिया है। कार्यकारिणी और नगर निगम बोर्ड से इस प्रस्ताव को मंजूरी न मिली तो अधिकारियों ने गुपचुप महापौर से बोर्ड की प्रत्याशा में स्वीकृति लेकर पार्किंग के टेंडर जारी कर दिए। जल्द ही किसी फर्म को पूरे शहर की पार्किंग का ठेका देकर वसूली शुरू कर दी जाएगी।
फिलहाल नगर निगम ने 34 स्थानों पर पार्किंग का ठेके दिए हुए हैं। इनमें आठ घंटे के लिए दोपहिया वाहन खड़ा करने पर 10 रुपये और चार पहिया वाहन के लिए 20 रुपये शुल्क निर्धारित है। निगम ने यह सभी ठेके अलग-अलग ठेकेदारों को दिए हुए हैं। अब निगम अधिकारी पूरे शहर की पार्किंग का ठेका किसी एक फर्म के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। नगर निगम ने फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए ठेका देने से पहले ही पार्किंग शुल्क के रेट पांच गुना तक बढ़ाकर इनका निर्धारण कर दिया है, ताकि फर्म को बढ़ाने की जरूरत न पड़े। नए प्रस्ताव में नगर निगम अधिकारियों ने चार पहिया वाहन का दो घंटे के लिए न्यूनतम पार्किंग शुल्क 40 रुपये तय कर दिया है। इसके बाद प्रत्येक घंटे पर वाहन मालिक को 20 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। इसी तरह दो पहिया वाहनों के लिए दो घंटे का न्यूनतम पार्किंग शुल्क 20 रुपये तय किया गया है और प्रत्येक घंटे के लिए 10 रुपये देने होंगे। इसी तरह तीन पहिया और बस-ट्रकों के लिए भी शुल्क तय कर दिया गया है। यानी अब शहर में रहना और व्यापार करना ही नहीं वाहन रखना भी महंगा हो जाएगा। लोगों की जेब पर नगर निगम अधिकारी यह बोझ भी नगर निगम चुनाव से पहले डालने की तैयारी कर रहे हैं।
नया प्रस्तावित शुल्क
वाहन प्रथम दो घंटे का पार्किंग शुल्क प्रति घंटे प्रतिदिन प्रतिमाह
चार पहिया वाहन 40 20 100 2000
दो पहिया वाहन 20 10 50 1000
तीन पहिया वाहन 40 20 100 2000
बस-ट्रक 80 40 200 5000
नोट: पार्किंग शुल्क रुपये में है और प्रथम दो घंटे के बाद हर घंटे शुल्क में दी गई दरों के अनुसार बढ़ोतरी होगी।
बोर्ड पर नहीं रहेगा अधिकार, हर दो साल में 10 फीसदी बढ़ेगा शुल्क
नगर निगम अधिकारी एक ही फर्म के हाथों में 10 साल के लिए शहर की पार्किंग व्यवस्था देंगे। फर्म को यह अनुमति होगी कि हर दो साल में पार्किंग शुल्क में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकेगा। यानी बोर्ड से इसकी मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा। शहर के लोगों की जेब पर पार्किंग शुल्क का बोझ हर दो साल में और बढ़ता चला जाएगा।
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नो पार्किंग में वाहन खड़ा करने पर टो चार्ज भी देना पड़ेगा
नगर निगम के नए नियमों में शहर के लोग केवल पार्किंग स्थल पर ही वाहन खड़ा कर सकेंगे। चंद मिनट के लिए भी अगर नो पार्किंग में वाहन खड़ा करेंगे तो ठेका फर्म के कर्मचारी वाहन को उठाकर ले जाएंगे। इसके बाद चार पहिया वाहन को 1500 रुपये, बस-ट्रक के लिए 10 हजार, तीन पहिया वाहन के लिए एक हजार रुपये और दो पहिया 500 रुपये टोइंग शुल्क भी देना होगा।
तीन माह फ्री में काम करेगी ठेकेदार फर्म
नगर निगम ने विज्ञापन ठेके की तरह पार्किंग ठेकेदार को भी तीन माह का एग्जीक्यूशन पीरियड देने का निर्णय लिया है। यानी इन तीन महीनों में ठेकेदार पार्किंग शुल्क तो वसूलेगा, लेकिन अपने संसाधनों को जुटाने के नाम पर नगर निगम को शुल्क नहीं देगा। तीन महीने में यह फर्म करीब तीन करोड़ रुपये की आमदनी करेगी। जबकि सालाना नगर निगम को महज 7.5 करोड़ रुपये मिलेंगे।
व्यवस्थित हाेंगी पार्किंग
पार्किंग प्रभारी संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि महापौर की स्वीकृति लेकर टेंडर जारी किया गया है। इससे नगर निगम को सालाना साढ़े सात करोड़ रुपये की आमदनी होगी। शहर की पार्किंग को स्मार्ट बनाने के साथ-साथ उन्हें व्यवस्थित किया जाएगा।
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गाजियाबाद। गृहकर और सरकारी दुकानों का किराया बढ़ाने के बाद अब नगर निगम वाहन चालकों पर पार्किंग शुल्क का बोझ बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। स्मार्ट पार्किंग मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने के नाम पर नगर निगम पार्किंग शुल्क को 5 गुना तक बढ़ाएगा। पार्किंग विभाग के अधिकारियों ने इसका खाका तैयार कर लिया है। कार्यकारिणी और नगर निगम बोर्ड से इस प्रस्ताव को मंजूरी न मिली तो अधिकारियों ने गुपचुप महापौर से बोर्ड की प्रत्याशा में स्वीकृति लेकर पार्किंग के टेंडर जारी कर दिए। जल्द ही किसी फर्म को पूरे शहर की पार्किंग का ठेका देकर वसूली शुरू कर दी जाएगी।
फिलहाल नगर निगम ने 34 स्थानों पर पार्किंग का ठेके दिए हुए हैं। इनमें आठ घंटे के लिए दोपहिया वाहन खड़ा करने पर 10 रुपये और चार पहिया वाहन के लिए 20 रुपये शुल्क निर्धारित है। निगम ने यह सभी ठेके अलग-अलग ठेकेदारों को दिए हुए हैं। अब निगम अधिकारी पूरे शहर की पार्किंग का ठेका किसी एक फर्म के हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। नगर निगम ने फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए ठेका देने से पहले ही पार्किंग शुल्क के रेट पांच गुना तक बढ़ाकर इनका निर्धारण कर दिया है, ताकि फर्म को बढ़ाने की जरूरत न पड़े। नए प्रस्ताव में नगर निगम अधिकारियों ने चार पहिया वाहन का दो घंटे के लिए न्यूनतम पार्किंग शुल्क 40 रुपये तय कर दिया है। इसके बाद प्रत्येक घंटे पर वाहन मालिक को 20 रुपये अतिरिक्त देने होंगे। इसी तरह दो पहिया वाहनों के लिए दो घंटे का न्यूनतम पार्किंग शुल्क 20 रुपये तय किया गया है और प्रत्येक घंटे के लिए 10 रुपये देने होंगे। इसी तरह तीन पहिया और बस-ट्रकों के लिए भी शुल्क तय कर दिया गया है। यानी अब शहर में रहना और व्यापार करना ही नहीं वाहन रखना भी महंगा हो जाएगा। लोगों की जेब पर नगर निगम अधिकारी यह बोझ भी नगर निगम चुनाव से पहले डालने की तैयारी कर रहे हैं।
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नया प्रस्तावित शुल्क
वाहन प्रथम दो घंटे का पार्किंग शुल्क प्रति घंटे प्रतिदिन प्रतिमाह
चार पहिया वाहन 40 20 100 2000
दो पहिया वाहन 20 10 50 1000
तीन पहिया वाहन 40 20 100 2000
बस-ट्रक 80 40 200 5000
नोट: पार्किंग शुल्क रुपये में है और प्रथम दो घंटे के बाद हर घंटे शुल्क में दी गई दरों के अनुसार बढ़ोतरी होगी।
बोर्ड पर नहीं रहेगा अधिकार, हर दो साल में 10 फीसदी बढ़ेगा शुल्क
नगर निगम अधिकारी एक ही फर्म के हाथों में 10 साल के लिए शहर की पार्किंग व्यवस्था देंगे। फर्म को यह अनुमति होगी कि हर दो साल में पार्किंग शुल्क में 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकेगा। यानी बोर्ड से इसकी मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा। शहर के लोगों की जेब पर पार्किंग शुल्क का बोझ हर दो साल में और बढ़ता चला जाएगा।
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नो पार्किंग में वाहन खड़ा करने पर टो चार्ज भी देना पड़ेगा
नगर निगम के नए नियमों में शहर के लोग केवल पार्किंग स्थल पर ही वाहन खड़ा कर सकेंगे। चंद मिनट के लिए भी अगर नो पार्किंग में वाहन खड़ा करेंगे तो ठेका फर्म के कर्मचारी वाहन को उठाकर ले जाएंगे। इसके बाद चार पहिया वाहन को 1500 रुपये, बस-ट्रक के लिए 10 हजार, तीन पहिया वाहन के लिए एक हजार रुपये और दो पहिया 500 रुपये टोइंग शुल्क भी देना होगा।
तीन माह फ्री में काम करेगी ठेकेदार फर्म
नगर निगम ने विज्ञापन ठेके की तरह पार्किंग ठेकेदार को भी तीन माह का एग्जीक्यूशन पीरियड देने का निर्णय लिया है। यानी इन तीन महीनों में ठेकेदार पार्किंग शुल्क तो वसूलेगा, लेकिन अपने संसाधनों को जुटाने के नाम पर नगर निगम को शुल्क नहीं देगा। तीन महीने में यह फर्म करीब तीन करोड़ रुपये की आमदनी करेगी। जबकि सालाना नगर निगम को महज 7.5 करोड़ रुपये मिलेंगे।
व्यवस्थित हाेंगी पार्किंग
पार्किंग प्रभारी संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि महापौर की स्वीकृति लेकर टेंडर जारी किया गया है। इससे नगर निगम को सालाना साढ़े सात करोड़ रुपये की आमदनी होगी। शहर की पार्किंग को स्मार्ट बनाने के साथ-साथ उन्हें व्यवस्थित किया जाएगा।